ओणम उत्सव से ठीक पहले केरल के बाजारों में कच्चे केले और चीनी की कीमतों में भारी उछाल आया है। जहां एक ओर सब्जियों के दाम बढ़ रहे हैं, वहीं चावल और नारियल तेल की कीमतों में राहत देखी गई है।

  • कच्चे केले की कीमत ₹65 प्रति किलो तक पहुंच गई है।
  • चीनी के रिटेल दाम ₹75-₹77 प्रति किलो के बीच हैं।
  • प्याज, बीन्स और गाजर जैसी आवश्यक सब्जियों के दाम भी बढ़े हैं।
  • चावल और नारियल तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है।

केरल में थिरुवोनम उत्सव के केवल दो दिन शेष हैं, लेकिन बाजारों में बढ़ती कीमतें आम उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय बन गई हैं। ओणम की तैयारियों के बीच, कच्चे केले और चीनी की कीमतों में आए उछाल ने त्योहारी बजट को बिगाड़ दिया है। विशेष रूप से कच्चे केले की मांग चिप्स बनाने के लिए बहुत अधिक है, जिसकी वजह से इसकी कीमतें ₹65 प्रति किलो तक पहुंच गई हैं।

सब्जियों के बाजार में मंदी और मांग का दबाव

व्यापारियों का कहना है कि तमिलनाडु के मेट्टुपलायम जैसे प्रमुख उत्पादन केंद्रों से आपूर्ति कम होने के कारण कच्चे केले की कीमतों में यह वृद्धि हुई है। कम वर्षा ने फसल को प्रभावित किया है। इसके अलावा, प्याज की कीमतें भी ₹31 से बढ़कर ₹48 प्रति किलो हो गई हैं। बीन्स की कीमत में ₹20 की वृद्धि देखी गई है, जो अब ₹80 प्रति किलो पर पहुंच गई है।

क्यों बढ़ रहे हैं दाम?

बोज़ोकमीडिया (BozokMedia) विश्लेषण से पता चलता है कि घरेलू मांग बढ़ने के साथ-साथ विदेशों में रहने वाले मलयाली समुदाय के लिए निर्यात में वृद्धि भी कीमतों को ऊपर धकेल रही है। प्याज और अन्य सब्जियों की बढ़ती मांग और आपूर्ति में कमी का यह सीधा परिणाम है।

त्योहारों के दौरान निर्यात की बढ़ती मांग और स्थानीय स्तर पर कम आपूर्ति का मेल कीमतों में इस तरह के उछाल का मुख्य कारण बनता है।

चीनी की कीमतों पर संकट

चीनी की कीमतों में उछाल ने खरीदारों को सबसे ज्यादा झटका दिया है। रिटेल बाजार में चीनी ₹75 से ₹77 प्रति किलो के बीच बिक रही है। जहां कुछ लोग इसे एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के डायवर्जन का परिणाम मान रहे हैं, वहीं केंद्र सरकार ने घरेलू उत्पादन में गिरावट और वैश्विक आपूर्ति में कमी को इसका कारण बताया है।

वस्तुस्थितिअनुमानित कीमत
कच्चा केलाबढ़ोतरी₹65/kg
चीनीबढ़ोतरी₹75-₹77/kg
चावल (मट्टा)गिरावट/स्थिर₹57/kg
नारियल तेलगिरावट₹290/kg

हालांकि, राहत की बात यह है कि चावल और नारियल तेल की कीमतों में स्थिरता या गिरावट देखी गई है। मट्टा चावल की कीमतें ₹57 प्रति किलो पर आ गई हैं, जो दो सप्ताह पहले की तुलना में कम है।

Did You Know?: ओणम के दौरान कच्चे केले की मांग इतनी बढ़ जाती है कि चिप्स बनाने वाले निर्माता केवल उच्च गुणवत्ता वाले केलों के लिए अधिक भुगतान करने को तैयार रहते हैं।

Frequently Asked Questions

1. कच्चे केले की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?
मुख्य कारण तमिलनाडु के उत्पादन केंद्रों में कम वर्षा के कारण आपूर्ति में कमी है।

2. क्या चीनी की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है?
वैश्विक आपूर्ति और घरेलू उत्पादन के आंकड़ों पर निर्भर करते हुए कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।