KPMG की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद भारत का प्राइवेट इक्विटी (PE) बाजार $15.8 बिलियन के निवेश के साथ लचीला बना हुआ है। निवेशक अब उच्च विकास वाले और लाभदायक व्यवसायों, विशेष रूप से पारिवारिक व्यवसायों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

  • भारत में Q2 2026 के अंत तक PE निवेश $15.8 बिलियन तक पहुंच गया है।
  • हेल्थकेयर, वित्तीय सेवाओं और उपभोक्ता वस्तुओं में निवेशकों की भारी दिलचस्पी है।
  • निवेशक अब बड़े प्लेटफॉर्म बनाने के लिए व्यवसायों के एकीकरण (Consolidation) पर ध्यान दे रहे हैं।

KPMG की नवीनतम 'पल्स ऑफ प्राइवेट इक्विटी' रिपोर्ट के अनुसार, भारत का प्राइवेट इक्विटी (PE) बाजार वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों और ऊर्जा संबंधी अनिश्चितताओं के बावजूद अत्यंत लचीला बना हुआ है। वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही के अंत तक, भारत में निवेश $15.8 बिलियन तक पहुंच गया है, जो देश के मजबूत आर्थिक आधार को दर्शाता है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2025 में भारत में PE निवेश $31.8 बिलियन रहा था। हालांकि सौदों की संख्या में कुछ कमी आई है, लेकिन हेल्थकेयर, फार्मास्यूटिकल्स, वित्तीय सेवाओं (बैंक और बीमा), उपभोक्ता वस्तुओं और सटीक विनिर्माण (Precision Manufacturing) जैसे क्षेत्रों ने निवेशकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।

निवेशकों की बदलती रणनीति

वर्तमान में निवेशक केवल विकास ही नहीं, बल्कि लाभप्रदता और मजबूत नकदी प्रवाह (Cash Flow) वाले व्यवसायों की तलाश कर रहे हैं। एक महत्वपूर्ण बदलाव यह देखा जा रहा है कि निवेशक अब पारिवारिक स्वामित्व वाले उद्यमों (Family-owned enterprises) को प्रमुख लक्ष्य बना रहे हैं।

"भारतीय प्राइवेट इक्विटी निवेशक अब उच्च विकास वाले व्यवसायों की तलाश कर रहे हैं जिनमें मजबूत लाभप्रदता और नकदी प्रवाह हो," KPMG इंडिया के पार्टनर और नेशनल लीडर - प्राइवेट इक्विटी, नितिश पोद्दार ने कहा।

नितिश पोद्दार के अनुसार, उत्तराधिकार (Succession) से जुड़ी चुनौतियां और विकास की बाधाओं का सामना कर रहे व्यवसाय भी PE निवेशकों के आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं। निवेशक अब अलग-अलग संपत्तियों को मिलाकर बड़े प्लेटफॉर्म बनाने की रणनीति अपना रहे हैं ताकि 'इकोनॉमी ऑफ स्केल' का लाभ उठाया जा सके और मूल्य सृजन किया जा सके।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत का PE परिदृश्य अब केवल पूंजी निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संरचनात्मक सुधारों की ओर बढ़ रहा है। व्यवसायों का एकीकरण और पारिवारिक उद्यमों का संस्थागतकरण भारतीय अर्थव्यवस्था में दीर्घकालिक स्थिरता लाएगा।

वैश्विक परिदृश्य का तुलनात्मक विवरण

क्षेत्र (Region)निवेश (बिलियन डॉलर)सौदों की संख्या
अमेरिका (Americas)$579.14,219
EMEA (यूरोप, मध्य पूर्व, अफ्रीका)$343.24,067
ASPAC (एशिया प्रशांत)$67.9639
Did You Know?: वैश्विक स्तर पर तकनीक, मीडिया और दूरसंचार (TMT) क्षेत्र PE पूंजी प्राप्त करने वाला सबसे बड़ा क्षेत्र बना हुआ है।

Frequently Asked Questions

1. भारत में किन क्षेत्रों में सबसे अधिक निवेश हो रहा है?
मुख्य रूप से हेल्थकेयर, फार्मा, वित्तीय सेवाएं और कंज्यूमर गुड्स में निवेश बढ़ रहा है।

2. निवेशक पारिवारिक व्यवसायों में क्यों रुचि ले रहे हैं?
उत्तराधिकार नियोजन और विकास की बाधाओं को दूर करने के लिए PE फर्म इन व्यवसायों को बड़े प्लेटफॉर्म में बदलने के अवसर देखती हैं।