कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) के प्रमुख ललित कुमार गुप्ता ने कहा है कि भारत को अंतरराष्ट्रीय कपास बाजार में कीमतों को प्रभावित करने वाला देश बनना चाहिए। इसके लिए उत्पादकता, गुणवत्ता और डेटा पारदर्शिता पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।

  • भारत को वैश्विक कपास कीमतों को प्रभावित करने वाला देश बनने का लक्ष्य रखना चाहिए।
  • उत्पादकता बढ़ाने के लिए 'मिशन ऑन कॉटन' के तहत पांच लाख हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया है।
  • गुणवत्ता और संदूषण (contamination) मुक्त फाइबर पर उद्योग को एकजुट होकर काम करना होगा।
  • डेटा एकीकरण और पारदर्शी मूल्य निर्धारण प्रणाली की सख्त जरूरत है।

कोयंबटूर में आयोजित द्विवार्षिक कपास सम्मेलन में कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक ललित कुमार गुप्ता ने एक महत्वपूर्ण आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत के पास कपास उत्पादन में दुनिया के शीर्ष पांच देशों में शामिल होने का पैमाना है, लेकिन अब समय आ गया है कि हम केवल उत्पादक न रहकर वैश्विक बाजार में कीमतों के निर्धारक (price influencer) बनें।

गुप्ता ने जोर देकर कहा कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने के लिए हमें पांच स्तंभों पर ध्यान केंद्रित करना होगा: उत्पादकता, गुणवत्ता, पारदर्शिता, विभेदीकरण और मूल्य खोज (price discovery)। उन्होंने बताया कि वर्तमान में भारत का उत्पादन घरेलू खपत की जरूरतों को पूरी तरह पूरा करने में सक्षम नहीं है, जिससे सुधार की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यदि भारत अपनी प्रति एकड़ उपज में सुधार करने में सफल रहता है, तो यह न केवल घरेलू कपड़ा उद्योग को मजबूती देगा, बल्कि ब्राजील, अमेरिका और चीन जैसे दिग्गजों को कड़ी टक्कर देकर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर नियंत्रण भी हासिल कर सकता है।

उत्पादकता बढ़ाने के लिए 'मिशन ऑन कॉटन' के तहत पहले वर्ष में लगभग पांच लाख हेक्टेयर भूमि को लक्षित किया गया है। उच्च घनत्व वाली रोपण पद्धति (High Density Planting) के परीक्षणों में प्रति एकड़ 15 क्विंटल बीज कपास की उपज प्राप्त की गई है, जो एक उत्साहजनक संकेत है।

वैश्विक बाजार को निरंतर और संदूषण मुक्त फाइबर की आवश्यकता है, जिसके लिए पूरी उद्योग श्रृंखला को मिलकर काम करना होगा।

तकनीकी सुधारों की आवश्यकता पर चर्चा करते हुए, पूर्व इंटरनेशनल टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरर्स फेडरेशन अध्यक्ष के.वी. श्रीनिवासन ने कहा कि 1990 के दशक में घरेलू उपज बढ़ने से भारतीय कपड़ा उद्योग को काफी बढ़ावा मिला था। उन्होंने चेतावनी दी कि ब्राजील, अमेरिका और चीन के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए भारत को अब एक बड़े 'टेक्नोलॉजी बूस्ट' की जरूरत है।

सांख्यिकीय रूप से, दुनिया की कुल कपास का 74% हिस्सा केवल चार देशों से आता है। भारत के पास दुनिया के कपास उत्पादन क्षेत्र का 38% हिस्सा है। यदि भारत अपनी उपज (yield) में सुधार करता है, तो वह निर्विवाद रूप से वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ सकता है।

Did You Know?: भारत के पास दुनिया के कुल कपास उत्पादन क्षेत्र का लगभग 38% हिस्सा है, जो इसे एक वैश्विक महाशक्ति बनाता है।

Frequently Asked Questions

1. CCI का इस सीजन में कपास खरीद का क्या आंकड़ा है?
CCI ने इस कपास सीजन में बाजार से 105 लाख गांठ (bales) कपास खरीदी है और अब तक 94 लाख गांठ बेच दी है।

2. कपास की गुणवत्ता में सुधार के लिए क्या चुनौती है?
सबसे बड़ी चुनौती फाइबर में संदूषण (contamination) को रोकना और वैश्विक मानकों के अनुरूप निरंतर गुणवत्ता बनाए रखना है।