भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने वाले SHANTI अधिनियम के ड्राफ्ट नियमों पर अमेरिकी परमाणु उद्योग विस्तृत सुझाव देने की तैयारी कर रहा है। यह कदम भारत के 2047 तक 100 GW परमाणु ऊर्जा लक्ष्य की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

  • SHANTI अधिनियम भारत में नागरिक परमाणु क्षेत्र को निजी कंपनियों और संयुक्त उद्यमों के लिए खोलता है।
  • अमेरिकी परमाणु उद्योग 4 सितंबर की समय सीमा से पहले भारत सरकार को विस्तृत सुझाव भेजेगा।
  • भारत का लक्ष्य 2047 तक 100 GW परमाणु ऊर्जा क्षमता प्राप्त करना है।
  • निजी कंपनियां अब परमाणु संयंत्रों के निर्माण, संचालन और अनुसंधान में भाग ले सकेंगी।

भारत के परमाणु ऊर्जा परिदृश्य में एक ऐतिहासिक बदलाव की आहट सुनाई दे रही है। SHANTI (Sustainable Harnessing and Advancement of Nuclear Energy for Transforming India) अधिनियम के कार्यान्वयन के लिए तैयार किए गए मसौदा नियमों पर प्रतिक्रिया देने के लिए अमेरिकी परमाणु उद्योग ने कमर कस ली है। अमेरिकी-भारत रणनीतिक साझेदारी मंच (USISPF) इस प्रक्रिया का नेतृत्व कर रहा है, जो भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) को व्यापक उद्योग सुझाव प्रस्तुत करने की योजना बना रहा है।

हाल ही में, भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग ने SHANTI अधिनियम के तहत ड्राफ्ट नियमों और विनियमों को जारी किया है, जिस पर 4 सितंबर तक टिप्पणियां मांगी गई हैं। इस अवसर का लाभ उठाते हुए, USISPF ने अमेरिकी परमाणु उद्योग के प्रतिनिधियों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ गहन चर्चा की है। इस चर्चा में कानूनी विशेषज्ञों और 'न्यूक्लियर एनर्जी इंस्टीट्यूट' के प्रतिनिधियों ने लाइसेंसिंग, देयता (liability) और परियोजना संरचना जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार-विमर्श किया।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि SHANTI अधिनियम केवल एक विधायी परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति में एक मौलिक बदलाव है। अब तक, भारत का परमाणु क्षेत्र मुख्य रूप से सरकारी नियंत्रण में रहा है, लेकिन इस नए कानून के माध्यम से निजी निवेश और वैश्विक तकनीकी विशेषज्ञता के द्वार खुल रहे हैं। यह कदम भारत को वैश्विक परमाणु आपूर्ति श्रृंखला में एक प्रमुख खिलाड़ी बनाने की क्षमता रखता है।

SHANTI अधिनियम का कार्यान्वयन भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है, जो निजी पूंजी को परमाणु नवाचार के साथ जोड़ता है।

SHANTI अधिनियम के तहत, निजी कंपनियां न केवल परमाणु संयंत्रों का निर्माण और संचालन कर सकेंगी, बल्कि वे परमाणु ईंधन के निर्माण और चिकित्सा एवं कृषि जैसे क्षेत्रों में आयनकारी विकिरण (ionizing radiation) के उपयोग में भी शामिल हो सकेंगी। यह भारत के महत्वाकांक्षी लक्ष्य—2047 तक 100 GW परमाणु ऊर्जा उत्पादन—को प्राप्त करने के लिए आवश्यक है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत का परमाणु कार्यक्रम दशकों से सरकारी संस्थाओं, विशेष रूप से परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) के अधीन रहा है। हालांकि, बढ़ती ऊर्जा मांगों और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को देखते हुए, सरकार ने धीरे-धीरे निजी क्षेत्र की भागीदारी की ओर रुख किया है। SHANTI अधिनियम इसी विकासवादी प्रक्रिया का सबसे उन्नत चरण है, जो सुरक्षा मानकों को बनाए रखते हुए व्यावसायिक दक्षता लाने का प्रयास करता है।

भारत ने 2033 तक कम से कम पांच स्वदेशी 'स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स' (SMR) स्थापित करने का भी लक्ष्य रखा है। ये उन्नत परमाणु विखंडन संयंत्र हैं जो प्रत्येक 300 मेगावाट तक बिजली पैदा कर सकते हैं, जो ग्रिड स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण हैं।

Did You Know?: भारत का लक्ष्य 2047 तक अपनी परमाणु क्षमता को 100 गीगावाट तक ले जाना है, जो वर्तमान क्षमता से कई गुना अधिक है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: SHANTI अधिनियम क्या है?
उत्तर: यह एक कानून है जो भारत के नागरिक परमाणु क्षेत्र में निजी कंपनियों को संयंत्र बनाने, संचालित करने और अनुसंधान करने की अनुमति देता है।

प्रश्न 2: अमेरिकी कंपनियां इसमें क्यों रुचि ले रही हैं?
उत्तर: भारत का विशाल ऊर्जा बाजार और निजीकरण की दिशा में बढ़ते कदम अमेरिकी परमाणु तकनीक और कंपनियों के लिए बड़े अवसर पैदा करते हैं।