दक्षिण तटीय रेलवे (SCoR) के विजयवाड़ा डिवीजन ने 4,864 kWp की सौर क्षमता स्थापित कर हरित ऊर्जा की ओर एक बड़ा कदम बढ़ाया है। इस पहल से रेलवे को करोड़ों की बचत और कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी देखने को मिल रही है।
- विजयवाड़ा डिवीजन ने 4,864 kWp की कुल सौर क्षमता स्थापित की है।
- इस वित्तीय वर्ष के शुरुआती चार महीनों में ₹1.85 करोड़ की बचत हुई है।
- 10 रेलवे स्टेशनों ने 'नेट-जीरो' ऊर्जा-तटस्थ का दर्जा प्राप्त कर लिया है।
दक्षिण तटीय रेलवे (SCoR) के विजयवाड़ा डिवीजन ने टिकाऊ विकास और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। मंडल रेल प्रबंधक (DRM) मोहित सोनाकिया के अनुसार, डिवीजन ने अब तक 265 रूफटॉप और स्टैंडअलोन सौर प्रतिष्ठानों के माध्यम से लगभग 4,864 kWp की सौर क्षमता स्थापित कर ली है।
इस सौर ऊर्जा बुनियादी ढांचे का वितरण रणनीतिक रूप से किया गया है। कुल स्थापनाओं में से 2,978 kWp क्षमता के पैनल रेलवे स्टेशनों पर, 1,476 kWp सेवा भवनों और कार्यालयों में, 120 kWp कर्मचारियों के क्वार्टरों में और 290 kWp क्षमता के पैनल 70 लेवल क्रॉसिंग गेटों पर लगाए गए हैं।
पर्यावरण और आर्थिक प्रभाव
आंकड़े बताते हैं कि इस हरित पहल का प्रभाव गहरा है। वर्ष 2025-26 में, इन सौर प्रतिष्ठानों ने 44,06,903 यूनिट स्वच्छ ऊर्जा उत्पन्न की, जिससे लगभग ₹4.61 करोड़ की बचत हुई और 2,525.52 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को रोका गया। वर्तमान वित्तीय वर्ष (अप्रैल से जुलाई) के दौरान भी, डिवीजन ने 19,90,741 यूनिट बिजली बनाई और ₹1.85 करोड़ बचाए।
रेलवे का सौर ऊर्जा की ओर यह संक्रमण न केवल लागत को कम कर रहा है, बल्कि भारत के नेट-जीरो लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
बोजोकमीडिया विश्लेषण (BozokMedia analysis)
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि विजयवाड़ा डिवीजन का मॉडल अन्य रेलवे डिवीजनों के लिए एक ब्लूप्रिंट के रूप में कार्य कर सकता है। केवल सौर ऊर्जा ही नहीं, बल्कि पूरी तरह से LED लाइटिंग का उपयोग और अस्पतालों एवं विश्राम गृहों में 56,700 लीटर प्रति दिन की क्षमता वाले सौर जल हीटरों की स्थापना इस परिवर्तनकारी यात्रा को पूर्ण बनाती है।
नेट-जीरो स्टेशन और भविष्य की दिशा
विजयवाड़ा रेलवे स्टेशन को इसके टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल डिजाइन के लिए IGBC प्लेटिनम प्रमाणन से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा, द्वारपुडी, कडियाम, मधुनगर, सरपवारम, उप्पलुरु, उलावापाडु, कवतारम, निडमनूरु, मोटूरु और पेडाना सहित 10 स्टेशनों ने 'शून्य प्लस' (Net-Zero) ऊर्जा-तटस्थ स्थिति प्राप्त कर ली है।
इसके अतिरिक्त, हेड-ऑन जनरेशन (HOG) ट्रेन संचालन ने डीजल की खपत में भारी कमी की है, जिससे सालाना लगभग ₹70.80 करोड़ की बचत होने का अनुमान है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: विजयवाड़ा डिवीजन ने अब तक कितनी सौर क्षमता स्थापित की है?
उत्तर: डिवीजन ने कुल 4,864 kWp की सौर क्षमता स्थापित की है।
प्रश्न 2: किन स्टेशनों ने 'नेट-जीरो' का दर्जा प्राप्त किया है?
उत्तर: द्वारपुडी, कडियाम, मधुनगर, सरपवारम, उप्पलुरु, उलावापाडु, कवतारम, निडमनूरु, मोटूरु और पेडाना ने यह उपलब्धि हासिल की है।