गन्ना उत्पादक संघ ने सरकार से मांग की है कि गुड़ बनाने वाली छोटी इकाइयों को भी इथेनॉल उत्पादन की अनुमति दी जाए। संघ का आरोप है कि बड़ी चीनी मिलें इथेनॉल से भारी मुनाफा कमा रही हैं, जिससे बाजार में चीनी की कीमतें बढ़ रही हैं।

  • गन्ना उत्पादक संघ ने गुड़ इकाइयों को इथेनॉल बनाने का अधिकार देने की मांग की है।
  • बड़ी चीनी मिलों द्वारा इथेनॉल उत्पादन से होने वाले मुनाफे को कीमतों में वृद्धि का कारण बताया गया है।
  • संघ ने 'ब्राजील मॉडल' को अपनाने और किसानों को सशक्त बनाने का सुझाव दिया है।

बाजार में चीनी की कीमतों में हो रही भारी वृद्धि के बीच, स्टेट सुगरकेन ग्रोअर्स एसोसिएशन ने सरकार से एक महत्वपूर्ण मांग की है। एसोसिएशन के अध्यक्ष कुरुबुर शांतिकुमार ने आग्रह किया है कि सरकार गुड़ बनाने वाली स्थानीय इकाइयों को भी इथेनॉल उत्पादन की अनुमति दे।

शांतिकुमार का तर्क है कि वर्तमान में चीनी की कीमतों में उछाल का मुख्य कारण बड़ी चीनी मिलों द्वारा इथेनॉल उत्पादन से कमाया जा रहा 'भारी मुनाफा' है। उन्होंने कहा कि इथेनॉल उत्पादन का लाभ केवल बड़े कारखानों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। सरकार को ऐसी सरल नीतियां बनानी चाहिए जिससे किसान अपनी स्थानीय गुड़ इकाइयों में खुद इथेनॉल बना सकें।

क्यों यह महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यदि छोटे किसान इथेनॉल उत्पादन में शामिल होते हैं, तो यह न केवल उनकी आय बढ़ाएगा बल्कि ईंधन की लागत को भी कम करेगा। किसान इस इथेनॉल का उपयोग अपने ट्रैक्टरों और वाहनों में कर सकते हैं, या इसे सरकार को एक निश्चित मूल्य पर बेच सकते हैं।

सरकार को बड़े उद्योगपतियों के बजाय सीधे किसानों के हितों की रक्षा करने वाली नीतियां बनानी चाहिए।

वर्तमान में, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में सूखे जैसी स्थिति और कम बारिश के कारण पैदावार में भारी गिरावट आई है। इससे उत्पादन लागत बढ़ गई है और किसानों की आर्थिक स्थिति दयनीय हो गई है।

ऐतिहासिक संदर्भ और ब्राजील मॉडल

शांतिकुमार ने 'ब्राजील मॉडल' का हवाला देते हुए सुझाव दिया कि जब गन्ने का उत्पादन अधिक हो, तो चीनी के बजाय इथेनॉल उत्पादन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इससे चीनी की कीमतों में स्थिरता बनी रहेगी। इसके विपरीत, सूखे के समय इथेनॉल उत्पादन को नियंत्रित कर घरेलू उपभोग के लिए चीनी उत्पादन पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

विशेषताबड़ी चीनी मिलेंस्थानीय गुड़ इकाइयां
इथेनॉल उत्पादनवर्तमान में अनुमतअनुमति की मांग
मुनाफा वितरणकेवल मिल मालिकों कोकिसानों को मिलने की उम्मीद
उपयोगऔद्योगिक/सरकारी बिक्रीघरेलू/कृषि ईंधन

संघ ने मांग की है कि सरकार को गन्ने के लिए 'उचित और लाभकारी मूल्य' (FRP) को वैज्ञानिक रूप से बढ़ाना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उप-उत्पादों (by-products) से होने वाले लाभ में किसानों की भी उचित हिस्सेदारी हो।

Did You Know?: इथेनॉल एक नवीकरणीय ईंधन है जो पेट्रोल के मिश्रण के रूप में कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद करता है।

Frequently Asked Questions

1. गन्ना उत्पादक संघ की मुख्य मांग क्या है?
मुख्य मांग यह है कि गुड़ बनाने वाली छोटी इकाइयों को भी इथेनॉल उत्पादन की अनुमति दी जाए ताकि किसानों को अधिक लाभ मिल सके।

2. चीनी की कीमतों में वृद्धि का क्या कारण बताया गया है?
संघ के अनुसार, बड़ी चीनी मिलें इथेनॉल उत्पादन से अत्यधिक लाभ कमा रही हैं, जिससे बाजार में चीनी की आपूर्ति और कीमतों पर प्रभाव पड़ रहा है।