खनिज और खनन (Mines and Minerals) संशोधन विधेयक, 2026 संसद से पारित हो गया है, जिससे राज्यों की कर लगाने की शक्ति सीमित हो गई है। यह कदम निवेश को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है, लेकिन राज्यों की राजस्व चिंताओं ने संघीय ढांचे पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मुख्य बातें

  • संसद ने 'खनिज और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026' पारित किया।
  • यह विधेयक खनिज अधिकारों पर राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले करों और लेवी को सीमित करता है।
  • केंद्र का लक्ष्य निवेश को आकर्षित करना और बुनियादी ढांचे की लागत को कम करना है।
  • ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे खनिज संपन्न राज्यों को राजस्व हानि का डर है।

हाल ही में संसद द्वारा पारित खनिज और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 ने देश के खनन परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण बदलाव की शुरुआत की है। इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य खनिज अधिकारों और खनिज युक्त भूमि पर राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले विभिन्न करों और लेवी को नियंत्रित करना है। केंद्र सरकार का तर्क है कि इससे क्षेत्र में अनिश्चितता कम होगी, निवेश का प्रवाह बढ़ेगा और बुनियादी ढांचे की लागत पर पड़ने वाला अतिरिक्त बोझ कम होगा।

हालांकि, इस कदम का राज्यों ने कड़ा विरोध किया है। विशेष रूप से झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों के लिए, जो खनिज संपदा पर अत्यधिक निर्भर हैं, यह संशोधन उनके वित्तीय स्वायत्तता के लिए एक गंभीर चुनौती है। राज्यों का कहना है कि यह कदम 'राजकोषीय संघवाद' (Fiscal Federalism) के सिद्धांतों के विरुद्ध है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, भारत में खनन क्षेत्र का प्रभावी कर दर 50% से अधिक है, जबकि अन्य देशों में यह केवल 35 से 40% के बीच है। उच्च कर दरें निवेशकों को हतोत्साहित करती हैं। यदि भारत को अपनी 'क्रिटिकल मिनरल मिशन' में सफलता प्राप्त करनी है, तो एक पूर्वानुमानित और स्थिर खनन ढांचा अनिवार्य है।

एक स्थिर और पारदर्शी खनन नीति ही भारत को वैश्विक खनिज आपूर्ति श्रृंखला का केंद्र बना सकती है।

विगत वर्षों में, सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को खनिज कर लगाने का अधिकार दिया था, जिसके बाद कई राज्यों ने लौह अयस्क और चूना पत्थर जैसे खनिजों पर नए कर लगाए। केंद्र के इस नए कानून का उद्देश्य इन विविध दरों में एकरूपता लाना और कीमतों में स्थिरता सुनिश्चित करना है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

खनन क्षेत्र हमेशा से केंद्र और राज्यों के बीच अधिकार क्षेत्र का विवाद रहा है। जहाँ केंद्र के पास विनियमन की शक्ति है, वहीं राज्यों के पास संसाधनों पर स्वामित्व और राजस्व संग्रह का अधिकार है। 2026 का यह संशोधन इस शक्ति संतुलन को केंद्र की ओर झुकाने का एक बड़ा प्रयास है।

क्या आप जानते हैं?: भारत में खनन क्षेत्र से प्राप्त राजस्व राज्यों के गैर-कर राजस्व का एक बहुत बड़ा हिस्सा होता है, जो उनकी सामाजिक कल्याण योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. इस नए कानून का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य खनन क्षेत्र में करों का युक्तिकरण करना और निवेशकों के लिए एक पूर्वानुमानित वातावरण बनाना है।

2. राज्यों को इससे क्या समस्या है?
राज्यों को डर है कि उनके कर लगाने की शक्तियों में कटौती से उनके राजस्व में भारी गिरावट आएगी।