राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कराधान और भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम में महत्वपूर्ण संशोधनों को मंजूरी दे दी है। ये बदलाव विदेशी निवेश को आकर्षित करने और डिजिटल भुगतान ढांचे को मजबूत करने के लिए किए गए हैं।

  • राष्ट्रपति ने कराधान और भुगतान एवं निपटता प्रणाली अधिनियम में संशोधनों को मंजूरी दी।
  • विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के लिए टैक्स छूट का विस्तार किया गया है।
  • UPI और RuPay लेनदेन पर MDR शुल्क ढांचे को संशोधित करने का कानूनी अधिकार सरकार को मिला।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण को बढ़ावा देने के लिए 2040-41 तक टैक्स छूट का प्रावधान।

नई दिल्ली में जारी एक राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 'कराधान और अन्य कानून (संशोधन) अधिनियम, 2026' और 'भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007' में संशोधन करने वाले विधेयक को अपनी सहमति दे दी है। संसद द्वारा 10 अगस्त को पारित किए गए इन विधेयकों को 17 अगस्त, 2026 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई।

यह विधायी कदम भारत की अर्थव्यवस्था को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। कराधान संशोधन का मुख्य लक्ष्य विदेशी पूंजी प्रवाह को बढ़ाना और घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को नई गति देना है। इसके माध्यम से सरकार विदेशी क्लाउड कंपनियों के लिए भारतीय डेटा केंद्रों का उपयोग करना आसान बनाएगी, जिससे 'प्रक्रियात्मक निश्चितता' सुनिश्चित होगी।

डिजिटल भुगतान में बड़ा बदलाव

भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम में संशोधन सरकार को UPI और RuPay कार्ड लेनदेन पर 'जीरो-MDR' (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) ढांचे को संशोधित करने के लिए कानूनी शक्ति प्रदान करता है। अब सरकार अधिसूचना के माध्यम से यह तय कर सकेगी कि किन इलेक्ट्रॉनिक भुगतान मोडों को MDR शुल्क से मुक्त रखा जाएगा।

वर्तमान में, बैंक और भुगतान सेवा प्रदाता UPI और RuPay डेबिट कार्ड के माध्यम से किए गए भुगतान के लिए उपयोगकर्ताओं से शुल्क नहीं ले सकते हैं। नए नियमों के तहत, NPCI के नेतृत्व वाली UPI और सेवा संचालन समिति MDR शुल्क के निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि UPI उपभोक्ताओं के लिए मुफ्त रहेगा, और भविष्य में MDR केवल कुछ विशिष्ट श्रेणियों के व्यापारियों पर लागू हो सकता है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और विदेशी निवेश को प्रोत्साहन

सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में 'मेक इन इंडिया' को सशक्त बनाने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। अधिनियम के तहत, उन विदेशी कंपनियों को 2040-41 तक आयकर छूट दी जाएगी जो भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स सामान बनाने के लिए अनुबंध निर्माताओं (contract manufacturers) का उपयोग करती हैं। इसमें मोबाइल फोन, लैपटॉप, टैबलेट और सर्वर जैसे उपकरण शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त, घटक आपूर्ति (component supply) को समर्थन देने के लिए, उन विदेशी कंपनियों को 15 वर्षों तक टैक्स छूट का प्रस्ताव दिया गया है जो अपने घटकों को सीमा शुल्क गोदामों में रखती हैं ताकि उन्हें भारतीय निर्माताओं को आपूर्ति किया जा सके।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि ये संशोधन भारत को एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र और डिजिटल भुगतान महाशक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक रणनीतिक कदम हैं। टैक्स नियमों में स्पष्टता और डिजिटल भुगतान ढांचे में लचीलापन निवेशकों के भरोसे को बढ़ाएगा।

Historical Background

इससे पहले, 5 जून के अध्यादेश के माध्यम से G-Secs में निवेश से होने वाली आय पर FPI को कर छूट दी गई थी, जिसे अब इस नए अधिनियम के माध्यम से विधायी रूप दिया गया है। यह बदलाव भारत के जटिल कर ढांचे को सरल बनाने की निरंतर प्रक्रिया का हिस्सा है।

Did You Know?: UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) ने भारत में डिजिटल लेनदेन की दुनिया को पूरी तरह बदल दिया है, जिससे नकदी पर निर्भरता कम हुई है।

Frequently Asked Questions

1. क्या UPI का उपयोग करने के लिए ग्राहकों को अब शुल्क देना होगा?
नहीं, सरकार ने स्पष्ट किया है कि UPI उपभोक्ताओं के लिए मुफ्त रहेगा।

2. इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के लिए टैक्स छूट कब तक लागू रहेगी?
विशिष्ट शर्तों के तहत यह छूट वर्ष 2040-41 तक विस्तारित की गई है।