पुणे के बीएआईएफ (BAIF) शोध केंद्र में चल रहे प्रयोगों से पता चला है कि सौर पैनलों के नीचे खेती करने से फसलों की पैदावार और किसानों की आय दोनों बढ़ सकती हैं।

  • एग्रीवोल्टाइक्स तकनीक में सौर पैनलों के नीचे विभिन्न फसलें उगाई जा रही हैं।
  • पैनलों की ऊंचाई और संरचना का फसलों की पैदावार पर सीधा असर पड़ता है।
  • पालक और धनिया जैसी फसलों की पैदावार में 100% तक की वृद्धि देखी गई है।
  • यह तकनीक किसानों को कृषि और बिजली उत्पादन दोनों से दोहरा लाभ देगी।

महाराष्ट्र के पुणे जिले के उरुली कांचन में स्थित BAIF ग्रामीण नवाचार केंद्र में एक क्रांतिकारी प्रयोग चल रहा है। शोधकर्ता इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या एक ही खेत का उपयोग फसल उगाने और सौर ऊर्जा उत्पन्न करने, दोनों के लिए प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। इस 'एग्रीवोल्टाइक्स' (Agrivoltaics) परियोजना के तहत 17 प्रकार के सौर पैनल इंस्टालेशन और 30 विभिन्न फसलों का परीक्षण किया जा रहा है।

पारंपरिक जमीन पर लगे सौर पैनलों के विपरीत, शोधकर्ता ऊर्ध्वाधर (vertical) और ऊंचे ढांचे (elevated structures) का परीक्षण कर रहे हैं। कुछ पैनलों को चार मीटर की ऊंचाई तक उठाया गया है ताकि उनके नीचे से ट्रैक्टर और अन्य कृषि मशीनरी आसानी से गुजर सकें। इसके अलावा, सौर पैनलों को पॉलीहाउस, पशु शेड और पोल्ट्री शेड के साथ भी एकीकृत किया जा रहा है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि जैसे-जैसे जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम अनिश्चित हो रहा है, एग्रीवोल्टाइक्स जैसी तकनीकें किसानों के लिए सुरक्षा कवच बन सकती हैं। सौर पैनल न केवल बिजली देते हैं, बल्कि अत्यधिक गर्मी और बेमौसम बारिश से फसलों को सुरक्षा भी प्रदान करते हैं।

"हमारा उद्देश्य यह समझना है कि कृषि भूमि का उपयोग खेती और सौर ऊर्जा उत्पादन दोनों के लिए कैसे किया जा सकता है," बीएआईएफ के मुख्य कार्यक्रम कार्यकारी विट्ठल कौथाले ने कहा।

प्रारंभिक परिणाम काफी उत्साहजनक हैं। शोधकर्ताओं ने पाया है कि खरीफ सीजन के दौरान, पालक, लेट्यूस और धनिया जैसी फसलों की पैदावार नियंत्रित भूखंडों की तुलना में 100 प्रतिशत अधिक रही है। हालांकि, बैंगन जैसी फसलों की पैदावार में कमी देखी गई है। यह अंतर पैनलों की ऊंचाई, उनके बीच की दूरी और फसल की प्रकृति पर निर्भर करता है।

फसल का प्रकारसौर संरचना का प्रकारप्रभाव/परिणाम
मूली और बीन्सलंबवत (Vertical) पैनलउपयुक्त पाया गया
केला और पपीताऊंचे (Elevated) पैनलअधिक उपयुक्त
पालक और धनियाछायादार पैनल100% अधिक पैदावार
बैंगनछायादार पैनल80% पैदावार (कमी)

ऐतिहासिक रूप से, भारत में सौर ऊर्जा का ध्यान केवल बड़े सौर पार्कों पर रहा है। लेकिन बीएआईएफ का यह अध्ययन नीति निर्माताओं को PM-KUSUM जैसी योजनाओं के तहत एग्रीवोल्टाइक्स के लिए सब्सिडी और सहायता तंत्र विकसित करने में मदद कर सकता है। बीएआईएफ, जिसकी स्थापना 1967 में मनीभाई देसाई द्वारा की गई थी, अब 2030 तक एक करोड़ परिवारों तक पहुंचने का लक्ष्य रख रही है।

Did You Know?: एग्रीवोल्टाइक्स तकनीक में पैनलों से होने वाला वाष्पीकरण कम होता है, जिससे मिट्टी में नमी अधिक समय तक बनी रहती है।

Frequently Asked Questions

1. एग्रीवोल्टाइक्स क्या है?
यह एक ऐसी तकनीक है जिसमें एक ही भूमि पर सौर ऊर्जा उत्पादन और कृषि दोनों गतिविधियां एक साथ की जाती हैं।

2. क्या इससे फसलों को नुकसान होता है?
यह फसल पर निर्भर करता है। कुछ फसलों को छाया से लाभ होता है, जबकि कुछ को अधिक धूप की आवश्यकता होती है।