ईरान-इजरायल संघर्ष के कारण कच्चे माल की कीमतों में भारी उछाल आने के बाद सूरत के ऊण औद्योगिक क्षेत्र की 800 से अधिक बुनकर फैक्ट्रियां अब सप्ताह में दो दिन बंद रहेंगी।
- ईरान-अमेरिका-इजरायल संघर्ष के कारण कच्चे माल की कीमतों में भारी वृद्धि।
- सूरत के ऊण क्षेत्र की 800 से अधिक फैक्ट्रियां और 30,000 पावरलूम मशीनें प्रभावित।
- आर्थिक नुकसान से बचने के लिए मंगलवार और बुधवार को साप्ताहिक अवकाश का निर्णय।
- कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने पॉलिएस्टर यार्न के उत्पादन को महंगा कर दिया है।
सूरत, गुजरात: वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत के प्रमुख कपड़ा केंद्रों में साफ दिखने लगा है। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी संघर्ष ने कच्चे तेल की आपूर्ति श्रृंखला को बाधित कर दिया है, जिसका सीधा असर सूरत के टेक्सटाइल वीविंग हब पर पड़ा है। सूरत के ऊण औद्योगिक क्षेत्र में स्थितกว่า 800 बुनकर फैक्ट्रियां, जो लगभग 30,000 पावरलूम मशीनों का संचालन करती हैं, अब भारी वित्तीय संकट से जूझ रही हैं।
बुनकरों ने निर्णय लिया है कि वे अब से सप्ताह में दो दिन, यानी मंगलवार और बुधवार को अपनी फैक्ट्रियां बंद रखेंगे। यह कदम उत्पादन लागत में हुई अत्यधिक वृद्धि और बाजार में मिल रहे कम दामों के बीच संतुलन बनाने के लिए उठाया गया है। ऊण पावरलूम एसोसिएशन के नेता जाहिद कपाड़िया के अनुसार, बुनकर इस स्थिति में गंभीर नुकसान झेल रहे हैं क्योंकि खरीदार नए ऊंचे दामों के बजाय पुराने दरों पर ही कपड़ा खरीदना चाहते हैं।
क्यों है यह संकट महत्वपूर्ण?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल एक स्थानीय समस्या नहीं है, बल्कि वैश्विक तेल राजनीति का सीधा परिणाम है। पॉलिएस्टर यार्न बनाने के लिए आवश्यक घटक जैसे PTA (प्यूरीफाइड टेरेफ्थेलिक एसिड) और MEG (मोनोएथिलीन ग्लाइकोल) सीधे कच्चे तेल से जुड़े हैं। जब वैश्विक संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमत $70 प्रति बैरल से बढ़कर $95 प्रति बैरल हो गई, तो पॉलिएस्टर यार्न की कीमत भी ₹112 प्रति किलोग्राम से बढ़कर ₹140 प्रति किलोग्राम हो गई।
अंतरराष्ट्रीय युद्ध और कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता ने भारतीय कपड़ा उद्योग की उत्पादन लागत को असंतुलित कर दिया है।
सूरत के ऊण क्षेत्र में आठ प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र शामिल हैं, जिनमें शामिल हैं: शालिमर एस्टेट, तस्लीम नगर, राज इंडस्ट्रियल एस्टेट, धामनवाला इंडस्ट्रियल एस्टेट, ऊण ओल्ड इंडस्ट्रियल एस्टेट, मीट एंड मीर इंडस्ट्रीज, गुजरात इंडस्ट्रियल एस्टेट और नवाब इंडस्ट्रियल एस्टेट। इन सभी क्षेत्रों के हितधारकों ने मिलकर उत्पादन घटाने का कठिन निर्णय लिया है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
सूरत दशकों से भारत के 'टेक्सटाइल हब' के रूप में जाना जाता है। पॉलिएस्टर और सिंथेटिक कपड़ों के उत्पादन में इसकी वैश्विक भूमिका है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में किसी भी प्रकार का उतार-चढ़ाव सीधे तौर पर यहाँ के बुनकरों की कमर तोड़ देता है, क्योंकि इनका पूरा पारिस्थितिकी तंत्र पेट्रोकेमिकल डेरिवेटिव्स पर निर्भर है।
साउथ गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (SGCCI) ने पहले ही केंद्र सरकार से PTA और MEG पर सीमा शुल्क (Customs Duty) को शून्य करने की मांग की थी। सरकार ने अप्रैल से जुलाई 2026 तक कुछ राहत दी थी, लेकिन अब उद्योग जगत को फिर से हस्तक्षेप की आवश्यकता महसूस हो रही है।
Frequently Asked Questions
1. सूरत की फैक्ट्रियां किन दिनों बंद रहेंगी?
ऊण औद्योगिक क्षेत्र की फैक्ट्रियां अब सप्ताह में दो दिन, मंगलवार और बुधवार को बंद रहेंगी।
2. कीमतों में वृद्धि का मुख्य कारण क्या है?
ईरान-अमेरिका-इजरायल संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि हुई है, जिससे पॉलिएस्टर यार्न के कच्चे माल की लागत बढ़ गई है।