आरडब्ल्यूए (RWA) के अवरोधों और कम भागीदारी को देखते हुए, सांख्यिकी मंत्रालय अब उच्च आय वाले परिवारों के लिए 'डायरी-आधारित डेटा संग्रह' पद्धति पर विचार कर रहा है।
- सांख्यिकी मंत्रालय (MoSPI) गेटेड सोसायटियों में सर्वेक्षण करने में आ रही कठिनाइयों को दूर करने के लिए नया मॉडल ला रहा है।
- उच्च आय वाले परिवार अब ऑनलाइन पोर्टल या डिजिटल माध्यम से अपना खर्च स्वयं दर्ज कर सकेंगे।
- यह कदम 2027-28 के घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण (HCES) से पहले पायलट आधार पर शुरू किया जा सकता है।
भारत सरकार का सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) एक महत्वपूर्ण बदलाव की तैयारी कर रहा है। पिछले कुछ वर्षों में, गेटेड सोसायटियों और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (RWAs) के साथ सर्वेक्षण अधिकारियों को होने वाली समस्याओं के कारण, मंत्रालय अब उच्च आय वाले परिवारों के लिए 'डायरी-आधारित डेटा संग्रह' पद्धति अपनाने पर विचार कर रहा है।
वर्तमान में, सरकारी अधिकारी घर-घर जाकर सर्वेक्षण करते हैं, लेकिन कई पॉश सोसायटियों में सुरक्षा और गोपनीयता के कारणों से उन्हें प्रवेश नहीं दिया जाता है। इससे डेटा में भारी कमी आ रही है। नए प्रस्ताव के तहत, समृद्ध परिवारों को एक ऑनलाइन पोर्टल या डिजिटल माध्यम दिया जा सकता है, जहाँ वे अपने मासिक खर्चों (जैसे भोजन, सेवाओं आदि) को स्वयं दर्ज कर सकें।
क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि डेटा की सटीकता सीधे देश की आर्थिक नीतियों को प्रभावित करती है। यदि उच्च आय वाले वर्ग का डेटा गायब रहता है, तो सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और मुद्रास्फीति (Inflation) के आकलन में बड़ी चूक हो सकती है।
प्रीमियम सोसायटियों में सर्वेक्षण भागीदारी का गिरना डेटा की गुणवत्ता के लिए एक गंभीर चुनौती बन गया है।
हालिया आंकड़ों के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में गैर-प्रतिक्रिया दर (Non-response rate) बढ़कर 9.8% हो गई है, जो पहले काफी कम थी। विशेष रूप से संपन्न परिवारों के बीच यह दर और भी अधिक देखी गई है। 'डायरी पद्धति' का मुख्य उद्देश्य 'रिकॉल एरर' (Recall Error) को कम करना है, जहाँ लोग पुराने खर्चों को याद करने में गलती कर देते हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और चुनौतियाँ
घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण (HCES) भारत में जीवन स्तर और असमानता को समझने का एक प्रमुख साधन है। यह डेटा उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) को अपडेट करने में मदद करता है, जो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के लिए ब्याज दरें तय करने का आधार बनता है।
हालाँकि, विशेषज्ञों ने एक बड़ी चुनौती की ओर इशारा किया है। भारत के पहले मुख्य सांख्यिकीविद्, प्रनब सेन के अनुसार, दो अलग-अलग तरीकों (एक घर-घर जाकर और दूसरा स्वयं द्वारा दर्ज किया गया) से प्राप्त डेटा को आपस में जोड़ना (Stitching) एक जटिल कार्य होगा।
| विशेषता | पारंपरिक सर्वेक्षण | डायरी-आधारित पद्धति |
|---|---|---|
| प्रक्रिया | फील्ड अधिकारियों द्वारा घर-घर जाना | परिवारों द्वारा स्वयं डेटा दर्ज करना |
| मुख्य लाभ | कम साक्षरता वाले समूहों के लिए आसान | 'रिकॉल एरर' में कमी और गोपनीयता |
| मुख्य चुनौती | RWA और सुरक्षा संबंधी बाधाएं | डेटा एकीकरण (Data Integration) की समस्या |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. 'डायरी-आधारित डेटा संग्रह' क्या है?
यह एक ऐसी विधि है जिसमें परिवार अपने दैनिक या मासिक खर्चों को स्वयं एक डायरी या डिजिटल पोर्टल पर नोट करते हैं, बजाय इसके कि कोई अधिकारी उनसे सवाल पूछे।
2. क्या यह पद्धति केवल अमीरों के लिए होगी?
जी हाँ, सरकार इसे पायलट आधार पर केवल उच्च आय वाले गेटेड समुदायों के लिए उपयोग करने पर विचार कर रही है।