सस्टेनेबिलिटी एंड एनर्जी प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन (SEPA) ने ऊर्जा क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एक नया छात्र सेल लॉन्च किया है। संस्था का लक्ष्य अगले एक साल में 10,000 छात्रों को जोड़ना और अनुसंधान के माध्यम से हरित ऊर्जा भविष्य का निर्माण करना है।
- SEPA ने ऊर्जा अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए एक समर्पित छात्र सेल लॉन्च किया है।
- संस्था का लक्ष्य एक वर्ष के भीतर 10,000 छात्रों को नामांकित करना है।
- अगले पांच वर्षों में विभिन्न पहलों के लिए ₹1,000 करोड़ जुटाने की योजना है।
- भारत को नेट जीरो लक्ष्य प्राप्त करने के लिए 5,000 GW सौर ऊर्जा की आवश्यकता है।
कोयंबटूर में आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम के दौरान, सस्टेनेबिलिटी एंड एनर्जी प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन (SEPA) ने अपने नए छात्र सेल की घोषणा की। इस पहल का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा क्षेत्र में आने वाली अगली पीढ़ी के पेशेवरों को तैयार करना और उन्हें अत्याधुनिक अनुसंधान गतिविधियों के साथ जोड़ना है। एसोसिएशन के अध्यक्ष, रागुरम अर्जुनन, ने बताया कि संस्था का लक्ष्य एक वर्ष के भीतर 10,000 छात्रों को इस अभियान से जोड़ना है।
SEPA केवल एक शैक्षणिक पहल तक सीमित नहीं है; यह एक विशाल आर्थिक और शोध ढांचे पर काम कर रहा है। संस्था ने बताया कि वह अगले पांच वर्षों में विभिन्न महत्वपूर्ण पहलों के लिए ₹1,000 करोड़ का कोष जुटाने की योजना बना रही है। वर्तमान में, एसोसिएशन ने उद्योगों और संस्थानों के साथ मिलकर कई कंसोर्टियम बनाए हैं और ₹83 करोड़ के शोध प्रोजेक्ट्स पर काम करने की तैयारी कर ली है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा और नेट-जीरो लक्ष्यों के बीच सीधा संबंध है। जैसे-जैसे देश विकसित हो रहा है, बिजली की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। पारंपरिक स्रोतों पर निर्भरता कम करने और नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाने के लिए युवाओं का इस क्षेत्र में कौशल विकास अत्यंत आवश्यक है। छात्र सेल के माध्यम से, SEPA सीधे उद्योग और शिक्षा के बीच की खाई को पाट रहा है।
भारत को अपने नेट जीरो लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए देश में 5,000 GW से अधिक स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता की आवश्यकता होगी।
कार्यक्रम के दौरान, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोलर एनर्जी के महानिदेशक मोहम्मद रिहान ने 'सस्टेनेबल भारत' विषय पर चर्चा करते हुए कहा कि विश्वसनीय बिजली आपूर्ति विकास की रीढ़ है। उन्होंने जोर देकर रखा कि बिजली की आपूर्ति में कोई समझौता नहीं किया जा सकता, लेकिन इसे पर्यावरण के अनुकूल बनाना अनिवार्य है। उन्होंने सौर ऊर्जा की मॉड्यूलर प्रकृति की सराहना की, जो गीगावाट-स्केल के संयंत्रों के लिए भी उपयुक्त है।
वर्तमान में, भारत के पास गैर-जीवाश्म ईंधन बिजली उत्पादन क्षमता 300 GW से अधिक है। हालांकि, भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए सौर ऊर्जा और अन्य हरित स्रोतों में निवेश को और अधिक गति देने की आवश्यकता है। डेटा तक पहुंच और डिजिटल समावेशन सुनिश्चित करने के लिए भी बिजली की निर्बाध आपूर्ति एक बुनियादी आवश्यकता बनी हुई है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत ने पेरिस समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा की ओर एक बड़ा बदलाव देखा है। पिछले दशक में, सौर ऊर्जा की लागत में भारी गिरावट आई है, जिससे भारत दुनिया के सबसे प्रतिस्पर्धी सौर ऊर्जा बाजारों में से एक बन गया है। SEPA जैसी संस्थाओं का यह कदम इस संक्रमण को और अधिक सुव्यवस्थित और शोध-आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: SEPA छात्र सेल का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका उद्देश्य छात्रों को ऊर्जा अनुसंधान और उद्योग के व्यावहारिक अनुभवों से जोड़ना है।
प्रश्न 2: भारत को नेट जीरो लक्ष्य के लिए कितनी सौर ऊर्जा चाहिए?
उत्तर: भारत को अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए 5,000 GW से अधिक स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता की आवश्यकता होगी।