तमिलनाडु सरकार द्वारा ₹27,400 करोड़ की परंदूर ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा परियोजना को रद्द करने के फैसले ने राज्य के बुनियादी ढांचे और आर्थिक लक्ष्यों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • तमिलनाडु सरकार ने ₹27,400 करोड़ की परंदूर हवाई अड्डा परियोजना को रद्द कर दिया है।
  • यह निर्णय मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के चुनावी वादे और किसानों के विरोध के बाद लिया गया।
  • परियोजना के रुकने से चेन्नई के हवाई यातायात प्रबंधन और राज्य की $1.5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था के लक्ष्य पर असर पड़ सकता है।

तमिलनाडु की तमिलगा वेट्री कलगम (TVK) के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा ₹27,400 करोड़ की परंदूर ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा परियोजना को छोड़ने का निर्णय राज्य के विकास पथ के लिए एक गंभीर मोड़ साबित हो सकता है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय द्वारा जनवरी 2025 में प्रदर्शनकारियों के प्रति एकजुटता व्यक्त करने के बाद, यह निर्णय उनके चुनावी वादे को पूरा करने की दिशा में एक कदम है। सरकार का तर्क है कि यह कदम किसानों और स्थानीय निवासियों के हितों की रक्षा के लिए उठाया गया है, साथ ही पिछले डीएमके शासन के दौरान स्थल चयन के पीछे व्यावसायिक उद्देश्यों का भी आरोप लगाया गया है।

हालाँकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय केवल एक औपचारिकता मात्र था, क्योंकि आधिकारिक घोषणा से काफी पहले, 24 अगस्त से ही परियोजना का काम रुक गया था। इस फैसले से तमिलनाडु की बुनियादी ढांचा नीति में अस्थिरता का संकेत मिलता है, जो राज्य के 2036 तक $1.5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य के विपरीत है।

क्यों यह महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, इस तरह के बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का अचानक रुकना निवेशकों के विश्वास को कम कर सकता है। जबकि बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरों ने 2008 से ही अपने दूसरे हवाई अड्डों के साथ विकास की गति पकड़ ली है, चेन्नई का यात्री यातायात (2016-26 के दौरान 2.4%) अन्य महानगरों की तुलना में काफी पीछे रह गया है।

परियोजनाओं का राजनीतिकरण विकास की गति को दशकों पीछे धकेल सकता है।

परंदूर परियोजना को जुलाई 2024 में केंद्र सरकार की अंतिम मंजूरी मिल चुकी थी। हवाई अड्डों के चयन में केंद्र की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है, इसलिए इसे केवल राज्य की राजनीति तक सीमित रखना उचित नहीं है। विकास के नाम पर पर्यावरण और विस्थापन की चुनौतियां हमेशा बनी रहती हैं—जैसे एम्स्टर्डम के शिफोल हवाई अड्डे का निर्माण भी कभी एक झील के ऊपर हुआ था।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

चेन्नई में दूसरे हवाई अड्डे की आवश्यकता पिछले 25 वर्षों से महसूस की जा रही है। पूर्व में, इस परियोजना को 'बिल्ड, ऑपरेट और ट्रांसफर' (BOT) मोड पर विकसित करने के प्रस्ताव पर भी विचार किया गया था, लेकिन राजनीतिक खींचतान के कारण यह वर्षों तक लटका रहा।

चेन्नई के मौजूदा हवाई अड्डे पर क्षमता विस्तार की तत्काल आवश्यकता है। मुख्यमंत्री का टर्मिनल 5 बनाने का प्रस्ताव स्वागत योग्य है, लेकिन समस्या केवल टर्मिनलों की नहीं, बल्कि रनवे की है। 2015 की भीषण बाढ़ ने चेन्नई हवाई अड्डे के रनवे को प्रभावित किया था, जो यह दर्शाता है कि भविष्य के निर्माण में जलवायु परिवर्तन और जल प्रबंधन को प्राथमिकता देना अनिवार्य है।

Frequently Asked Questions

1. परंदूर हवाई अड्डा परियोजना क्यों रद्द की गई?
सरकार ने किसानों के हितों की रक्षा और स्थल चयन में अनियमितताओं के दावों के कारण इसे रद्द किया है।

2. इस निर्णय का चेन्नई पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
इससे हवाई यातायात प्रबंधन में दबाव बढ़ेगा और चेन्नई अन्य प्रमुख भारतीय शहरों की तुलना में पिछड़ सकता है।

Did You Know?: बेंगलुरु और हैदराबाद ने 2008 के बाद से ही अपने दूसरे हवाई अड्डों के माध्यम से भारी यात्री वृद्धि दर्ज की है।