बिहार की उद्योग मंत्री श्रेयासी सिंह ने दावा किया है कि राज्य अब निवेश के लिए 'बदलैंड' नहीं रह गया है। सरकार का लक्ष्य नवंबर तक 5 लाख करोड़ रुपये का निवेश हासिल करना है, जिसमें इथेनॉल और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्र प्रमुख हैं।
- बिहार सरकार का लक्ष्य नवंबर 2025 तक 5 लाख करोड़ रुपये का निवेश प्राप्त करना है।
- सितंबर 2025 तक 1.11 लाख करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश प्राप्त हो चुके हैं।
- जामई में एशिया का सबसे बड़ा इथेनॉल प्लांट स्थापित किया जा रहा है।
- 'प्लग-एंड-प्ले' मॉडल के तहत उद्योगों को तुरंत कार्यस्थल उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
बिहार की उद्योग मंत्री श्रेयासी सिंह ने राज्य की बदलती आर्थिक छवि को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिहार अब वह 'बदलैंड' (अराजक क्षेत्र) नहीं रहा जिसका ठप्पा 1990 के दशक में लगा था। वर्तमान सरकार के नेतृत्व में, बिहार तेजी से एक औद्योगिक केंद्र बनने की ओर अग्रसर है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में, राज्य ने इस नवंबर तक 5 लाख करोड़ रुपये के निवेश का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।
मंत्री सिंह के अनुसार, निवेश की गति पिछले कुछ वर्षों में अभूतपूर्व रही है। उन्होंने तुलना करते हुए बताया कि जहाँ 2016 से 2022 के बीच राज्य में मात्र 2,500 करोड़ रुपये का निवेश हुआ था, वहीं सितंबर 2025 तक प्रस्तावित निवेश का आंकड़ा 1.11 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच गया है। इसमें नवीकरणीय ऊर्जा, इथेनॉल और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों का बड़ा योगदान है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि बिहार का यह बदलाव केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य की शासन व्यवस्था में आए बुनियादी बदलाव का प्रतीक है। 'नियंत्रण से सुविधा' (Control to Facilitation) की ओर बढ़ते कदम और नौकरशाही की लालफीताशाही को खत्म करने की नीति निवेशकों के बीच विश्वास पैदा कर रही है।
बिहार अब अपनी पुरानी छवि को पीछे छोड़ते हुए खाद्य प्रसंस्करण और इथेनॉल जैसे क्षेत्रों में वैश्विक खिलाड़ी बनने की तैयारी कर रहा है।
निवेश को बढ़ावा देने के लिए सरकार 'प्लग-एंड-प्ले' मॉडल अपना रही है। इसके तहत निवेशकों को तैयार शेड किराए पर दिए जा रहे हैं, जिससे उन्हें भूमि और बुनियादी ढांचे की चिंता नहीं करनी पड़ती। मुजफ्फरपुर, पटना और भागलपुर जैसे जिलों में पहले ही 31 लाख वर्ग फुट जगह लीज पर दी जा चुकी है। इसके अलावा, सिंगल-विंडो क्लीयरेंस प्रणाली के तहत 30 दिनों के भीतर मंजूरी सुनिश्चित की जा रही है।
एक विशेष उपलब्धि के रूप में, कभी नक्सल प्रभावित रहा जामई अब औद्योगिक क्रांति का केंद्र बन रहा है। यहाँ 'अंकुर बायोकेम' द्वारा एशिया का सबसे बड़ा इथेनॉल प्लांट स्थापित किया जा रहा है, जो प्रतिदिन 7.5 लाख लीटर इथेनॉल का उत्पादन करेगा। यह न केवल रोजगार पैदा करेगा बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा भी देगा।
| क्षेत्र (Sector) | प्रस्तावित निवेश (Proposed Investment) |
|---|---|
| नवीकरणीय ऊर्जा | ₹38,644 करोड़ |
| इथेनॉल | ₹30,748 करोड़ |
| खाद्य प्रसंस्करण | ₹20,153 करोड़ |
Frequently Asked Questions
1. बिहार में निवेश के मुख्य क्षेत्र कौन से हैं?
मुख्य रूप से इथेनॉल, नवीकरणीय ऊर्जा, खाद्य प्रसंस्करण, कपड़ा और चमड़ा उद्योग प्रमुख हैं।
2. सरकार निवेश के लिए जमीन कैसे उपलब्ध करा रही है?
सरकार केंद्रीय करों के हिस्से और 25,000 करोड़ रुपये के ऋण का उपयोग करके किसानों से जमीन खरीद रही है और औद्योगिक क्षेत्र विकसित कर रही है।