ज़ोमैटो के डिलीवरी पार्टनर्स के लिए शुरू किए गए नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) मॉडल ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है, जिसमें कुल योगदान ₹1 करोड़ से अधिक हो गया है और 2 लाख से ज्यादा पार्टनर्स ने पंजीकरण कराया है।
- NPS योगदान ₹1 करोड़ के पार, 2 लाख से अधिक PRAN नामांकन।
- HDFC पेंशन और PFRDA के सहयोग से 'NPS प्लेटफॉर्म वर्कर्स मॉडल' की सफलता।
- गिग वर्कर्स के लिए दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम।
भारत के प्रमुख फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म Zomato ने एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल किया है। कंपनी ने घोषणा की है कि उसके प्लेटफॉर्म के माध्यम से जुड़े डिलीवरी पार्टनर्स के National Pension System (NPS) योगदान ने ₹1 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है। इस योजना के तहत अब तक 2 लाख से अधिक Permanent Retirement Account Numbers (PRAN) जारी किए जा चुके हैं।
यह उपलब्धि अक्टूबर 2025 में शुरू किए गए 'NPS प्लेटफॉर्म वर्कर्स मॉडल' का परिणाम है। इस मॉडल को HDFC Pension और PFRDA (पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण) के सहयोग से तैयार किया गया था, जबकि Kfintech ने केंद्रीय रिकॉर्डकीपिंग एजेंसी के रूप में कार्य किया। यह पहल विशेष रूप से गिग इकोनॉमी में काम करने वाले श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए डिज़ाइन की गई है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत में गिग वर्कफोर्स का विस्तार तेजी से हो रहा है, लेकिन इस क्षेत्र में सामाजिक सुरक्षा का अभाव हमेशा एक चुनौती रहा है। ज़ोमैटो का यह मॉडल न केवल बचत को बढ़ावा देता है, बल्कि 'पोर्टेबिलिटी' की सुविधा भी देता है, जिससे कर्मचारी एक काम से दूसरे काम पर जाने पर भी अपने पेंशन लाभों को सुरक्षित रख सकते हैं।
रिटायरमेंट सुरक्षा काम की प्रकृति पर निर्भर नहीं होनी चाहिए; छोटे और नियमित योगदान भविष्य की एक मजबूत नींव रख सकते हैं।
ज़ोमैटो के सीईओ Aditya Mangla ने कहा कि डिलीवरी पार्टनर्स कंपनी के पारिस्थितिकी तंत्र का एक अभिन्न अंग हैं और यह मील का पत्थर उनके सुरक्षित भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वहीं, HDFC पेंशन के एमडी और सीईओ Sriram Iyer ने इसे उद्योग, नियामक और कॉर्पोरेट्स की सामूहिक सफलता बताया।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में गिग इकोनॉमी पिछले एक दशक में तेजी से उभरी है। पारंपरिक पेंशन योजनाओं के विपरीत, प्लेटफॉर्म वर्कर्स के पास अक्सर सेवानिवृत्ति के लिए कोई औपचारिक ढांचा नहीं होता था। PFRDA द्वारा समर्थित इस नए मॉडल ने डिजिटल केवाईसी (eKYC) के माध्यम से नामांकन प्रक्रिया को इतना सरल बना दिया है कि डिलीवरी पार्टनर आसानी से अपनी आय का एक छोटा हिस्सा भविष्य के लिए बचा सकते हैं।
Frequently Asked Questions
1. NPS प्लेटफॉर्म वर्कर्स मॉडल क्या है?
यह एक विशेष योजना है जो ज़ोमैटो जैसे प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले डिलीवरी पार्टनर्स को नियमित बचत के माध्यम से पेंशन बनाने की सुविधा देती है।
2. क्या ये लाभ काम बदलने पर भी मिलते हैं?
हाँ, इस मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता इसकी पोर्टेबिलिटी है, जिससे पार्टनर्स अपने लाभों को बरकरार रख सकते हैं।