तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन द्वारा अतिरिक्त सुरक्षा जमा की मांग ने सूक्ष्म और लघु उद्योगों में भारी चिंता पैदा कर दी है। उद्योग संघों ने सरकार पर विनिर्माण क्षेत्र की अनदेखी करने का आरोप लगाया है।

  • तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन ने सूक्ष्म उद्योगों को अतिरिक्त सुरक्षा जमा का नोटिस जारी किया है।
  • सुरक्षा जमा की गणना पिछले 12 महीनों के औसत बिजली खर्च के आधार पर की जा रही है।
  • उद्योग संघों ने सरकार से बिजली दरों में कमी करने की मांग की है।

कोयंबटूर: तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन द्वारा सूक्ष्म और लघु उद्योगों (MSMEs) को अतिरिक्त सुरक्षा जमा (Additional Security Deposit) का भुगतान करने के लिए नोटिस जारी किए जाने से राज्य के औद्योगिक क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। इस अचानक आए कदम ने छोटे उद्यमियों की वित्तीय स्थिति को अस्थिर कर दिया है, जिससे उनके परिचालन खर्चों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।

तमिलनाडु एशोसिएशन ऑफ कॉटेज एंड माइक्रो एंटरप्राइजेज के अध्यक्ष जे. जेम्स ने इस निर्णय की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह सूक्ष्म उद्योगों के लिए एक गहरा झटका है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार विनिर्माण उद्योगों के विकास की दिशा में कोई ठोस कदम उठाने के बजाय उन पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाल रही है।

सुरक्षा जमा की नई गणना पद्धति

कोयंबटूर शहर की एक सूक्ष्म इकाई को प्राप्त नोटिस के अनुसार, सुरक्षा जमा राशि की समीक्षा हर दो साल में की जाती है। नई नीति के तहत, गणना का तरीका इस प्रकार है:

  • मासिक बिलिंग वाले उपभोक्ता: पिछले 12 महीनों (अप्रैल 2026 तक) के औसत मासिक बिजली शुल्क का दो गुना।
  • द्वि-मासिक बिलिंग वाले उपभोक्ता: पिछले 12 महीनों के औसत मासिक बिजली शुल्क का तीन गुना।

इस गणना के आधार पर जो भी अंतर राशि निकलती है, उसे अतिरिक्त सुरक्षा जमा के रूप में तत्काल जमा करना होगा।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि सूक्ष्म उद्योग किसी भी अर्थव्यवस्था की रीढ़ होते हैं। जब बिजली जैसे बुनियादी संसाधनों की लागत और सुरक्षा जमा की मांग बढ़ती है, तो यह सीधे तौर पर उत्पादन लागत और रोजगार सृजन की क्षमता को प्रभावित करता है। यदि इन इकाइयों को वित्तीय राहत नहीं दी गई, तो विनिर्माण क्षेत्र में मंदी आ सकती है।

बिजली दरों में कमी के बजाय सुरक्षा जमा का बोझ बढ़ाना सूक्ष्म उद्योगों के अस्तित्व के लिए संकट पैदा कर सकता है।

स्थानीय ऊर्जा विभाग के अधिकारियों ने उद्योगों को राहत देते हुए कहा है कि वे इस राशि का भुगतान दो या तीन किस्तों में कर सकते हैं। हालांकि, उद्योग जगत का तर्क है कि सरकार को केवल किस्तों का विकल्प देने के बजाय ऊर्जा लागत को कम करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

Did You Know?: सूक्ष्म और लघु उद्योग (MSMEs) भारत की जीडीपी में लगभग 30% का योगदान देते हैं और करोड़ों लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: अतिरिक्त सुरक्षा जमा का नोटिस क्यों जारी किया गया है?
उत्तर: सुरक्षा जमा की दो साल में होने वाली समीक्षा के बाद, औसत बिजली खपत के आधार पर जमा राशि को अपडेट करने के लिए यह नोटिस जारी किया गया है।

प्रश्न 2: क्या उद्योग इस राशि को एक साथ दे सकते हैं?
उत्तर: विभाग के अनुसार, इकाइयां इस राशि का भुगतान दो या तीन किस्तों में करने का विकल्प चुन सकती हैं।