भारत में चीनी की कीमतों में अचानक आए उछाल ने एक बड़ी बहस छेड़ दी है। क्या इथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने का डायवर्जन इस संकट का असली कारण है? विशेषज्ञों के बीच इस पर मतभेद हैं।

  • चीनी की कीमतों में पिछले एक महीने में 40% तक की वृद्धि देखी गई है।
  • गन्ना उत्पादन में कमी और इथेनॉल के लिए गन्ने के डायवर्जन पर विशेषज्ञों में मतभेद है।
  • सरकार ने चीनी के आयात और जमाखोरी के खिलाफ सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया है।

भारत में घरेलू रसोई के बजट पर चीनी की बढ़ती कीमतों ने गहरा असर डाला है। हाल ही में चीनी की कीमतें रिकॉर्ड ₹67 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गईं, जिससे आम जनता में चिंता बढ़ गई है। इस संकट के बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या सरकार की E20 इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति, जो ईंधन सुरक्षा के लिए बनाई गई थी, अब खाद्य सुरक्षा के लिए खतरा बन रही है?

कृषि अर्थशास्त्रियों के बीच इस मुद्दे पर दो स्पष्ट विचारधाराएं देखने को मिल रही हैं। ICRIER के प्रमुख अर्थशास्त्री रमेश चंद का तर्क है कि चीनी की कीमतों में उछाल का मुख्य कारण इथेनॉल नहीं, बल्कि उत्पादन में आई अचानक कमी है। उनके अनुसार, 2025-26 के लिए चीनी उत्पादन का अनुमान 34.3 मिलियन टन से घटकर 30.6 मिलियन टन रह गया है, जो लगभग 11% की गिरावट है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत वर्तमान में एक कठिन संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है: एक तरफ सड़क पर वाहनों के लिए ईंधन सुरक्षा (Fuel Security) और दूसरी तरफ रसोई के लिए खाद्य सामर्थ्य (Food Affordability)। यदि गन्ने का बड़ा हिस्सा इथेनॉल के लिए उपयोग किया जाता है, तो बाजार में चीनी की आपूर्ति कम हो जाती है, जिससे कीमतें बढ़ती हैं।

इथेनॉल के लिए गन्ने का डायवर्जन और कम उत्पादन ने मिलकर बाजार पर दबाव को और बढ़ा दिया है।

दूसरी ओर, प्रसिद्ध कृषि विशेषज्ञ अशोक गुलाटी का मानना है कि सरकार ने इस संकट को भांपने में देरी की। उनका तर्क है कि उत्पादन में गिरावट के साथ-साथ इथेनॉल के लिए गन्ने के डायवर्जन ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार को महीनों पहले ही सुधारात्मक कदम उठाने चाहिए थे।

कारक (Factor)रमेश चंद का दृष्टिकोणअशोक गुलाटी का दृष्टिकोण
मुख्य कारणउत्पादन में 11% की भारी कमीउत्पादन में कमी + इथेनॉल डायवर्जन
इथेनॉल की भूमिकायह संकट का प्राथमिक कारण नहीं हैइसने संकट को और गहरा कर दिया है
सरकारी कार्रवाईआपूर्ति की स्थिति का आकलन करना जरूरीसरकार ने चेतावनी के बावजूद देरी की

चीनी की कीमतों में इस उतार-चढ़ाव के पीछे मौसम संबंधी कारक भी महत्वपूर्ण हैं। अत्यधिक बारिश, जलभराव और 'रेड रॉट' जैसी बीमारियों ने गन्ने की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है। इसके अलावा, त्योहारों के सीजन से पहले बढ़ती मांग और कुछ व्यापारियों द्वारा की जा रही जमाखोरी ने भी कीमतों को ऊपर धकेला है।

Did You Know?: भारत सरकार का लक्ष्य पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिलाने का है, ताकि कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम की जा सके।

Frequently Asked Questions

1. क्या सरकार चीनी आयात करेगी?
हाँ, सरकार ने कच्चे चीनी के आयात की अनुमति दे दी है ताकि घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ाई जा सके।

2. इथेनॉल ब्लेंडिंग से क्या होता है?
इथेनॉल को पेट्रोल में मिलाने से ईंधन की लागत कम होती है और पर्यावरण को भी लाभ होता है, लेकिन यह गन्ने की उपलब्धता को प्रभावित कर सकता है।