भारत का युवा संकट केवल प्रतियोगी परीक्षाओं में सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रोजगार के अभाव और संरचनात्मक आर्थिक विफलताओं का परिणाम है। शिक्षा और नौकरियों के बीच बढ़ती खाई देश के भविष्य के लिए एक गंभीर चेतावनी है।
- प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का खर्च बढ़कर परिवारों के शिक्षा बजट का 16% तक पहुँच गया है।
- उच्च शिक्षा में स्नातक नामांकन (Undergraduate enrolment) में पहली बार गिरावट देखी गई है।
- स्नातकों में से केवल 26% ही नियमित वेतनभोगी रोजगार में हैं, और केवल 4% के पास सामाजिक सुरक्षा है।
- विनिर्माण (Manufacturing) क्षेत्र अर्थव्यवस्था में अपेक्षित भूमिका निभाने में विफल रहा है।
भारत वर्तमान में एक गहरे युवा संकट से गुजर रहा है जो केवल परीक्षा प्रणालियों में सुधार या मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग प्रदान करने से हल नहीं होगा। हालिया छात्र आंदोलनों और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद, सरकार ने डिजिटल बुनियादी ढांचे के माध्यम से मुफ्त कोचिंग का वादा किया है। हालांकि, MoSPI के आंकड़ों के अनुसार, निजी कोचिंग की लागत अब एक भारतीय परिवार के शिक्षा बजट का 16% तक पहुंच गई है, जो 2018 में 12.5% थी।
समस्या केवल कोचिंग की लागत नहीं है, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच की कमी भी है। उदाहरण के लिए, चिकित्सा प्रवेश परीक्षा में 22 लाख उम्मीदवारों ने मात्र 1.4 लाख सीटों के लिए प्रतिस्पर्धा की, जिनमें से शीर्ष 50 कॉलेजों में 10,000 से भी कम सीटें उपलब्ध हैं। यही स्थिति इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की भी है। इसी कारणवश, 2011 के बाद पहली बार, 2023-24 में स्नातक नामांकन में 93,322 की गिरावट दर्ज की गई, जिसमें उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक कमी देखी गई।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि यह संकट दोतरफा है: एक तरफ नौकरियों की तैयारी के लिए आवश्यक संसाधनों की कमी है, और दूसरी तरफ वास्तविक नौकरियों का अभाव है। यदि शिक्षा और रोजगार के बीच का यह अंतर नहीं भरा गया, तो भारत की जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) एक जनसांख्यिकीय आपदा में बदल सकती है।
रोजगार का संकट केवल कौशल की कमी नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था में विनिर्माण क्षेत्र की कमजोर उपस्थिति का परिणाम है।
आर्थिक आंकड़ों पर गौर करें तो, सरकार 6%-6.5% की विकास दर का दावा करती है, लेकिन विनिर्माण क्षेत्र अभी भी सकल मूल्य वर्धित (GVA) का केवल एक-छठा हिस्सा है। निजी निवेश में भी गिरावट आई है; कॉर्पोरेट निवेश GDP के 17.3% (2007-08) से गिरकर 10.3% (2024-25) रह गया है।
इस संकट से निपटने के लिए सरकार को केवल शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय औद्योगिक क्षमता में सार्वजनिक निवेश बढ़ाने और निर्यात-उन्मुख उद्योगों को समर्थन देने की आवश्यकता है। वियतनाम जैसे देशों ने दिखाया है कि कैसे विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत करके युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा किए जा सकते हैं।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: भारत में स्नातक नामांकन में कमी क्यों आई है?
उत्तर: अत्यधिक प्रतिस्पर्धा, उच्च कोचिंग लागत और स्नातक होने के बाद रोजगार के सीमित अवसरों के कारण स्नातक नामांकन में गिरावट देखी गई है।
प्रश्न 2: क्या मुफ्त कोचिंग युवाओं की बेरोजगारी को हल कर सकती है?
उत्तर: नहीं, मुफ्त कोचिंग केवल तैयारी में मदद कर सकती है, लेकिन यह तब तक प्रभावी नहीं होगी जब तक अर्थव्यवस्था में पर्याप्त नौकरियां पैदा नहीं की जातीं।