सरकार द्वारा 10 लाख टन कच्ची चीनी आयात की अनुमति मिलने से घरेलू कीमतें गिर गईं, लेकिन कीमतों में तेज उतार‑चढ़ाव अभी भी बाजार को परेशान कर रहा है। उद्योग विशेषज्ञों ने कहा है कि अगले कई महीनों तक कीमतें ₹50‑₹60 के बीच रह सकती हैं।
- 10 लाख टन कच्ची चीनी आयात से कीमतों में गिरावट
- अगले महीनों में कीमतें ₹50‑₹60 के बीच रह सकती हैं
- सरकारी उपायों से आपूर्ति स्थिरता की उम्मीद
कीमतों का वर्तमान परिदृश्य
भारत में शुगर मार्केटिंग सीज़न 1 अक्टूबर 2025 से शुरू हुआ, जब एक्स‑मिल कीमत ₹38‑₹39 प्रति किलोग्राम थी। जनवरी में कीमतें बढ़कर ₹48 तक पहुंच गईं और 24 अगस्त 2026 को महाराष्ट्र में यह ₹56 प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। दो दिन पहले यह कीमत ₹58 थी, और 21 अगस्त को ₹62 पर थी।
सरकारी कदम और आयात नीति
पिछले हफ्ते केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी का आयात मुक्त किया, जिससे बाजार में आपूर्ति की उम्मीद बढ़ी। आयातित चीनी का अधिकांश भाग ब्राज़ील से आने की संभावना है और यह मध्य‑अक्टूबर तक भारतीय बंदरगाहों में पहुंचेगी। साथ ही, सरकार ने स्टॉक रखने पर प्रतिबंध और 2026‑27 के क्रशिंग सीज़न को आगे बढ़ाने की संभावना जताई है।
उद्योग की स्थिति
इंडियन शुगर एंड बायो‑एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के अनुसार, वर्तमान कीमतों में स्थिरता की कमी का मतलब देश में शुगर की कमी नहीं है। 2025‑2026 शुगर सीज़न में अनुमानित उत्पादन 279 लाख टन है, जबकि घरेलू खपत 280‑285 लाख टन है, जिससे लगभग 35 लाख टन का सुरक्षित स्टॉक बना रहता है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that prolonged price volatility can ripple through the food processing sector, affect inflation metrics, and influence farmer income stability across major sugar‑cane growing states.
"आयातित चीनी के समय पर आगमन और प्रभावी स्टॉक प्रबंधन ही कीमतों को स्थिर करने की कुंजी होगी," कहा कृषि अर्थशास्त्री डॉ. अंजलि सिंह ने।
Frequently Asked Questions
- क्या आयातित चीनी से घरेलू कीमतों में स्थिरता आएगी? आयातित चीनी का समय पर आगमन आपूर्ति को संतुलित कर सकेगा, परन्तु वैश्विक कीमतों की अस्थिरता अभी भी प्रभाव डाल सकती है।
- किसी किसान को इस कीमतों में उतार‑चढ़ाव से क्या नुकसान हो सकता है? उच्च कीमतों के दौर में कच्चे माल के खर्च में वृद्धि हो सकती है, जिससे मार्जिन कम हो सकता है।