बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप एयरबाउंड ने सीरीज A फंडिंग में 37 मिलियन डॉलर जुटाए हैं। कंपनी का लक्ष्य ऐसे हल्के और शक्तिशाली ड्रोन बनाना है जो सड़क परिवहन की तुलना में सस्ते और तेज़ हों।
- एयरबाउंड ने ग्रीनओक्स और डोरडैश सहित प्रमुख निवेशकों से 37 मिलियन डॉलर जुटाए।
- कंपनी 'टेल-सिटर' डिजाइन वाले ड्रोन बना रही है जो वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग में सक्षम हैं।
- नारायणा हेल्थ के साथ साझेदारी में चिकित्सा नमूनों के परिवहन का समय 5 घंटे से घटकर 7 मिनट रह गया है।
- आंध्र प्रदेश सरकार के साथ 10,000 दैनिक उड़ानों के लक्ष्य वाला एक बड़ा नेटवर्क बनाने का समझौता।
भारतीय डीप-टेक स्टार्टअप Airbound ने अपने हालिया सीरीज A फंडिंग राउंड में 37 मिलियन डॉलर की पूंजी जुटाई है। इस निवेश का नेतृत्व Greenoaks ने किया, जिसमें DoorDash, लैकी ग्रूम, लाइटस्पीड और हम्बा वेंचर्स जैसे दिग्गजों ने हिस्सा लिया। पिछले साल के सीड राउंड के बाद, इस तीन साल पुराने स्टार्टअप ने अब तक कुल लगभग 50 मिलियन डॉलर जुटा लिए हैं।
एयरबाउंड का मुख्य उद्देश्य ड्रोन डिलीवरी की लागत को सड़क परिवहन (ट्रकिंग) के बराबर लाना है। पारंपरिक ड्रोन अक्सर अपने स्वयं के वजन को उठाने में बहुत अधिक ऊर्जा खर्च करते हैं, जिससे छोटे पेलोड की डिलीवरी महंगी हो जाती है। एयरबाउंड के संस्थापक और सीईओ नमन पुष्प के अनुसार, वे ऐसे ड्रोन विकसित कर रहे हैं जिनका वजन उनके द्वारा ले जाए जाने वाले सामान से कम हो।
तकनीकी नवाचार: रॉकेट जैसा डिजाइन
कंपनी का वर्तमान ड्रोन 'TRT' लगभग 3.3 पाउंड का है और 2.2 पाउंड पेलोड ले जा सकता है। आगामी वर्जन में इसे 6.6 पाउंड वजन के साथ 11 पाउंड तक सामान ले जाने में सक्षम बनाया जाएगा। यह ड्रोन एक 'टेल-सिटर' डिजाइन का उपयोग करता है, जो रॉकेट की तरह सीधा खड़ा होकर उड़ान भरता है और उतरता है, लेकिन हवा में क्षैतिज (horizontal) रूप से उड़ता है। इससे रनवे की आवश्यकता समाप्त हो जाती है।
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि एयरबाउंड केवल एक डिलीवरी ऑपरेटर नहीं, बल्कि एक विमान निर्माता बनना चाहता है। जिस तरह बोइंग विमान बनाता है और एयरलाइंस उनका उपयोग करती हैं, एयरबाउंड का लक्ष्य दुनिया भर के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के लिए मानक हार्डवेयर प्रदान करना है। यह दृष्टिकोण उन्हें केवल एक सर्विस प्रोवाइडर से ऊपर उठाकर एक ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर प्लेयर बनाता है।
"हमारा लक्ष्य एक ऐसी दुनिया बनाना है जहां हवाई परिवहन की लागत ट्रकिंग के समान हो, जिससे लॉजिस्टिक्स की पूरी परिभाषा बदल जाएगी।"
स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में, एयरबाउंड ने नारायणा हेल्थ के साथ मिलकर क्रांतिकारी बदलाव किए हैं। बेंगलुरु और गुंटूर में 13,000 से अधिक स्वायत्त उड़ानें पूरी की जा चुकी हैं। जहां ट्रक से नमूने भेजने में 3 से 5 घंटे लगते थे, वहीं एयरबाउंड का ड्रोन इसे मात्र 7 मिनट में पूरा कर रहा है।
भविष्य की योजनाओं में आंध्र प्रदेश के तीन शहरों को जोड़ने वाला एक विशाल नेटवर्क शामिल है, जिसका लक्ष्य प्रतिदिन 10,000 उड़ानें संचालित करना है। हालांकि, कंपनी के सामने सबसे बड़ी चुनौती BVLOS (Beyond Visual Line of Sight) ऑपरेशन्स के लिए नियामक मंजूरी प्राप्त करना है, जो बड़े पैमाने पर व्यावसायिक संचालन के लिए अनिवार्य है।
| विशेषता | पारंपरिक ट्रक परिवहन | एयरबाउंड ड्रोन डिलीवरी |
|---|---|---|
| डिलीवरी समय (नमूने) | 3 से 5 घंटे | 7 मिनट |
| इन्फ्रास्ट्रक्चर जरूरत | सड़कें और ट्रैफिक | वर्टिकल टेक-ऑफ (कोई रनवे नहीं) |
| लागत संरचना | ईंधन और श्रम आधारित | ऊर्जा कुशल और स्वायत्त |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. एयरबाउंड ड्रोन अन्य डिलीवरी ड्रोन से कैसे अलग हैं?
ये ड्रोन 'टेल-सिटर' डिजाइन का उपयोग करते हैं और इनका वजन पेलोड से कम रखने पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जिससे परिचालन लागत घटती है।
2. क्या एयरबाउंड वर्तमान में मुनाफा कमा रहा है?
नहीं, कंपनी वर्तमान में प्री-रेवेन्यू चरण में है और अपना पूरा ध्यान तकनीक के विकास और विनिर्माण क्षमता बढ़ाने पर लगा रही है।