NALCO ने ओडिशा में कोयला फ्लाई ऐश और रेड मड जैसे औद्योगिक कचरे से दुर्लभ मृदा तत्वों (REE) और अन्य मूल्यवान उत्पादों को निकालने के लिए अत्याधुनिक पायलट प्लांट का उद्घाटन किया है।
- NALCO ने कोयला फ्लाई ऐश और रेड मड से मूल्यवान खनिज निकालने के लिए पायलट प्लांट शुरू किए हैं।
- इन परियोजनाओं का उद्देश्य दुर्लभ मृदा तत्व (REE) जैसे स्कैंडियम की प्राप्ति करना है।
- यह पहल भारत की महत्वपूर्ण खनिज सुरक्षा और चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) को मजबूत करेगी।
ओडिशा में औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम उठाया गया है। भारत की सबसे बड़ी सार्वजनिक क्षेत्र की एल्युमीनियम निर्माता कंपनी, NALCO ने कोयला फ्लाई ऐश और रेड मड (बॉक्साइट अवशेष) से मूल्यवान संसाधनों को निकालने के लिए पायलट प्रोजेक्ट्स की शुरुआत की है। NALCO के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक बृजेंद्र प्रताप सिंह ने भुवनेश्वर स्थित NALCO अनुसंधान और प्रौद्योगिकी केंद्र (NRTC) में पहले स्वदेशी पायलट प्लांट का उद्घाटन किया।
यह पहल विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि फ्लाई ऐश और रेड मड को अब तक केवल कचरा माना जाता था। नवीनतम अनुसंधान से पता चला है कि इन अवशेषों में दुर्लभ मृदा तत्व (Rare Earth Elements - REE) और अन्य उच्च-मूल्य वाली सामग्रियां मौजूद हैं। यह पायलट प्लांट CSIR-IMMT और KIIT विश्वविद्यालय के सहयोग से विकसित एक पेटेंट प्रक्रिया का उपयोग करेगा, जो 50 किलोग्राम प्रति दिन की क्षमता के साथ काम करेगा।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह तकनीक भारत की रणनीतिक स्वायत्तता के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है। दुर्लभ मृदा तत्वों का उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा उपकरणों के निर्माण में किया जाता है। इन तत्वों के लिए आयात पर निर्भरता कम करना भारत की 'आत्मनिर्भर भारत' की दृष्टि के लिए अत्यंत आवश्यक है।
औद्योगिक कचरे का मूल्यवान संसाधनों में परिवर्तन न केवल पर्यावरण संरक्षण करता है, बल्कि देश की महत्वपूर्ण खनिज सुरक्षा को भी सुनिश्चित करता है।
इस नई प्रक्रिया के माध्यम से एल्युमिना, सिरेमिक अनुप्रयोगों के लिए कैल्शियम सिलिकेट, कांच निर्माण के लिए क्वार्ट्ज अवशेष और स्कैंडियम सहित दुर्लभ मृदा तत्वों से समृद्ध आयरन हाइड्रोक्साइड अवशेष प्राप्त किए जा सकेंगे। इसके साथ ही, रेड मड के प्रसंस्करण के लिए भी एक संयंत्र स्थापित किया जा रहा है, जो फेरो-टाइटेनियम मिश्र धातु और धात्विक लोहे की प्राप्ति पर ध्यान केंद्रित करेगा।
| अपशिष्ट प्रकार | संभावित प्राप्त उत्पाद | प्रमुख उपयोग |
|---|---|---|
| कोयला फ्लाई ऐश | एल्युमिना, कैल्शियम सिलिकेट, स्कैंडियम | एल्युमीनियम, सिरेमिक, रक्षा उपकरण |
| रेड मड (बॉक्साइट अवशेष) | फेरो-टाइटेनियम, धात्विक लोहा, REE | धातु उद्योग, उच्च तकनीक उपकरण |
Frequently Asked Questions
1. यह पायलट प्लांट कहाँ स्थित है?
यह पायलट प्लांट ओडिशा के भुवनेश्वर में NALCO अनुसंधान और प्रौद्योगिकी केंद्र (NRTC) में स्थित है।
2. दुर्लभ मृदा तत्व (REE) क्यों महत्वपूर्ण हैं?
REE का उपयोग स्थायी चुंबक, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, नवीकरणीय ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र के उच्च-तकनीकी अनुप्रयोगों में किया जाता है।