उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (UP-RERA) ने बिल्डर्स की मनमानी रोकने के लिए नए और सख्त नियम लागू किए हैं। इन संशोधनों के तहत प्रोजेक्ट के बैंक खातों, विज्ञापनों और पारदर्शिता को लेकर कड़े दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

  • बिल्डर्स को अब प्रोजेक्ट के लिए तीन अलग-अलग बैंक खाते रखने होंगे।
  • अनरजिस्टर्ड प्रोजेक्ट के खरीदार भी अब ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकेंगे।
  • विज्ञापन में RERA रजिस्ट्रेशन नंबर और QR कोड देना अनिवार्य होगा।
  • देरी से रिपोर्ट जमा करने पर भारी जुर्माने का प्रावधान।

उत्तर प्रदेश में घर खरीदने का सपना देख रहे लोगों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (UP-RERA) ने रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता लाने और बिल्डर्स की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए व्यापक संशोधनों के साथ नए सामान्य नियम जारी किए हैं। प्राधिकरण ने 13 जुलाई 2026 तक किए गए 12 महत्वपूर्ण संशोधनों को मिलाकर नियमों का एक नया सेट प्रकाशित किया है।

बिल्डर्स की जवाबदेही और पारदर्शिता

नए नियमों के तहत, अब बिल्डर या प्रमोटर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं पाएंगे। प्रत्येक प्रोजेक्ट के लिए आर्किटेक्ट, इंजीनियर और चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) की जानकारी सार्वजनिक करना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा, ग्राहकों की समस्याओं के समाधान के लिए एक समर्पित कस्टमर रिलेशनशिप मैनेजर और टोल-फ्री नंबर उपलब्ध कराना भी अब कानूनी रूप से आवश्यक है। हर तीन महीने में प्रोजेक्ट की प्रगति रिपोर्ट (QPR) विशेषज्ञों के प्रमाण पत्र के साथ जमा करनी होगी।

वित्तीय सुरक्षा: तीन बैंक खातों का नियम

सबसे महत्वपूर्ण बदलाव वित्तीय प्रबंधन को लेकर है। बिल्डर्स को अब तीन अलग-अलग बैंक खाते संचालित करने होंगे: कलेक्शन अकाउंट, सेपरेट अकाउंट और ट्रांजेक्शन अकाउंट। खरीदारों से प्राप्त राशि का 70% हिस्सा सेपरेट अकाउंट में और 30% ट्रांजेक्शन अकाउंट में जाएगा। यह सुनिश्चित करेगा कि खरीदारों का पैसा केवल उसी प्रोजेक्ट के निर्माण में उपयोग हो जिसके लिए वह दिया गया है। साथ ही, बिल्डर अब ग्राहकों से नकद लेनदेन नहीं कर सकेंगे।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि ये नियम उत्तर प्रदेश के रियल एस्टेट बाजार में विश्वास बहाली के लिए एक मील का पत्थर साबित होंगे। अक्सर देखा गया है कि बिल्डर्स प्रोजेक्ट के फंड का उपयोग अन्य कार्यों के लिए कर लेते थे, लेकिन तीन खातों के अनिवार्य नियम से इस वित्तीय हेरफेर पर रोक लगेगी।

UP-RERA के ये कड़े कदम रियल एस्टेट क्षेत्र में 'ग्राहक प्रथम' की संस्कृति को स्थापित करेंगे और धोखाधड़ी की गुंजाइश को न्यूनतम कर देंगे।

विज्ञापनों और एजेंटों पर नियंत्रण

अब बिल्डर लुभावने विज्ञापनों के जरिए ग्राहकों को गुमराह नहीं कर पाएंगे। हर विज्ञापन और ब्रोशर में UP-RERA रजिस्ट्रेशन नंबर, वेबसाइट का लिंक, QR कोड और प्रोजेक्ट लॉन्च की तारीख स्पष्ट रूप से दिखाई देनी चाहिए। इसके अलावा, रियल एस्टेट एजेंटों के लिए भी पंजीकरण और प्रशिक्षण प्रमाणपत्र अनिवार्य कर दिया गया है।

Did You Know?: अब यदि किसी आवंटी की मृत्यु के बाद परिवार के सदस्य को फ्लैट ट्रांसफर करना हो, तो इसके लिए मात्र ₹1,000 का शुल्क लगेगा, जिससे बिल्डर्स द्वारा वसूले जाने वाले मनमाने शुल्कों पर रोक लगेगी।

Frequently Asked Questions

1. क्या अनरजिस्टर्ड प्रोजेक्ट के खरीदार भी शिकायत कर सकते हैं?
हाँ, UP-RERA ने अब अनरजिस्टर्ड प्रोजेक्ट के खरीदारों को भी ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने और राहत पाने का अधिकार दिया है।

2. रिपोर्ट जमा करने में देरी पर कितना जुर्माना है?
QPR जमा करने में देरी पर ₹15,000 और सालाना ऑडिट रिपोर्ट में देरी पर ₹25,000 का जुर्माना लगाया जाएगा।