तेलंगाना कृषि और किसान कल्याण आयोग ने राज्य में जल दक्षता बढ़ाने के लिए एक समर्पित लघु सिंचाई प्रणाली के पुनरुद्धार की सिफारिश की है। आयोग ने टैंकों के संरक्षण और आधुनिक प्रबंधन प्रणालियों को लागू करने पर जोर दिया है।
- लघु सिंचाई प्रणाली को आधुनिक तकनीक के साथ पुनर्जीवित करने का प्रस्ताव।
- जल संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए 'कमांड-एरिया' आधारित प्रबंधन प्रणाली की सिफारिश।
- राज्य में तालाबों के संरक्षण के लिए एक अलग 'लघु सिंचाई अधिनियम' की मांग।
- तालाबों की एफटीएल (Full Tank Level) सीमाओं का सीमांकन और अतिक्रमण हटाना।
हैदराबाद: तेलंगाना कृषि और किसान कल्याण आयोग ने राज्य सरकार को एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें कृषि स्थिरता और जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लघु सिंचाई प्रणाली (Minor Irrigation System) के पूर्ण पुनरुद्धार की सिफारिश की गई है। आयोग के अध्यक्ष कोडांडा रेड्डी के नेतृत्व में, सदस्यों ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी को सौंपे गए इस प्रस्ताव में तकनीक-संचालित इकाइयों के माध्यम से जल उपयोग दक्षता में सुधार लाने पर बल दिया है।
आयोग का मुख्य सुझाव यह है कि लघु और प्रमुख सिंचाई संसाधनों को एकीकृत करने के लिए 'कमांड-एरिया' आधारित प्रबंधन प्रणालियों की स्थापना की जाए। इससे उपलब्ध पानी का अधिक कुशलता से उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा। इसके अलावा, राज्य में तालाबों के प्रभावी प्रबंधन और सुरक्षा के लिए एक अलग 'लघु सिंचाई अधिनियम' (Minor Irrigation Act) लागू करने का भी प्रस्ताव दिया गया है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि तेलंगाना जैसे कृषि प्रधान राज्य में, जहाँ भूजल स्तर और मौसमी वर्षा पर अत्यधिक निर्भरता है, पारंपरिक जल निकायों का संरक्षण जीवन रेखा के समान है। लघु सिंचाई प्रणाली को आधुनिक तकनीक से जोड़ने से न केवल खेती की लागत कम होगी, बल्कि सूखे जैसी स्थितियों में किसानों को अधिक लचीलापन भी मिलेगा।
पारंपरिक जल निकायों का सुदृढ़ीकरण न केवल भूजल स्तर को सुधारने के लिए आवश्यक है, बल्कि यह ग्रामीण आजीविका को स्थिर करने का भी एक प्रमुख साधन है।
रिपोर्ट में तालाबों के Full Tank Level (FTL) सीमाओं की पहचान और सीमांकन करने, अतिक्रमण हटाने और टैंक क्षेत्रों की प्रभावी सुरक्षा करने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया गया है। आयोग का मानना है कि तालाबों का बहाली और संरक्षण तेलंगाना में जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने आयोग की सिफारिशों का स्वागत करते हुए सुझाव दिया कि सरकार को फसल विविधीकरण, बागवानी को बढ़ावा देने और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को मजबूत करने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उनका लक्ष्य कृषि को अधिक टिकाऊ बनाना और किसानों की आय में वृद्धि करना है।
Historical Background
तेलंगाना में पारंपरिक सिंचाई प्रणाली ऐतिहासिक रूप से तालाबों और नहरों पर आधारित रही है। हालांकि, शहरीकरण और अतिक्रमण के कारण कई जल निकाय अपनी क्षमता खो चुके हैं। आयोग का यह कदम सदियों पुरानी जल प्रबंधन परंपराओं को 21वीं सदी की तकनीक के साथ जोड़ने का एक प्रयास है।
Frequently Asked Questions
1. आयोग ने सिंचाई के लिए क्या मुख्य सुझाव दिया है?
आयोग ने आधुनिक तकनीक का उपयोग करके लघु सिंचाई प्रणाली को पुनर्जीवित करने और कमांड-एरिया आधारित प्रबंधन प्रणाली बनाने का सुझाव दिया है।
2. तालाबों के संरक्षण के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए?
तालाबों की एफटीएल सीमाओं का सीमांकन करना, अतिक्रमण हटाना और एक विशेष लघु सिंचाई अधिनियम लाना आवश्यक है।