भारत सरकार खाली पड़े सोने को अर्थव्यवस्था में लाने के लिए एक नई योजना पर विचार कर रही है, जिसमें ज्वेलर्स को मुख्य भूमिका दी जा सकती है। इस योजना के तहत नागरिक अपना भौतिक सोना जमा कर ब्याज कमा सकेंगे।
- सरकार ज्वेलर्स को गोल्ड डिपॉजिट एजेंट बनाने की योजना बना रही है।
- नागरिकों को जमा किए गए सोने पर ब्याज मिलेगा।
- सोना सीधे डिमैट खाते में दिखाई देगा।
- यह कदम देश के विदेशी मुद्रा भंडार और निवेश को मजबूती दे सकता है।
भारत सरकार घरेलू स्तर पर बेकार पड़े सोने (Idle Gold) को अर्थव्यवस्था में लाने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के अनुसार, सरकार एक नई स्वर्ण मुद्रीकरण योजना (Gold Monetisation Scheme) पर विचार कर रही है, जिसमें बैंकों के बजाय ज्वेलर्स को सोने के संग्रह का मुख्य माध्यम बनाया जा सकता है।
योजना का स्वरूप और लाभ
प्रस्तावित योजना के तहत, नागरिक अपने नजदीकी जौहरी के पास जाकर अपना भौतिक सोना जमा कर सकेंगे। इस जमा किए गए सोने को डिमैट खाते के माध्यम से ट्रैक किया जाएगा, ठीक वैसे ही जैसे शेयर बाजार में स्टॉक रखे जाते हैं। बदले में, जमाकर्ताओं को उनके सोने के मूल्य पर आकर्षक ब्याज मिलता रहेगा।
अखिल भारतीय रत्न एवं आभूषण घरेलू परिषद (GJC) के अध्यक्ष राजेश रोकड़े ने पुष्टि की है कि सरकार इस प्रस्ताव को लेकर गंभीर है और इसे जल्द से जल्द लागू करने का आश्वासन दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ज्वेलर्स को शामिल करने से लोगों का भरोसा बढ़ेगा, क्योंकि भारतीय परिवारों का अपने पारिवारिक जौहरी के साथ एक गहरा विश्वास होता है, जो अक्सर बैंकों के साथ नहीं मिल पाता।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह योजना भारत के मैक्रोइकॉनॉमिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल सकती है। यदि भारत में रखे गए कुल सोने का केवल 10% हिस्सा भी मुद्रीकृत किया जाता है, तो यह लगभग $400 बिलियन के बराबर होगा। कोटक एएमसी के एमडी नीलेश शाह के अनुसार, यह राशि भारत में आने वाले 5 वर्षों के कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के बराबर है।
यदि हम घरेलू बचत को तरल पूंजी में बदल देते हैं, तो यह निवेश के लिए एक विशाल भंडार तैयार कर देगा।
वर्तमान में, पश्चिम एशिया संकट के कारण ईंधन की बढ़ती कीमतों और सोने के बढ़ते आयात के कारण विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बना हुआ है। यह योजना न केवल आयात पर निर्भरता कम करेगी, बल्कि घरेलू निवेश को भी बढ़ावा देगी।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
इससे पहले 2015 में सरकार ने स्वर्ण मुद्रीकरण योजना शुरू की थी, लेकिन बैंकों पर आधारित होने के कारण वह बहुत सफल नहीं रही। मार्च 2025 तक केवल 38 टन सोना ही जुटाया जा सका था। नई योजना में सोने के सिक्कों और बिस्कुटों को भी शामिल करने की संभावना है, जिससे इसकी पहुंच व्यापक होगी।
Frequently Asked Questions
1. क्या मैं अपने पुराने गहने जमा कर सकता हूँ?
प्रस्ताव के अनुसार, भौतिक सोने के साथ-साथ सोने के सिक्के और बार भी जमा किए जा सकेंगे।
2. क्या यह योजना बैंकों वाली योजना से अलग है?
हाँ, मुख्य अंतर यह है कि इस बार ज्वेलर्स को कलेक्शन पार्टनर बनाया जा रहा है ताकि लोगों के लिए प्रक्रिया आसान हो सके।