कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने NCLT द्वारा सुभाष चंद्र के लिए स्वीकृत निपटान योजना की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने अरबपतियों और आम जनता के लिए दो अलग-अलग कानून बना दिए हैं।
- NCLT ने सुभाष चंद्र को ₹22,006 करोड़ के बदले मात्र ₹6.5 करोड़ चुकाने की अनुमति दी है।
- राहुल गांधी ने इसे 'नेता-कंपनी लूट ट्रिब्यूनल' करार देते हुए सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया।
- कांग्रेस नेताओं ने इस निपटान को 'हेयरकट' नहीं बल्कि 'मुंडन' बताया है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर देश में 'दोहरे सिस्टम' चलाने का गंभीर आरोप लगाया। यह विवाद तब गहराया जब नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने उद्योगपति सुभाष चंद्र के लिए एक समाधान योजना को मंजूरी दी, जिसके तहत उन्हें ₹22,006 करोड़ के बकाया ऋण के बदले केवल ₹6.5 करोड़ का भुगतान करना होगा।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए NCLT का मज़ाक उड़ाते हुए इसे 'नेता-कंपनी लूट ट्रिब्यूनल' कहा। उन्होंने आम आदमी की पीड़ा और उद्योगपतियों को मिलने वाली राहत के बीच के अंतर को रेखांकित किया। गांधी ने कहा, "यदि कोई किसान 50 हजार रुपये नहीं चुका पाता है, तो उसकी जमीन नीलाम कर दी जाती है। यदि कोई वेतनभोगी व्यक्ति एक ईएमआई भी चूक जाता है, तो बैंक के गुंडे उसके घर पहुंच जाते हैं।"
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल एक ऋण निपटान का नहीं है, बल्कि यह भारत की बैंकिंग प्रणाली की अखंडता और विनियामक ढांचे (Regulatory Framework) पर सवाल उठाता है। जब ऋणदाताओं को उनके मूल धन का 99.97% हिस्सा छोड़ना पड़ता है, तो यह भविष्य के ऋणों की लागत और बैंकिंग स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।
"यह निपटान दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC) का मजाक उड़ाने जैसा है, जहाँ ऋणदाताओं को लगभग पूरी राशि खोनी पड़ रही है।"
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इस प्रक्रिया की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह केवल एक 'हेयरकट' (ऋण में कटौती) नहीं है, बल्कि यह 'मुंडन' के समान है। उन्होंने तर्क दिया कि यह दिवाला और दिवालियापन संहिता, 2016 का पूर्ण उपहास है। वहीं, रणदीप सिंह सुरजेवाला ने इसे 'हेयरकट' के नाम पर उद्योगपतियों के लिए 'ऋण माफी' करार दिया।
सुरजेवाला ने वित्त मंत्री से मांग की है कि वे पिछले 12 वर्षों में NCLT की कार्यवाही के माध्यम से बैंकों को हुए कुल नुकसान का खुलासा करें। उन्होंने दावा किया कि यह आंकड़ा ₹10 लाख करोड़ से भी अधिक हो सकता है।
Frequently Asked Questions
1. सुभाष चंद्र के मामले में NCLT का फैसला क्या है?
NCLT ने ₹22,006.57 करोड़ के कुल दावे के मुकाबले ₹6.5 करोड़ के भुगतान की अनुमति दी है।
2. 'हेयरकट' शब्द का बैंकिंग में क्या अर्थ है?
जब कोई कर्जदार अपना पूरा कर्ज नहीं चुका पाता और बैंक कुछ हिस्सा छोड़ देता है, तो उस छोड़ी गई राशि को 'हेयरकट' कहा जाता है।
| विवरण | मूल बकाया राशि | स्वीकृत निपटान राशि | कुल हेयरकट (%) |
|---|---|---|---|
| सुभाष चंद्र मामला | ₹22,006.57 करोड़ | ₹6.5 करोड़ | ~99.97% |