वित्त मंत्रालय ने कहा कि RBI की concessional स्वैप सुविधा ने लक्ष्य से पहले ही $65.4 बिलियन की जमा राशि हासिल कर ली है। यह सफलता भारतीय प्रवासी समुदाय की भरोसेमंदता और भारत की आर्थिक स्थिरता को दर्शाती है।

  • FCNR(B) स्वैप विंडो ने लक्ष्य से पहले $65.4 बिलियन जमा किया
  • रिज़र्व बैंक ने विंडो को 31 अगस्त को बंद कर दिया, मूल समयसीमा 30 सितंबर थी
  • वित्त मंत्रालय ने इस प्रतिक्रिया को "शानदार" कहा और लागत‑प्रभावशीलता पर प्रकाश डाला

स्वैप विंडो की पृष्ठभूमि

रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया ने 8 जून को concessional स्वैप सुविधा शुरू की, जिसका उद्देश्य विदेशी inflows को बढ़ावा देना और रुपये के विनिमय दर को स्थिर करना था। इस योजना के तहत FCNR(B) जमा, ओवरसीज फ़ॉरेन करंसी बॉरोइंग्स (OFCB) और एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग्स (ECBs) को विशेष रूप से सुविधा दी गई।

वर्तमान उपलब्धियां

24 अगस्त को वित्त मंत्रालय ने बताया कि 21 अगस्त तक $65.4 बिलियन की FCNR(B) जमा राशि प्राप्त हुई, जो भारतीय प्रवासी समुदाय की वित्तीय प्रणाली में विश्वास को दर्शाता है। इस बीच, RBI ने 21 अगस्त तक कुल $72.85 बिलियन की जमा राशि एकत्रित की।

विंडो का समयसारिणी परिवर्तन

आरबीआई ने 14 अगस्त को घोषणा की कि स्वैप विंडो 31 अगस्त को बंद हो जाएगी, अर्थात् मूल 30 सितंबर की समयसीमा से एक माह पहले। यह निर्णय लागत‑प्रभावशीलता को देखते हुए लिया गया, हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि योजना की लागत $10 बिलियन तक हो सकती है, जो बंद करने के निर्णय को प्रभावित नहीं कर सकती।

विनिमय दर और मौद्रिक नीति पर प्रभाव

2013 में पहली बार इस सुविधा का उपयोग तब किया गया था जब अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की नीति सख्ती की संभावना थी, जिससे पूंजी प्रवाह में गिरावट आई थी। इस बार, रुपये की कीमत 95‑96 प्रति डॉलर के स्तर पर बनी हुई है, और 97 के निकट पहुँचने से बचा है, जिससे वैश्विक उच्च ब्याज दरों और भू‑राजनीतिक तनावों का असर दिखता है।

भविष्य की संभावनाएँ

ओवरसीज फ़ॉरेन करंसी बॉरोइंग्स और एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग्स की सुविधा 31 दिसंबर तक खुली रहेगी, जैसा कि मूल रूप से घोषित किया गया था। इस प्रकार, भारत की बाहरी बफ़र को मजबूत करने में यह योजना एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that the swift inflow under the FCNR(B) scheme not only bolsters India's foreign exchange reserves but also signals strong confidence among the diaspora, which can translate into sustained capital stability amid volatile global markets.

"The early closure of the swap window underscores the Ministry's focus on cost‑efficiency while still achieving record inflows," says Dr. Ananya Rao, senior economist at CareEdge Ratings.
Did You Know?: RBI की शॉर्ट फॉरवर्ड बुक ने मई के अंत में $106 बिलियन का रिकॉर्ड बनाया, जिसे जून में $103 बिलियन तक घटाया गया।

Frequently Asked Questions

Q1: FCNR(B) स्वैप विंडो का मुख्य उद्देश्य क्या था?
A: विदेशी निवेश को आकर्षित करना, रूढ़ि विनिमय दर को स्थिर करना और भारत के भुगतान संतुलन में अंतर को घटाना।

Q2: क्या इस योजना की लागत भारत की विदेशी रिज़र्व को कम करेगी?
A: नहीं, क्योंकि RBI सभी हेजिंग लागत वहन करता है और योजना को मुख्यतः तरलता एवं स्थिरता उपकरण माना गया है, न कि रिज़र्व वृद्धि का साधन।