रुपया ने शुरुआती उछाल को घटा कर 95.74 पर समाप्त किया, जबकि डॉलर इंडेक्स 0.18% बढ़ा। ब्रेंट तेल की कीमतों में वृद्धि और यूएस‑ईरान तनाव ने बाजार को प्रभावित किया।
- रुपया 95.74 पर बंद, 3 पैसे गिरावट
- डॉलर इंडेक्स 98.98, 0.18% बढ़ा
- ब्रेंट तेल $92.86, 1.62% गिरावट
बाजार की स्थिति
रुपया ने अंतरबैंक बाजार में 95.65 पर खुला, दिन के दौरान 95.64 के उच्चतम और 95.75 के निम्नतम स्तर को छुआ, और अंत में 95.74 पर समाप्त हुआ। यह गिरावट मुख्यतः अमेरिकी डॉलर की मजबूती और घरेलू शेयर बाजार की कमजोरी के कारण थी।
वित्तीय संकेतक
डॉलर इंडेक्स, जो छह प्रमुख मुद्राओं के खिलाफ डॉलर्स की ताकत को मापता है, 98.98 पर ट्रेड हो रहा था, जो 0.18% की वृद्धि दर्शाता है। इसी दौरान ब्रेंट क्रूड की कीमत $92.86 प्रति बैरल रही, जो 1.62% की गिरावट थी।
शेयर बाजार पर असर
सेंसेक्स 171.72 अंक गिरकर 77,369.11 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 32.95 अंक घटकर 24,219.05 पर पहुँचा। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 5,42.71 करोड़ रुपये की शुद्ध बिक्री की।
रिज़र्व बैंक की स्थिति
रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने बताया कि 14 अगस्त तक के सप्ताह में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार $9.905 बिलियन बढ़कर $716.907 बिलियन हो गए। यह बढ़ोतरी डॉलर की मजबूती के बावजूद भारत की विदेशी मुद्रा स्थिति को सुदृढ़ बनाती है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that लगातार डॉलर की मजबूती और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भारतीय निर्यातकों और आयातकों दोनों के लिए जोखिम पैदा कर रहे हैं, जिससे रूपया पर दबाव बना रहेगा।
"उच्च तेल कीमतें और यूएस‑ईरान तनाव के बीच, रूपया के लिए नकारात्मक बायस संभावित है," कहा अनुज चौधरी, Mirae Asset ShareKhan के रिसर्च एनालिस्ट ने।
Frequently Asked Questions
रुपया कब तक 95.50-96 की रेंज में रहेगा? विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक जोखिम और घरेलू आर्थिक डेटा के आधार पर यह रेंज निकट भविष्य में बनी रह सकती है।
डॉलर इंडेक्स की बढ़ोतरी का भारतीय निर्यात पर क्या प्रभाव पड़ेगा? डॉलर की मजबूती से भारतीय वस्तुओं की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ सकती है, जिससे निर्यात प्रतिस्पर्धा पर दबाव पड़ेगा।