पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) ने देश के एलपीजी नेटवर्क को 24% तक बढ़ाने के लिए ₹7,000 करोड़ की लागत वाली नई पाइपलाइन परियोजनाओं को मंजूरी दी है। यह विस्तार छह राज्यों में फैला होगा और GAIL द्वारा विकसित किया जाएगा।

  • कुल 1,800 किमी लंबी नई एलपीजी पाइपलाइन परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।
  • परियोजना में लगभग ₹7,000 करोड़ का पूंजी निवेश शामिल है।
  • यह विस्तार भारत के मौजूदा एलपीजी नेटवर्क को 24% तक बढ़ा देगा।
  • GAIL (इंडिया) लिमिटेड इन महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का विकास करेगा।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए देश के ऊर्जा बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए लगभग 1,800 किमी लंबी एलपीजी पाइपलाइन परियोजनाओं के विकास को हरी झंडी दे दी है। इस महत्वाकांक्षी विस्तार के लिए अनुमानित निवेश लगभग ₹7,000 करोड़ है, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

यह परियोजना भारत के छह प्रमुख राज्यों—तेलंगाना, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, कर्नाटक और गोवा—में फैली होगी। इन पाइपलाइनों के निर्माण का मुख्य उद्देश्य देश के एलपीजी वितरण तंत्र को अधिक कुशल और सुरक्षित बनाना है। स्वीकृत परियोजनाओं में चेरलापल्ली (तेलंगाना) से नागपुर (महाराष्ट्र) तक 556 किमी, झंसी (उत्तर प्रदेश) से सितारगंज (उत्तराखंड) तक 611 किमी, और शिक्रापुर (महाराष्ट्र) से गोवा और हुबली (कर्नाटक) तक 633 किमी की पाइपलाइन शामिल है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह कदम भारत की लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने और कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। वर्तमान में, भारत के एलपीजी आयात का एक बड़ा हिस्सा तटीय स्थानों पर लाया जाता है और फिर ट्रकों के माध्यम से देश के अन्य हिस्सों में भेजा जाता है। पाइपलाइन नेटवर्क के विस्तार से सड़क यातायात में कमी आएगी और सड़क सुरक्षा में सुधार होगा।

पाइपलाइन नेटवर्क का यह विस्तार न केवल लॉजिस्टिक्स लागत को कम करेगा बल्कि भारत की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में 'सिस्टम लचीलापन' (system resilience) भी प्रदान करेगा।

राज्य के स्वामित्व वाली गैस वितरक कंपनी GAIL (India) Limited इन परियोजनाओं को विकसित करने की जिम्मेदारी संभालेगी। जब ये पाइपलाइनें पूरी हो जाएंगी, तो भारत का कुल एलपीजी नेटवर्क लगभग 7,700 किमी से बढ़कर 9,500 किमी हो जाएगा, जो मौजूदा नेटवर्क में 24% की वृद्धि दर्शाता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत लंबे समय से ऊर्जा सुरक्षा के लिए आयातित एलपीजी पर निर्भर रहा है। जैसे-जैसे देश की अर्थव्यवस्था बढ़ रही है, घरेलू मांग भी तेजी से बढ़ रही है। सरकार का लक्ष्य 'गैस आधारित अर्थव्यवस्था' की ओर बढ़ना है, जिसमें पाइपलाइन नेटवर्क का विस्तार एक आधारशिला का काम करता है।

विवरणवर्तमान स्थितिपरियोजना के बाद
कुल एलपीजी नेटवर्क~7,700 किमी~9,500 किमी
नेटवर्क में वृद्धि-~24%
मुख्य कार्यान्वयन एजेंसीविभिन्नGAIL (India) Ltd
Did You Know?: पाइपलाइनों के माध्यम से गैस का परिवहन करने से सड़क पर चलने वाले भारी टैंक ट्रकों की संख्या में भारी कमी आती है, जिससे कार्बन उत्सर्जन कम होता है।

Frequently Asked Questions

1. इन नई पाइपलाइनों का निर्माण कौन करेगा?
इन परियोजनाओं का विकास सरकारी स्वामित्व वाली गैस वितरक कंपनी GAIL (India) Limited द्वारा किया जाएगा।

2. यह परियोजना किन राज्यों को लाभान्वित करेगी?
यह परियोजना तेलंगाना, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, कर्नाटक और गोवा राज्यों में फैली हुई है।