शुगर की कीमतों में अचानक तेज़ी आई है, जिसका कारण कम उत्पादन, घटती स्टॉक और इथेनॉल के लिए गन्ने का मोड़ है। प्रोफेसर आशोक गुलाटी का कहना है कि सरकार ने आयात में देरी की और उच्च आयात शुल्क ने संकट को और बढ़ा दिया।
- उत्पादन में लगभग 10% गिरावट
- इथेनॉल मोड़ से आपूर्ति दबाव बढ़ा
- आयात में देरी और 100% कस्टम ड्यूटी ने कीमतें बढ़ाई
भारत में शुगर की कीमतें पिछले कुछ हफ़्तों में तेज़ी से बढ़ी हैं, जिससे उपभोक्ताओं और उद्योग दोनों को चिंतित किया है। कृषि अर्थशास्त्री प्रोफेसर आशोक गुलाटी ने भारत टुडे के साथ विशेष साक्षात्कार में बताया कि उत्पादन में गिरावट, घटती स्टॉक और गन्ने का इथेनॉल उत्पादन के लिए मोड़ इस संकट के मुख्य कारण हैं।
गुलाटी के अनुसार, खुली स्टॉक 8 मिलियन टन से घटकर 5 मिलियन टन रह गई है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला में गंभीर कमी आई है। साथ ही, गन्ने का लगभग 10% भाग इथेनॉल उत्पादन में जा रहा है, जिससे शुगर उपलब्धता पर दोहरी दबाव बन रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार को इस कमी को कई महीने पहले पहचान लेना चाहिए था और आयात के लिए उचित निर्णय लेना चाहिए था। "आयात को चार‑पाँच महीने पहले खोल देना चाहिए था," उन्होंने कहा, जिससे कीमतों में इतना उछाल नहीं आता।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that a prolonged sugar price surge can ripple through India’s festive season economy, affecting confectionery sales, household budgets, and even export competitiveness. यदि कीमतें और बढ़ीं तो छोटे व्यवसायों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
"सरकार की देरी और उच्च आयात शुल्क ने बाजार को समय पर प्रतिक्रिया देने से रोक दिया," प्रोफेसर गुलाटी ने कहा।
गुलाटी ने यह भी कहा कि शुगर सेक्टर पर अत्यधिक सरकारी नियंत्रण है—गन्ने की कीमत, फैक्टरी के एक्स‑फ़ैक्टरी प्राइस और मिलों द्वारा बाजार में जारी किए जाने वाले शुगर की मात्रा तक। उन्होंने इस प्रणाली को "दुनिया में कहीं नहीं देखा गया" कहा और सेक्टर में "एक नई उदारीकरण लहर" की मांग की।
उन्होने बताया कि आयात शुल्क 100% है, जो बाजार को तुरंत प्रतिक्रिया देने से रोकता है। वैकल्पिक उपायों में इथेनॉल के बजाय शुगर आयात करना, या खाद्य निगम के चावल का उपयोग करके मिलों को अधिक शुगर उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करना शामिल है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या इथेनॉल के लिए गन्ने का मोड़ शुगर की कीमतों को स्थायी रूप से बढ़ा देगा?
उत्तर: अगर सरकार नीतियों में लचीलापन लाए और बाजार‑आधारित मूल्य निर्धारण को लागू करे तो मोड़ का प्रभाव कम हो सकता है।
प्रश्न 2: आयात में देरी को कैसे सुधारा जा सकता है?
उत्तर: आयात शुल्क कम करना, पूर्व-आधारित आयात योजना बनाना और स्टॉक‑पाइलिंग को प्रोत्साहित करना समाधान में मददगार हो सकता है।