FIIDS ने H-1B वीजा के लिए प्रस्तावित 1,03,265 अमेरिकी डॉलर के भारी शुल्क पर कड़ी आपत्ति जताई है। समूह का कहना है कि यह कदम स्टार्टअप्स को खत्म कर सकता है और कुशल प्रतिभाओं को अमेरिका से बाहर धकेल सकता है।

  • H-1B वीजा के लिए 1,03,265 अमेरिकी डॉलर का नया शुल्क प्रस्तावित किया गया है।
  • FIIDS के अनुसार, यह कदम स्टार्टअप्स और विदेशी प्रतिभाओं के लिए बड़ा झटका होगा।
  • प्रस्तावित शुल्क के कारण अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या और भी गिर सकती है।
  • कुल लागत OPT शुल्क के साथ 2,03,265 डॉलर तक पहुंच सकती है।

फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज (FIIDS) ने हाल ही में प्रस्तावित H-1B वर्क वीजा शुल्क में भारी वृद्धि पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। अमेरिकी सुरक्षा विभाग (DHS) द्वारा प्रस्तावित 1,03,265 अमेरिकी डॉलर का अतिरिक्त शुल्क न केवल कंपनियों के लिए वित्तीय बोझ बढ़ाएगा, बल्कि यह अमेरिका की तकनीकी बढ़त को भी खतरे में डाल सकता है।

FIIDS के नीति और रणनीति प्रमुख, खंडेराव कांड ने चेतावनी दी है कि यह प्रस्तावित शुल्क उन स्टार्टअप्स का दम घोंट सकता है जो पहले से ही सीमित संसाधनों से जूझ रहे हैं। बड़ी कंपनियां, जो हजारों H-1B कर्मचारियों को नियुक्त करती हैं, उन्हें अतिरिक्त लागत के रूप में करोड़ों, यहाँ तक कि अरबों डॉलर का भुगतान करना पड़ सकता है।

क्यों यह महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यदि यह शुल्क लागू होता है, तो अमेरिका का 'स्टूडेंट-टू-वर्क' मॉडल पूरी तरह से ध्वस्त हो सकता है। यदि इसमें 1,00,000 डॉलर का OPT (ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग) शुल्क भी जोड़ दिया जाए, तो एक कुशल कर्मचारी को नियुक्त करने की कुल लागत 2,03,265 डॉलर तक पहुंच जाएगी। यह राशि अंतरराष्ट्रीय प्रतिभाओं के लिए अमेरिका के दरवाजे लगभग बंद कर देगी।

H-1B शुल्क में इतनी बड़ी वृद्धि न केवल स्टार्टअप्स को नुकसान पहुंचाएगी, बल्कि अमेरिका की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को भी कमजोर करेगी।

यह विरोध ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के नामांकन में पहले से ही गिरावट देखी जा रही है। इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल एजुकेशन के आंकड़ों के अनुसार, 2025 की शरद ऋतु में नए अंतरराष्ट्रीय छात्रों के नामांकन में 17 प्रतिशत की गिरावट आई है। NAFSA के 2026 के अनुमानों के अनुसार, छात्रों की संख्या में कमी से अमेरिका को 3.4 बिलियन डॉलर का आर्थिक नुकसान हो सकता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

H-1B वीजा कार्यक्रम दशकों से अमेरिकी अर्थव्यवस्था और तकनीकी क्षेत्र की रीढ़ रहा है। यह विशेष रूप से आईटी और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में कुशल पेशेवरों को अमेरिका लाने का मुख्य माध्यम है। पिछले कुछ वर्षों में, वीजा नियमों और शुल्कों में बदलाव को लेकर अक्सर राजनीतिक बहस होती रही है, लेकिन वर्तमान प्रस्तावित वृद्धि अब तक की सबसे बड़ी और सबसे महंगी मानी जा रही है।

विवरणप्रस्तावित शुल्क (USD)प्रभाव
H-1B वीजा शुल्क$103,265स्टार्टअप्स के लिए अत्यधिक महंगा
OPT शुल्क (संभावित)$100,000छात्रों के लिए करियर मार्ग कठिन
कुल संभावित लागत$203,265प्रतिभा पलायन का खतरा
क्या आप जानते हैं?: अमेरिकी नागरिकता और आप्रवासन सेवा (USCIS) अपनी फंडिंग का लगभग 96% हिस्सा आवेदकों द्वारा दिए गए शुल्कों से प्राप्त करती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. FIIDS कौन है?
FIIDS एक भारतीय-अमेरिकी वकालत समूह है जो भारतीय डायस्पोरा और संबंधित नीतियों के अध्ययन और समर्थन पर ध्यान केंद्रित करता है।

2. इस शुल्क वृद्धि का क्या प्रभाव पड़ेगा?
इससे अमेरिका में विदेशी प्रतिभाओं को नियुक्त करना महंगा हो जाएगा, जिससे नौकरियां अन्य देशों में स्थानांतरित हो सकती हैं।