मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) में यस बैंक के एक 600 करोड़ रुपये के ऋण हस्तांतरण को लेकर शिकायत दर्ज की गई है। इसमें फंड के प्रवाह और मूल्यांकन में अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

  • PPIPL के 600 करोड़ रुपये के ऋण को सुरक्षा ARC को हस्तांतरित करने पर सवाल उठाए गए हैं।
  • ऋण के वर्गीकरण, मूल्यांकन और फंडिंग संरचना में हेरफेर के आरोप हैं।
  • फंड के संदिग्ध प्रवाह और कैश लेनदेन की जांच की मांग की गई है।

यस बैंक (Yes Bank) एक बार फिर विवादों के घेरे में है। मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) में एक नई शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसमें बैंक द्वारा प्रिविलेज पावर एंड इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड (PPIPL) को दिए गए 600 करोड़ रुपये के ऋण के हस्तांतरण (Assignment) पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। यह ऋण बाद में सुरक्षा एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी (Suraksha ARC) को सौंपा गया था।

शिकायत PPIPL के निलंबित निदेशक राकेश कुमार वाधवान द्वारा दर्ज कराई गई है। वाधवान का आरोप है कि जब इस ऋण को सुरक्षा ARC को सौंपा गया, तब तक PPIPL के खाते को 'गैर-निष्पादित संपत्ति' (NPA) के रूप में वर्गीकृत नहीं किया गया था। इसके अलावा, उन्होंने इस बात पर भी सवाल उठाया कि जब ऋण संपत्ति और विकास अधिकारों के माध्यम से 2,000 करोड़ रुपये से अधिक सुरक्षित था, तो केवल 213.6 करोड़ रुपये के बकाया के लिए इसे क्यों हस्तांतरित किया गया?

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि बैंकिंग क्षेत्र में ऋणों का इस तरह का हस्तांतरण अत्यधिक नियामक जांच के अधीन होता है। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं कि ऋण का मूल्यांकन गलत किया गया या फंड का प्रवाह संदिग्ध था, तो यह बैंकिंग पारदर्शिता और एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों (ARCs) की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर सकता है।

ऋण हस्तांतरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी बैंकिंग प्रणाली के विश्वास को गंभीर रूप से कमजोर कर सकती है।

शिकायत में फंडिंग संरचना को लेकर भी चौंकाने वाले दावे किए गए हैं। बताया गया है कि हस्तांतरण राशि लगभग 155.3 करोड़ रुपये थी, जिसमें से 23.3 करोड़ रुपये नकद दिए गए थे, जबकि शेष राशि सुरक्षा रसीदों (SRs) के माध्यम से चुकता की गई थी। इसके अतिरिक्त, फॉर्च्यून इंटीग्रेटेड एसेट्स सर्विस लिमिटेड जैसी संस्थाओं के माध्यम से धन के संदिग्ध आवागमन की भी जांच करने की मांग की गई है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में ऋणों के प्रबंधन और एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों की भूमिका को लेकर कड़े नियम लागू किए गए हैं। यस बैंक खुद पहले भी वित्तीय संकट और पुनर्गठन के दौर से गुजर चुका है, जिससे इस नई जांच का महत्व और बढ़ जाता है।

Did You Know?: एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियां (ARCs) बैंकों से खराब ऋण खरीदती हैं ताकि बैंक अपने बैलेंस शीट को साफ रख सकें।

Frequently Asked Questions

1. यह शिकायत किसके द्वारा दर्ज की गई है?
यह शिकायत PPIPL के निलंबित निदेशक राकेश कुमार वाधवान द्वारा दर्ज की गई है।

2. मुख्य आरोप क्या हैं?
मुख्य आरोप ऋण के गलत मूल्यांकन, फंड के संदिग्ध प्रवाह और ऋण वर्गीकरण में अनियमितताओं से संबंधित हैं।