सरकार ने RBI के केंद्रिय बोर्ड में तीन अनुभवी विशेषज्ञों को अर्ध‑कालिक निदेशक के रूप में नियुक्त किया। यह कदम UPSC परीक्षा में मौद्रिक नीति, नियामक संस्थाएँ और सार्वजनिक वित्त से जुड़े प्रश्नों को प्रभावित करेगा।
- बोर्ड का आकार 11 से बढ़कर 14 सदस्य हो जाएगा।
- नियुक्तियों की अवधि चार साल की होगी, जैसा कि RBI अधिनियम के धारा 8(1)(c) में बताया गया है।
- नए सदस्य सार्वजनिक वित्त, अर्थशास्त्र और कूटनीति में व्यापक अनुभव लाते हैं।
भारत सरकार ने रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) के केंद्रिय बोर्ड में तीन नए अर्ध‑कालिक, गैर‑अधिकारिक निदेशकों को नियुक्त किया। ये नियुक्तियां पूर्व वित्त मंत्रालय की वरिष्ठ अधिकारी एनी जॉर्ज मैथ्यू, अर्थशास्त्री एवं प्रबंधन सलाहकार जनमेजय कुमार सिन्हा, और पूर्व राजनयिक सैयद अकबरुद्दीन को सौंपे गए हैं।
इन तीनों का चार‑साल का कार्यकाल होगा और यह नियुक्तियां कैबिनेट के नियुक्ति समिति द्वारा अनुमोदित हैं। अब बोर्ड की कुल संख्या 14 हो जाएगी, जिसमें गवर्नर, उप‑गवर्नर और दस गैर‑अधिकारिक निदेशक शामिल हैं।
RBI का गठन 1935 में हुआ और 1949 में राष्ट्रीयकृत किया गया। यह भारत की मौद्रिक नीति, विनियमन और वित्तीय स्थिरता का मुख्य संस्थान है, जिसका कार्य बोर्ड के माध्यम से संचालित होता है। बोर्ड की संरचना, अधिकार और कार्यप्रणाली UPSC की सामान्य अध्ययन‑II में अक्सर पूछे जाने वाले विषयों में से है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that these appointments bring a rare blend of public‑finance expertise, global economic insight, and diplomatic experience to the RBI, potentially shaping policy directions that UPSC aspirants must master for both prelims and mains.
"नए निदेशकों का विविध पृष्ठभूमि RBI की नीति‑निर्धारण में बहु‑आयामी दृष्टिकोण जोड़ता है," वित्तीय विश्लेषक अर्चना सिंह ने कहा।
RBI के बोर्ड में पूर्व ISRO अध्यक्ष सोमनाथ सिंग और महिंद्रा ग्रुप के संस्थापक आनंद महिंद्रा की नियुक्ति पिछले हफ्ते हुई थी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को वित्तीय शासन में शामिल कर रही है। यह प्रवृत्ति UPSC परीक्षा में नियामक संस्थाओं की भूमिका और उनकी कार्यप्रणाली को समझने के लिए महत्वपूर्ण संकेत देती है।
ऐसे बदलाव न केवल भारतीय वित्तीय प्रणाली को सुदृढ़ करेंगे, बल्कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सहयोग और मुद्रा स्थिरता के पहलुओं पर भी प्रभाव डालेंगे। इस संदर्भ में चीन‑भारत सीमा, तालिबान के साथ संवाद, और साइबर सुरक्षा जैसे व्यापक विषय भी UPSC के प्रश्नपत्र में शामिल हो सकते हैं।
Frequently Asked Questions
Q: RBI बोर्ड में आधिकारिक और गैर‑अधिकारिक निदेशकों की संख्या कितनी होती है?
A: वर्तमान में बोर्ड में गवर्नर, अधिकतम चार उप‑गवर्नर और दस गैर‑अधिकारिक निदेशक होते हैं।
Q: इन नई नियुक्तियों का UPSC परीक्षाओं पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
A: उम्मीदवारों को RBI की संरचना, नीति‑निर्धारण प्रक्रिया और सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन पर गहरा ज्ञान होना आवश्यक होगा, क्योंकि ये विषय प्री‑और मेन्स दोनों में बार‑बार पूछे जाते हैं।