पेट्रोलियम मंत्रालय ने देश में रसोई गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 21 रिफाइनरियों के लिए नए उत्पादन लक्ष्य निर्धारित किए हैं, जिसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज को सबसे बड़ी हिस्सेदारी मिली है।
- सरकार ने 21 रिफाइनरियों और अपस्ट्रीम कंपनियों के लिए अधिकतम एलपीजी उत्पादन सीमा तय की है।
- कुल उत्पादन क्षमता को 63,810 टन प्रतिदिन तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
- रिलायंस इंडस्ट्रीज को प्रतिदिन 18,000 टन एलपीजी उत्पादन का सबसे बड़ा कोटा दिया गया है।
- यह कदम पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण आयात पर निर्भरता कम करने के लिए उठाया गया है।
भारत सरकार ने देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, पहली बार सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की रिफाइनरियों के लिए एलपीजी (LPG) उत्पादन के अधिकतम लक्ष्य निर्धारित किए हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, 21 रिफाइनरियों और अपस्ट्रीम कंपनियों के लिए कुल संयुक्त उत्पादन क्षमता को 63,810 टन प्रतिदिन तक सेट किया गया है।
यह निर्णय पश्चिम एशिया (West Asia) में चल रहे संघर्षों के कारण उत्पन्न हुई आपूर्ति संबंधी चुनौतियों से सबक लेते हुए लिया गया है। हाल के संकटों ने दिखाया कि कैसे आयातित रसोई गैस की आपूर्ति में व्यवधान भारत की घरेलू ऊर्जा स्थिरता को खतरे में डाल सकता है। वर्तमान में, भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिससे वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता के समय जोखिम बढ़ जाता है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह कदम भारत की 'आयात निर्भरता' को कम करने की एक रणनीतिक कोशिश है। वित्त वर्ष 2025-26 में, भारत ने 33.2 मिलियन टन एलपीजी का उपभोग किया, जिसमें से लगभग 64% हिस्सा आयात किया गया था। हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर संकट आने की स्थिति में, यह नया उत्पादन ढांचा देश के लिए एक सुरक्षा कवच (Buffer) के रूप में कार्य करेगा।
सरकार का यह कदम भविष्य के वैश्विक ऊर्जा संकटों के खिलाफ भारत की आत्मनिर्भरता को सुनिश्चित करने वाला एक मास्टरस्ट्रोक है।
इस नए ढांचे के तहत, निजी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) को सबसे बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। जामनगर स्थित रिलायंस की रिफाइनरी को प्रतिदिन 18,000 टन एलपीजी उत्पादन करने का निर्देश दिया गया है। वहीं, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के स्वामित्व वाली 18 रिफाइनरियों को कुल 31,470 टन प्रतिदिन उत्पादन का लक्ष्य दिया गया है।
इसके अतिरिक्त, रूस समर्थित नयारा एनर्जी (Nayara Energy) की Vadinar रिफाइनरी को 4,480 टन प्रतिदिन और ONGC एवं GAIL जैसी अपस्ट्रीम कंपनियों को 6,460 टन प्रतिदिन का लक्ष्य दिया गया है। सरकार ने रिफाइनरियों को तकनीकी रूप से सक्षम उन्नयन (Upgrades) करने और नैफ्था को एलपीजी में बदलने जैसे उपाय करने का भी निर्देश दिया है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत की एलपीजी खपत में पिछले दशक में भारी वृद्धि हुई है। पहले सरकार केवल आपातकालीन स्थिति में उत्पादन बढ़ाने का आदेश देती थी, लेकिन अब एक 'स्टैंडिंग फ्रेमवर्क' तैयार किया गया है। इससे पहले, पश्चिम एशिया संकट के दौरान आपूर्ति बाधित होने पर सरकार को औद्योगिक उपयोग के लिए एलपीजी की बिक्री रोकनी पड़ी थी ताकि घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जा सके।
Frequently Asked Questions
1. सरकार ने यह नया नियम क्यों लागू किया है?
ताकि भविष्य में किसी भी वैश्विक संघर्ष या आपूर्ति व्यवधान के दौरान घरेलू रसोई गैस की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।
2. रिलायंस को सबसे बड़ा कोटा क्यों मिला है?
रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी की विशाल क्षमता और तकनीकी दक्षता इसे उच्च उत्पादन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए सबसे उपयुक्त बनाती है।
| संस्था/रिफाइनरी | दैनिक उत्पादन लक्ष्य (टन) |
|---|---|
| रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) | 18,000 |
| सार्वजनिक क्षेत्र की 18 रिफाइनरियां | 31,470 |
| नयारा एनर्जी (Nayara) | 4,480 |
| ONGC/GAIL (अपस्ट्रीम) | 6,460 |