तमिलनाडु सरकार ने बुनकर सहकारी समितियों में धोती उत्पादन शुरू कर दिया है। मंत्री एम. विजय बालाजी ने बताया कि सरकार ₹300 करोड़ के आवंटन के साथ सूत की आपूर्ति सुनिश्चित कर रही है और वेतन वृद्धि पर चर्चा जल्द होगी।
- तमिलनाडु में बुनकर सहकारी समितियों में धोती उत्पादन का कार्य शुरू हो गया है।
- सरकार ने इस पहल के लिए ₹300 करोड़ का बजट आवंटित किया है।
- बुनकरों की उच्च वेतन की मांग पर सरकार जल्द ही बातचीत करेगी।
तमिलनाडु के हथकरघा और वस्त्र मंत्री एम. विजय बालाजी ने शनिवार को घोषणा की कि राज्य में बुनकर सहकारी समितियों के माध्यम से हाथ से बुनी जाने वाली धोती का उत्पादन फिर से शुरू हो गया है। यह कदम सूत की खरीद और वितरण के सफल समापन के बाद उठाया गया है, जिससे स्थानीय बुनकरों के बीच नई उम्मीद जगी है।
मंत्री ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि धोती की बुनाई के लिए आवश्यक 60-काउंट सूत का 1 टन हिस्सा एक निजी कंपनी से खरीदा गया है और इसे तुरंत सहकारी समितियों को वितरित कर दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस महत्वपूर्ण पहल को सुचारू रूप से चलाने के लिए राज्य सरकार ने ₹300 करोड़ का विशेष कोष आवंटित किया है।
राजनीतिक विवाद और स्पष्टीकरण
इस प्रक्रिया के दौरान राजनीतिक खींचतान भी देखने को मिली। मंत्री बालाजी ने पूर्व एआईएडीएमके मंत्री आर.बी. उदयकुमार द्वारा सरकार की आलोचना पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि उदयकुमार बिना जमीनी सच्चाई जाने सरकार की आलोचना कर रहे थे, जबकि वास्तव में सूत की खरीद पूरी हो चुकी थी और उत्पादन प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी थी।
वेतन वृद्धि और बुनकर कल्याण
बुनकरों द्वारा धोती और साड़ियों की बुनाई के लिए उच्च मजदूरी की मांग को लेकर मंत्री ने एक सकारात्मक रुख अपनाया। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार बुनकरों के हितों की रक्षा के लिए उनके साथ औपचारिक चर्चा आयोजित करेगी और किसी भी निर्णय पर पहुँचने से पहले उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
इरोड विकास परियोजनाएं और नागरिक सुविधाएं
इरोड कॉर्पोरेशन सेंट्रल बस स्टैंड का निरीक्षण करते हुए, मंत्री ने बताया कि सीएसआर (CSR) फंड के माध्यम से सात स्तनपान कक्ष (breastfeeding rooms) स्थापित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, यात्रियों की सुविधा के लिए आरओ पीने के पानी की व्यवस्था भी की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वीओसी पार्क में चल रहे सब्जी बाजार को पुराने स्थान पर वापस स्थानांतरित किया जाएगा ताकि पार्क का उपयोग सार्वजनिक आयोजनों और मनोरंजन के लिए किया जा सके।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि तमिलनाडु के हथकरघा क्षेत्र में सरकारी हस्तक्षेप न केवल पारंपरिक कला को जीवित रखने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने वाला एक बड़ा कदम है। सूत की निर्बाध आपूर्ति और वेतन पर चर्चा बुनकरों की आर्थिक स्थिरता के लिए निर्णायक साबित होगी।
सरकार का ₹300 करोड़ का निवेश और बुनकरों के साथ संवाद करने की इच्छा, पारंपरिक वस्त्र उद्योग के पुनरुद्धार की दिशा में एक रणनीतिक कदम है।
Frequently Asked Questions
1. सरकार ने बुनकरों के लिए कितना बजट आवंटित किया है?
सरकार ने इस पहल के लिए ₹300 करोड़ आवंटित किए हैं।
2. क्या बुनकरों की वेतन वृद्धि की मांग पर विचार किया जाएगा?
हाँ, मंत्री ने कहा है कि सरकार निर्णय लेने से पहले बुनकरों के साथ चर्चा करेगी।