तमिलनाडु सरकार को नए कर लगाने से पहले अपने मौजूदा राजस्व संग्रह को मजबूत करने और खर्च की दक्षता बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए। CAG की रिपोर्ट बजट प्रबंधन में सुधार की तत्काल आवश्यकता की ओर इशारा करती है।

  • तमिलनाडु में उच्च ऋण और राजस्व घाटा एक गंभीर वित्तीय चुनौती है।
  • CAG के अनुसार, पिछले बजट में ₹33,302 करोड़ से अधिक का अधिशेष (underspend) देखा गया।
  • जीएसटी (GST) अनुपालन में सुधार करके महत्वपूर्ण राजस्व प्राप्त किया जा सकता है।
  • 'जीरो-बेस्ड बजटिंग' और 'प्रदर्शन-आधारित बजटिंग' को अपनाने की आवश्यकता है।

तमिलनाडु में हर बजट सत्र के साथ एक ही बहस छिड़ जाती है: राज्य को अधिक धन की आवश्यकता है, केंद्र को राज्य को अधिक देना चाहिए, और करदाताओं को नए करों के लिए तैयार रहना चाहिए। हालांकि, तमिलगा vettri kazhagam (TVK) के पहले बजट के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठता है: नागरिकों से एक भी रुपया अतिरिक्त मांगने से पहले, क्या राज्य ने वह हर रुपया वसूल लिया है जो कानूनी रूप से उसका हक है?

तमिलनाडु की वित्तीय स्थिति वास्तव में कठिन है। ऋण का स्तर ऊंचा है, राजस्व खाता घाटे में है, और वेतन, पेंशन एवं कल्याणकारी योजनाओं के भुगतान के कारण सरकार के पास निर्णय लेने की गुंजाइश बहुत कम बची है। लेकिन विवाद इस बात पर है कि क्या इसका समाधान नए कर लगाने में है, या मौजूदा राजस्व संग्रह और खर्च की दक्षता बढ़ाने में है।

बजट प्रबंधन में खामियां

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के आंकड़े इस बात का पुख्ता प्रमाण देते हैं। वित्त वर्ष 2023-24 में, तमिलनाडु ने लगभग ₹4.47 लाख करोड़ का बजट बनाया था, लेकिन केवल ₹4.14 लाख करोड़ ही खर्च किए गए। इसका मतलब है कि ₹33,302.53 करोड़ का अधिशेष (underspend) रह गया। इसके अलावा, कई मामलों में पूरक प्रावधानों (supplementary provisions) की आवश्यकता भी अनावश्यक पाई गई क्योंकि मूल आवंटन का उपयोग ही नहीं हुआ था।

सवाल केवल यह नहीं है कि कितना आवंटित किया गया या खर्च किया गया, बल्कि यह है कि उस खर्च से क्या परिणाम प्राप्त हुए।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि केवल धन का आवंटन करना पर्याप्त नहीं है; वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उस धन का उपयोग कितनी कुशलता से किया गया। यदि सरकार 'जीरो-बेस्ड बजटिंग' को अपनाती है, तो प्रत्येक खर्च को हर साल नए सिरे से अपनी उपयोगिता सिद्ध करनी होगी, जिससे पुराने और अनावश्यक खर्चों पर लगाम लगेगी।

राजस्व के मोर्चे पर भी सुधार की भारी गुंजाइश है। CAG ने जीएसटी (GST) के 337 मामलों में ₹1,538.18 करोड़ की अनियमितताएं पाई हैं, जिनमें से अब तक केवल ₹8.64 करोड़ ही वसूल किए जा सके हैं। ईमानदारी से कर देने वाले नागरिकों पर बोझ बढ़ाने के बजाय, सरकार को अनुपालन अंतराल (compliance gaps) को भरने और छूटों को तर्कसंगत बनाने पर ध्यान देना चाहिए।

प्रदर्शन-आधारित दृष्टिकोण

सरकार को अब 'आउटकम-बेस्ड' या प्रदर्शन-आधारित बजटिंग की ओर बढ़ना चाहिए। उदाहरण के लिए, यह पूछना महत्वपूर्ण नहीं है कि सड़कों के लिए कितने करोड़ जारी किए गए, बल्कि यह पूछना जरूरी है कि कितने किलोमीटर सड़क बनी, उसकी लागत क्या थी और उसका मानक क्या था।

Did You Know?: 'जीरो-बेस्ड बजटिंग' एक ऐसी तकनीक है जिसमें पिछले वर्ष के बजट को आधार न मानकर, हर नए खर्च को शून्य से शुरू करके उसकी आवश्यकता सिद्ध करनी पड़ती है।

Frequently Asked Questions

1. जीरो-बेस्ड बजटिंग क्या है?
यह एक बजटिंग विधि है जिसमें हर नए वित्तीय वर्ष में प्रत्येक खर्च को शून्य से शुरू किया जाता है और उसे अपनी आवश्यकता प्रमाणित करनी होती है।

2. तमिलनाडु के लिए मुख्य वित्तीय चुनौती क्या है?
राज्य का बढ़ता कर्ज और राजस्व घाटा सबसे बड़ी चुनौतियां हैं, जिससे कल्याणकारी योजनाओं के लिए धन जुटाना कठिन हो जाता है।