मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की विशाल युवा आबादी को 'डेमोग्राफिक डिविडेंड' बताते हुए कहा कि सरकार उन्हें कौशल प्रदान कर आर्थिक शक्ति बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने राज्य में स्टार्टअप्स की संख्या 120 से बढ़ाकर 24,000 से अधिक करने की उपलब्धि पर भी प्रकाश डाला।
- यूपी की 25 करोड़ आबादी को सरकार 'जनसांख्यिकीय लाभांश' (Demographic Dividend) मान रही है।
- राज्य में स्टार्टअप्स की संख्या 120 (2017 से पहले) से बढ़कर अब 24,000 के पार पहुंच गई है।
- मुख्यमंत्री ने 107 स्टार्टअप्स और 9 इनक्यूबेटरों को ₹5.21 करोड़ के प्रोत्साहन वितरित किए।
- उत्तर प्रदेश का लक्ष्य देश के कुल स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र में 20% हिस्सेदारी हासिल करना है।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को राज्य की विशाल आबादी को लेकर एक दूरदर्शी दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ से अधिक की आबादी कोई बोझ या चुनौती नहीं है, बल्कि यह एक 'डेमोग्राफिक डिविडेंड' है, जिसे सही कौशल और मंच प्रदान करके राज्य की आर्थिक शक्ति बनाया जा सकता है।
लखनऊ में युवा उद्यमियों और उद्योग प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास दुनिया का सबसे प्रतिभाशाली और ऊर्जावान युवा कार्यबल है। उन्होंने राज्य सरकार की जिम्मेदारी को रेखांकित करते हुए कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य इन युवाओं को वह कौशल प्रदान करना है जिससे वे वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी पहचान बना सकें।
स्टार्टअप इकोसिस्टम में अभूतपूर्व वृद्धि
मुख्यमंत्री ने आंकड़ों के माध्यम से राज्य के बदलते स्वरूप को प्रदर्शित किया। उन्होंने बताया कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में केवल 120 स्टार्टअप थे, जो अब बढ़कर 24,000 से अधिक हो गए हैं। इनमें से 8 स्टार्टअप्स ने 'यूनिकॉर्न' का दर्जा प्राप्त कर लिया है। इस वृद्धि का श्रेय उन्होंने राज्य की स्टार्टअप नीति और संस्थागत समर्थन को दिया।
इस कार्यक्रम के दौरान, मुख्यमंत्री ने 107 स्टार्टअप्स को ₹3.42 करोड़ और नौ इनक्यूबेटरों को ₹1.79 करोड़ के प्रोत्साहन राशि वितरित की। इसके साथ ही उन्होंने 'उत्तर प्रदेश स्टार्टअप पॉलिसी 2026' की पुस्तिका और 'उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन पोर्टल' का भी शुभारंभ किया।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि उत्तर प्रदेश अपनी विशाल जनसंख्या को उत्पादक शक्ति में बदलने के लिए एक रणनीतिक बदलाव कर रहा है। यदि राज्य अपनी जनसंख्या के अनुपात (देश का 1/6 हिस्सा) के बराबर स्टार्टअप हिस्सेदारी (20%) प्राप्त कर लेता है, तो यह भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।
"जनसंख्या को चुनौती के रूप में देखना पुरानी सोच है; इसे कौशल के साथ जोड़ना ही भविष्य की असली ताकत है।"
मुख्यमंत्री ने महिलाओं की भागीदारी पर भी जोर दिया और कहा कि 'आधी आबादी' स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र का आधा हिस्सा चला रही है। उन्होंने अतीत की तुलना करते हुए कहा कि 2017 से पहले कानून-व्यवस्था की स्थिति ऐसी थी कि नवाचार और उद्यमिता की चर्चा करना भी एक सपना मात्र था।
तकनीकी नवाचार और भविष्य की तैयारी: योगी आदित्यनाथ ने विश्वविद्यालयों से पारंपरिक पाठ्यक्रमों से आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सरकार क्वांटम कंप्यूटिंग, स्पेस टेक्नोलॉजी, ड्रोन टेक्नोलॉजी, रोबोटिक्स और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे उभरते क्षेत्रों में अनुसंधान के लिए पूरी तरह तैयार है। IIT कानपुर, IIT-BHU और SGPGI जैसे संस्थान इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
Frequently Asked Questions
1. उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य राज्य में नवाचार को बढ़ावा देना, स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता प्रदान करना और युवाओं को उद्यमी बनाने के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना है।
2. यूपी सरकार स्टार्टअप्स को क्या सहायता दे रही है?
सरकार स्टार्टअप पॉलिसी के तहत वित्तीय प्रोत्साहन, इनक्यूबेशन सुविधाएं और 'फंड ऑफ फंड्स' के माध्यम से निवेश सहायता प्रदान कर रही है।