आंध्र प्रदेश के पर्वतपुरम-मण्यम जिले में हालिया बारिश के बाद कृषि गतिविधियों में तेजी आई है। नागवल्ली और सुवर्णमुखी जैसी प्रमुख नदियों के जलग्रहण क्षेत्रों में अच्छी बारिश होने से किसानों में नई उम्मीद जगी है।

  • आंध्र प्रदेश-ओडिशा सीमा पर भारी बारिश से नदियों के जलस्तर में सुधार।
  • 80,000 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में धान, गन्ना और मसालों की खेती की संभावना।
  • सरकार द्वारा 268 रयथु सेवा केंद्रों के माध्यम से उर्वरक आपूर्ति सुनिश्चित।

आंध्र प्रदेश के पर्वतपुरम-मण्यम जिले में कृषि परिदृश्य में एक सकारात्मक बदलाव देखा जा रहा है। हाल ही में आंध्र प्रदेश और ओडिशा सीमा पर स्थित नदी जलग्रहण क्षेत्रों में हुई मध्यम से भारी वर्षा ने जिले की कृषि गतिविधियों को पुनर्जीवित कर दिया है। लंबे समय से सूखे और अल नीनो (El Nino) के प्रभाव के कारण किसान सिंचाई की कमी से डरे हुए थे, लेकिन अब स्थिति बदलती नजर आ रही है।

क्षेत्र की प्रमुख नदियाँ, जिनमें नागवल्ली, सुवर्णमुखी, वेगावती और गोमुखी शामिल हैं, जो पहाड़ी और मैदानी दोनों क्षेत्रों से होकर बहती हैं, उनके जलग्रहण क्षेत्रों में पर्याप्त वर्षा दर्ज की गई है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सितंबर और अक्टूबर के महीनों में कृषि गतिविधियों में और अधिक तेजी आने की उम्मीद है, क्योंकि विभाग नहरों के माध्यम से खेतों तक पानी छोड़ने की तैयारी कर रहा है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि पर्वतपुरम-मण्यम जैसे कृषि प्रधान जिलों में वर्षा का पैटर्न सीधे तौर पर स्थानीय अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा को प्रभावित करता है। अल नीनो के कारण पहले वर्षा में 31% की कमी का अनुमान लगाया गया था, लेकिन वर्तमान सुधार ने किसानों के घाटे को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

नदियों के जलस्तर में यह सुधार न केवल फसलों की सुरक्षा करेगा, बल्कि जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगा।

जिले में लगभग 80,000 हेक्टेयर कृषि भूमि है, जहाँ किसान धान, गन्ना, मक्का, मूंगफली, दलहन, काजू, हल्दी और अदरक जैसी विविध फसलें उगाते हैं। पर्वतपुरम कलेक्टर एन. प्रभाकर रेड्डी ने कृषि विभाग को निर्देश दिए हैं कि वे बढ़ते कृषि कार्यों को देखते हुए उर्वरकों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करें। इसके लिए जिले के विभिन्न हिस्सों में स्थापित 268 रयथु सेवा केंद्रों का उपयोग किया जा रहा है।

जनजातीय कल्याण मंत्री गुम्माडी संध्या रानी ने पिछले वर्ष के 5,50,921 मीट्रिक टन कृषि उत्पादन का उल्लेख करते हुए आशा व्यक्त की कि इस वर्ष भी उत्पादन में सुधार होगा। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि वे धान और गन्ने जैसे अधिक पानी की खपत वाली फसलों के बजाय कम पानी वाली व्यावसायिक फसलों को प्राथमिकता दें।

Did You Know?: पर्वतपुरम-मण्यम जिला अपनी विविध भौगोलिक संरचना के कारण कई महत्वपूर्ण नदियों का आधार है, जो कृषि के लिए जीवन रेखा का काम करती हैं।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: जिले में उर्वरकों की आपूर्ति कैसे की जा रही है?
उत्तर: जिले के विभिन्न हिस्सों में स्थापित 268 रयथु सेवा केंद्रों के माध्यम से उर्वरकों की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।

प्रश्न 2: किसानों को किस प्रकार की फसलें उगाने की सलाह दी गई है?
उत्तर: मंत्री गुम्माडी संध्या रानी ने किसानों को कम पानी वाली व्यावसायिक फसलों को चुनने की सलाह दी है।