नीति आयोग की नई रिपोर्ट 'Reimagining Skilling for Viksit Bharat@2047' ने भारत के कौशल विकास और रोजगार के बीच बढ़ते अंतर पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट बताती है कि कैसे करोड़ों युवा शिक्षा और रोजगार के बीच के चक्रव्यूह में फंसे हुए हैं।
- भारत में लगभग 8.7 करोड़ युवा (15-29 वर्ष) ऐसे हैं जो न तो पढ़ाई कर रहे हैं, न काम और न ही प्रशिक्षण ले रहे हैं (NEET)।
- केवल 8.25% स्नातक ही अपनी योग्यता के अनुरूप काम कर पा रहे हैं।
- कौशल विकास के प्रति सामाजिक कलंक (Social Stigma) और जानकारी का अभाव सबसे बड़ी बाधाएं हैं।
- नीति आयोग ने कक्षा 6 से ही कौशल विकास को स्कूली शिक्षा का हिस्सा बनाने का सुझाव दिया है।
नई दिल्ली स्थित नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट, 'Reimagining Skilling for Viksit Bharat@2047', भारत की जनसांख्यिकीय लाभांश (demographic dividend) की क्षमता और वास्तविकता के बीच के अंतर को उजागर करती है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत के पास एक विशाल युवा आबादी है, लेकिन एक बड़ा हिस्सा 'NEET' (Not in Education, Employment, or Training) श्रेणी में आता है। यह स्थिति देश के आर्थिक विकास के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है।
शिक्षा और रोजगार के बीच की गहरी खाई
रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा यह है कि 90% से अधिक स्नातक ऐसी नौकरियों में लगे हुए हैं जो उनकी शैक्षणिक योग्यता से मेल नहीं खातीं। केवल 8.25% स्नातक ही वास्तव में अपने डिग्री के अनुरूप कार्य कर रहे हैं। यह दर्शाता है कि हमारी वर्तमान शिक्षा प्रणाली और उद्योग की मांग के बीच एक गंभीर 'स्किल गैप' है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि यदि भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनना है, तो उसे केवल डिग्री धारक नहीं, बल्कि कुशल कार्यबल की आवश्यकता है। कौशल विकास में निवेश की कमी और गलत दिशा में किया गया प्रयास देश की उत्पादकता को प्रभावित कर सकता है।
कौशल विकास केवल प्रशिक्षण देने के बारे में नहीं है, बल्कि इसे उद्योग की वास्तविक जरूरतों और सामाजिक प्रतिष्ठा के साथ जोड़ने के बारे में है।
रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि कौशल विकास के मार्ग में पांच प्रमुख बाधाएं हैं: सूचना की कमी, मूल्य का गलत बोध, पहुंच की समस्या, धन की कमी, और सीखने के पुराने मॉडल। इसके अलावा, व्यावसायिक शिक्षा (Vocational Education) को लेकर समाज में एक गहरा कलंक है, जहाँ इसे अक्सर 'दूसरे दर्जे' का विकल्प माना जाता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और सरकारी प्रयास
भारत ने पिछले कुछ वर्षों में कौशल विकास के लिए बड़े कदम उठाए हैं। वर्ष 2014-15 से अब तक 7.67 करोड़ से अधिक लोगों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट में कौशल विकास के लिए ₹34,000 करोड़ आवंटित किए हैं। तमिलनाडु का 'नान मुधलवन' और महाराष्ट्र का 'महास्वयम' जैसे राज्य-स्तरीय कार्यक्रम इस दिशा में सराहनीय उदाहरण हैं।
| श्रेणी | NEET स्थिति (अनुमानित) |
|---|---|
| महिलाएं | 47% |
| युवा (कुल) | 43% |
| उच्च शिक्षा छात्र | 36% |
Frequently Asked Questions
1. NEET क्या है?
NEET का अर्थ है वे युवा जो न तो शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, न ही कार्यरत हैं और न ही किसी प्रशिक्षण में शामिल हैं।
2. नीति आयोग का मुख्य सुझाव क्या है?
नीति आयोग ने सुझाव दिया है कि कौशल विकास को स्कूल स्तर (कक्षा 6 से) से ही शुरू कर देना चाहिए ताकि छात्र भविष्य के लिए तैयार हो सकें।