IRFC से कर्ज मिलने में बाधा आने के बाद, तेलंगाना सरकार हैदराबाद मेट्रो के पहले चरण को L&T से खरीदने के लिए गुजरात के GIFT City का रुख कर सकती है।

  • तेलंगाना सरकार हैदराबाद मेट्रो फेज-I के अधिग्रहण के लिए ₹13,500 करोड़ के फंड की तलाश में है।
  • IRFC द्वारा कर्ज देने से मना करने के बाद अब गुजरात के GIFT City को विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
  • SBI कैपिटल मार्केट्स को वैकल्पिक फंडिंग भागीदारों की पहचान करने का काम सौंपा गया है।
  • लक्ष्य एक संयुक्त उद्यम (JV) बनाना है जिससे मेट्रो विस्तार में केंद्र की 50% हिस्सेदारी सुनिश्चित हो सके।

हैदराबाद में सार्वजनिक परिवहन के भविष्य को लेकर एक बड़ी वित्तीय हलचल देखने को मिल रही है। तेलंगाना सरकार, जो L&T से हैदराबाद मेट्रो रेल (HMR) के 69.2 किलोमीटर लंबे फेज-I का अधिग्रहण करने की कोशिश कर रही है, अब अपने लिए वैकल्पिक धन जुटाने के नए रास्ते तलाश रही है। भारतीय रेलवे वित्त निगम (IRFC) के साथ पिछले प्रयासों में विफलता के बाद, राज्य सरकार अब गुजरात के GIFT City की ओर देख रही है।

मामले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि SBI कैपिटल मार्केट्स (SBI Caps) को तेजी से नए फंडिंग पार्टनर खोजने का निर्देश दिया गया है। गौरतलब है कि मई में IRFC से प्रस्तावित ₹13,527 करोड़ का ऋण अंतिम समय में रुक गया था। रेलवे मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद यह स्पष्ट हुआ कि IRFC का कार्यक्षेत्र केवल नई परियोजनाओं के वित्तपोषण तक सीमित है, न कि मौजूदा संपत्तियों के पुनर्वित्त (refinancing) तक।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह वित्तीय मोड़ हैदराबाद के शहरी विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि तेलंगाना सरकार GIFT City के माध्यम से विदेशी मुद्रा ऋण प्राप्त करने में सफल होती है, तो यह मौजूदा परियोजनाओं के पुनर्वित्त के लिए एक नया मॉडल पेश कर सकता है। इससे न केवल मेट्रो के अधिग्रहण का रास्ता साफ होगा, बल्कि भविष्य के विस्तार के लिए भी पूंजी की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।

GIFT City का उपयोग मौजूदा बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के पुनर्वित्त के लिए एक रणनीतिक कदम हो सकता है, जो राज्य के वित्तीय बोझ को कम करेगा।

मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी और केंद्रीय मंत्रियों के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि HMR फेज-I का पुनर्मूल्यांकन किया जाए। इसका उद्देश्य एक एकीकृत मेट्रो इकाई बनाना है, जिसमें मौजूदा नेटवर्क और प्रस्तावित ₹38,595 करोड़ की लागत वाले 122.9 किमी फेज-II प्रोजेक्ट दोनों शामिल हों। इससे केंद्र सरकार को 50% इक्विटी भागीदारी करने का मार्ग प्रशस्त होगा।

हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया में कुछ कानूनी और प्रशासनिक चुनौतियां भी हैं। अधिकारियों का मानना है कि जब तक केंद्र और राज्य के बीच संयुक्त उद्यम (JV) का गठन नहीं हो जाता और आवश्यक मंजूरी नहीं मिल जाती, तब तक मेट्रो अधिनियम के तहत नई ट्रेन सेवाओं या नए मार्गों के संचालन के लिए वैधानिक एजेंसियां अनुमति नहीं देंगी।

Did You Know?: GIFT City भारत का पहला अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र है, जो वैश्विक कंपनियों को भारत में ही विदेशी मुद्रा में लेनदेन करने की सुविधा देता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: तेलंगाना सरकार हैदराबाद मेट्रो को क्यों खरीदना चाहती है?
उत्तर: सरकार का लक्ष्य एक एकीकृत मेट्रो प्रणाली बनाना है जिसमें केंद्र की 50% हिस्सेदारी हो, ताकि भविष्य के विस्तार के लिए अधिक धन जुटाया जा सके।

प्रश्न 2: IRFC ने ऋण देने से क्यों मना किया?
उत्तर: रेलवे मंत्रालय के अनुसार, IRFC का जनादेश केवल नई परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए है, मौजूदा संपत्तियों के पुनर्वित्त के लिए नहीं।