पुणे स्थित स्टार्टअप प्रोऑन (Proeon) मूंगफली को उच्च-शुद्धता वाले प्रोटीन आइसोलेट्स में बदलकर पोषण क्षेत्र में बदलाव ला रहा है। पशु-आधारित प्रोटीन के विकल्प के रूप में, कंपनी ने 2024-25 के बीच अपने राजस्व में आठ गुना वृद्धि दर्ज की है।

  • प्रोऑन 'Proeon Peanut 80' का उत्पादन करता है, जो गुजरात की मूंगफली से बना 80% शुद्ध प्रोटीन आइसोलेट है।
  • स्टार्टअप ने 2024 और 2025 के बीच राजस्व में 8 गुना वृद्धि दर्ज की है, और 2027 तक 5 गुना और वृद्धि की उम्मीद है।
  • यह उद्यम पशु-आधारित प्रोटीन उत्पादन से जुड़े पर्यावरणीय दुष्प्रभावों को कम करने पर केंद्रित है।

एक ऐसे दौर में जब वैश्विक खाद्य सुरक्षा खतरे में है, फार्मास्युटिकल और न्यूट्रास्युटिकल क्षेत्र के दिग्गजों केविन पारेख और आशीष कोरडे ने प्रोटीन की खपत के तरीके को बदलने की एक साहसी पहल शुरू की है। पुणे स्थित उनके स्टार्टअप, प्रोऑन (Proeon), की स्थापना 2018 में हुई थी, जिसका उद्देश्य भारत में प्रोटीन की कमी को दूर करना और औद्योगिक पशुपालन से होने वाले पारिस्थितिक संकट का समाधान करना है।

प्रोऑन की शुरुआत एक व्यापक राष्ट्रीय चिंता के साथ हुई। 2018 में, तत्कालीन उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा था कि दालों, मांस और अंडों के अपर्याप्त सेवन के कारण भारत में प्रोटीन की कमी एक स्थायी समस्या बनी हुई है। प्रोऑन का मिशन केवल पौधों पर आधारित स्रोतों का उपयोग करके भारत के प्रोटीन सेवन को बढ़ाना है, ताकि स्वास्थ्य के साथ-साथ पर्यावरण से भी समझौता न हो।

सतत पोषण का विज्ञान

पशु प्रोटीन का एक व्यवहार्य विकल्प विकसित करने के लिए गहन वैज्ञानिक सत्यापन की आवश्यकता थी। प्रोऑन की टीम ने लगभग 40 भारतीय फसलों, जैसे अनाज, बाजरा, तिलहन और दालों का अध्ययन किया। उन्होंने पोषण, स्वाद, कार्यक्षमता और आपूर्ति श्रृंखला की उपलब्धता जैसे चार मापदंडों पर इनका मूल्यांकन किया। मैसूरु स्थित केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिक अनुसंधान संस्थान (CFTRI) की प्रयोगशाला में काम करते हुए, उन्होंने अंततः अपने प्रमुख उत्पाद 'Proeon Peanut 80' को अंतिम रूप दिया।

यह उत्पाद केवल एक सप्लीमेंट नहीं है, बल्कि एक अत्यधिक परिष्कृत प्रोटीन आइसोलेट है जिसमें 80% शुद्ध प्रोटीन है और यह फाइबर और स्वस्थ वसा से भरपूर है। अपनी बेहतरीन स्वाद और पाचन क्षमता के कारण, यह दुनिया भर के 25 से अधिक ब्रांडों की पहली पसंद बन गया है। इनका उपयोग प्रोटीन बार, हाई-प्रोटीन आटा, कुकीज और स्नैक्स बनाने में किया जा रहा है, जो भारत, अमेरिका और यूरोप में बेचे जा रहे हैं।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि प्रोऑन खुद को 'क्लीन लेबल' मूवमेंट और 'जलवायु कार्रवाई' के संगम पर स्थापित कर रहा है। पशु-आधारित प्रोटीन, विशेष रूप से रेड मीट और डेयरी, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के मुख्य कारक हैं और इनमें पानी और जमीन की अत्यधिक खपत होती है। गुजरात के मूंगफली उत्पादकों का लाभ उठाकर, प्रोऑन एक ऐसी अर्थव्यवस्था बना रहा है जो स्थानीय किसानों को लाभ पहुँचाती है और 10 अरब की वैश्विक जनसंख्या के लिए एक स्केलेबल समाधान प्रदान करती है।

"प्लांट-बेस्ड प्रोटीन की ओर बढ़ना अब केवल एक आहार विकल्प नहीं है, बल्कि मानवता का पेट भरने के लिए पृथ्वी के संसाधनों को बचाने की एक पारिस्थितिक आवश्यकता है।"

वर्तमान में पुणे के वेंचर सेंटर से संचालित प्रोऑन तेजी से विस्तार कर रहा है। दो मौजूदा कारखानों में प्रति माह 150-200 मीट्रिक टन प्रोटीन आइसोलेट्स का उत्पादन हो रहा है, और क्षमता को 500 मीट्रिक टन प्रति माह तक बढ़ाने का काम जारी है।

विशेषतापशु-आधारित प्रोटीनप्रोऑन प्लांट प्रोटीन
पर्यावरणीय प्रभावउच्च GHG, अधिक जल खपतकम GHG, टिकाऊ
स्रोतपशु/डेयरीगुजरात की मूंगफली
पाचन क्षमतापरिवर्तनीय (भारी हो सकता है)उच्च (क्लीन आइसोलेट)
स्थिरताकम (भूमि गहन)उच्च (फसल आधारित)
क्या आप जानते हैं?: भारत दुनिया के शीर्ष मूंगफली उत्पादकों में से एक है, जो इसे प्लांट-बेस्ड प्रोटीन तकनीक को वैश्विक स्तर पर ले जाने के लिए एक आदर्श केंद्र बनाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Proeon Peanut 80 क्या है?
यह मूंगफली से प्राप्त 80% शुद्ध प्रोटीन आइसोलेट है, जिसे पशु प्रोटीन के टिकाऊ, फाइबर-युक्त और स्वस्थ विकल्प के रूप में विकसित किया गया है।

प्रोऑन के प्रोटीन का उपयोग कहाँ किया जाता है?
इसका उपयोग दुनिया भर के 25 से अधिक ब्रांडों द्वारा प्रोटीन बार, कुकीज और स्नैक्स जैसे उत्पादों में किया जा रहा है।