इक्विरस ग्रुप के ट्रेडिंग प्रमुख तेजस शाह ने SEBI द्वारा लागू किए गए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) को सही दिशा में उठाया गया कदम बताया है, लेकिन इसके समय पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय बाजार अभी इस जटिल प्रणाली के लिए पूरी तरह परिपक्व नहीं हुआ है।
- SEBI का नया क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) विकसित बाजारों की तर्ज पर लाया गया है।
- इक्विरस ग्रुप के अनुसार, भारतीय बाजार अभी इस तंत्र के लिए पर्याप्त परिपक्व नहीं है।
- वर्तमान में कम वॉल्यूम का मुख्य कारण बाजार में मौजूद 'ब्लाइंड स्पॉट' और अनिश्चितता है।
- डेरिवेटिव्स मार्केट और CAS के बीच समय का अंतर बाजार में अस्थिरता पैदा कर सकता है।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा हाल ही में लागू किया गया क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) तंत्र वित्तीय जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है। इक्विरस ग्रुप के ट्रेडिंग प्रमुख, तेजस शाह ने इस बदलाव पर एक महत्वपूर्ण विश्लेषण प्रस्तुत किया है। उनका मानना है कि हालांकि यह कदम बाजार को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में सही है, लेकिन इसे लागू करने का समय शायद सही नहीं था।
शाह के अनुसार, भारत में पहले VWAP (वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस) प्रणाली का उपयोग किया जाता था, जिसमें पिछले 30 मिनटों के औसत मूल्य के आधार पर क्लोजिंग प्राइस तय होता था। लेकिन 'जेन स्ट्रीट' जैसी घटनाओं के बाद, यह महसूस किया गया कि बड़े खिलाड़ी भारी मात्रा में ट्रेड करके इस प्रणाली को अपने पक्ष में मोड़ सकते हैं। CAS को इसी खामी को दूर करने के लिए लाया गया है, जो अमेरिका और यूके जैसे विकसित बाजारों की तर्ज पर काम करता है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि यह बदलाव केवल एक तकनीकी सुधार नहीं है, बल्कि बाजार की संरचना में एक बड़ा बदलाव है। यदि क्लोजिंग प्राइस का निर्धारण अधिक लोकतांत्रिक तरीके से होता है, तो यह संस्थागत निवेशकों और खुदरा निवेशकों के बीच के अंतर को कम कर सकता है। हालांकि, वर्तमान में कम वॉल्यूम और 'ब्लाइंड स्पॉट' के कारण बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।
'क्लोजिंग ऑक्शन सेशन अभी विकसित हो रहा है, इसलिए इसकी तुलना पिछली VWAP प्रणाली से करना कठिन है।' - तेजस शाह
वर्तमान में CAS के दौरान वॉल्यूम कम देखा जा रहा है। इसका मुख्य कारण यह है कि ट्रेडिंग का एक हिस्सा 'पर्दे के पीछे' (behind the scenes) होता है, जिससे व्यापारियों को यह स्पष्ट नहीं होता कि उनका ऑर्डर किस कीमत पर मैच होगा। विशेष रूप से आर्बिट्राज और प्रॉप ट्रेडिंग फर्में अभी इस व्यवस्था से दूर हैं क्योंकि उन्हें डेरिवेटिव्स मार्केट में हेजिंग करने के लिए पर्याप्त समय और दृश्यता नहीं मिल रही है।
CAS बनाम VWAP: एक तुलना
| विशेषता | पुरानी VWAP प्रणाली | नई CAS प्रणाली |
|---|---|---|
| मूल्य निर्धारण | पिछले 30 मिनट का औसत | ऑक्शन आधारित (ऑर्डर मैचिंग) |
| हेरफेर की संभावना | उच्च (बड़े ट्रेडों के माध्यम से) | कम (अधिक लोकतांत्रिक) |
| पारदर्शिता | मध्यम | उच्च (लेकिन अभी सीखने की प्रक्रिया में) |
एक अन्य महत्वपूर्ण चिंता डेरिवेटिव्स मार्केट और CAS के बीच का समय अंतराल है। CAS 3:30 बजे समाप्त हो जाता है, जबकि डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग 3:40 बजे तक चलती है। इस 10 मिनट के अंतर में डेरिवेटिव्स में भारी उतार-चढ़ाव आ सकता है, जबकि अंतर्निहित (underlying) स्टॉक का ट्रेडिंग बंद हो चुका होता है।
Frequently Asked Questions
1. CAS का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य क्लोजिंग प्राइस के निर्धारण में हेरफेर को रोकना और अधिक पारदर्शी मूल्य खोज (price discovery) सुनिश्चित करना है।
2. वर्तमान में वॉल्यूम कम क्यों है?
बाजार के प्रतिभागियों को नई प्रणाली के साथ तालमेल बिठाने में समय लग रहा है और 'ब्लाइंड स्पॉट' के कारण जोखिम अधिक है।