भारत सरकार ने सेमीकॉन 2.0 योजना को आधिकारिक तौर पर लागू कर दिया है, जिसके तहत ₹1,27,500 करोड़ का आवंटन किया गया है। इस योजना का लक्ष्य चिप डिजाइन से लेकर उन्नत पैकेजिंग तक एक संपूर्ण स्वदेशी इकोसिस्टम विकसित करना है।
- सेमीकॉन 2.0 योजना के लिए ₹1,27,500 करोड़ का कुल वित्तीय परिव्यय।
- सिलिकॉन फैब्स के लिए 40% और कंपाउंड/डिस्प्ले फैब्स के लिए 35% वित्तीय सहायता।
- स्टार्टअप्स के लिए अनुदान और इक्विटी सह-निवेश के रूप में सहायता।
- डिजाइन, IP, उपकरण और उन्नत पैकेजिंग (ATMP/OSAT) पर विशेष ध्यान।
भारत सरकार ने सोमवार को सेमीकॉन 2.0 योजना को अधिसूचित कर दिया है, जिससे ₹1,27,500 करोड़ की उस महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत हो गई है जो भारत के सेमीकंडक्टर लक्ष्यों को गहरा करने का प्रयास करती है। इस योजना का उद्देश्य केवल चिप निर्माण तक सीमित न रहकर एक 'फुल-स्टैक' इकोसिस्टम बनाना है, जिसमें स्वदेशी डिजाइन, बौद्धिक संपदा (IP), उपकरण, सामग्री, उन्नत पैकेजिंग, अनुसंधान और विकास (R&D) और प्रतिभा विकास शामिल हैं।
यह कदम ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर्स एक महत्वपूर्ण रणनीतिक संसाधन बन गए हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव ने उन्नत चिप्स और मेमोरी की मांग को अभूतपूर्व स्तर पर पहुंचा दिया है। साथ ही, आपूर्ति श्रृंखला की कमजोरियों और बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों ने वैश्विक कंपनियों को उत्पादन केंद्रों के विविधीकरण के लिए प्रेरित किया है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि सेमीकॉन 2.0 केवल सब्सिडी के बारे में नहीं है, बल्कि यह भारत की तकनीकी संप्रभुता के लिए एक मजबूत आधार तैयार करने के बारे में है। चिप-डिजाइन स्टार्टअप्स से लेकर भारी निवेश वाले सिलिकॉन फैब्स तक, सरकार उद्योग के हर स्तर को लक्षित कर रही है ताकि भारत इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में एक वैश्विक केंद्र बन सके।
"इस योजना का उद्देश्य आत्मनिर्भरता और एक वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी उद्योग को बढ़ावा देना है, ताकि भारत केवल उपभोक्ता नहीं बल्कि निर्माता बने।"
योजना की वित्तीय संरचना को बहुत बारीकी से तैयार किया गया है। वाणिज्यिक क्षेत्र के लिए चिप डिजाइन के मामले में, पात्रता केवल स्टार्टअप्स और भारतीय नागरिकों या OCI (ओवरसीज सिटीजन्स ऑफ इंडिया) के स्वामित्व वाली कंपनियों तक सीमित होगी। स्टार्टअप्स के लिए वित्तीय सहायता अनुदान और इक्विटी सह-निवेश के रूप में होगी, जबकि कंपनियों के लिए यह रॉयल्टी फाइनेंसिंग या इक्विटी सह-निवेश के रूप में होगी।
बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए, सरकार पूंजीगत व्यय (Capex) पर भारी सहायता दे रही है। सिलिकॉन फैब्स के लिए 40% वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी, जबकि कंपाउंड, डिस्प्ले (LCD, OLED, micro LED) और अन्य विशेष फैब्स के लिए यह 35% होगी। इसके अलावा, ATMP/OSAT (असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग) के लिए उन्नत पैकेजिंग पर 35% और पारंपरिक पैकेजिंग पर 25% प्रोत्साहन दिया जाएगा।
| सुविधा का प्रकार | वित्तीय सहायता / प्रोत्साहन |
|---|---|
| सिलिकॉन फैब्स | Capex का 40% |
| कंपाउंड/डिस्प्ले फैब्स | Capex का 35% |
| उन्नत पैकेजिंग (ATMP) | Capex का 35% |
| पारंपरिक पैकेजिंग | Capex का 25% |
यह योजना पहले चरण की सफलता पर आधारित है, जिसके तहत छह राज्यों में 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दी गई थी। माइक्रोन (Micron) का ATMP प्लांट, केन्स सेमीकॉन और सीजी सेमी OSAT जैसी सुविधाएं पहले ही व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर चुकी हैं, जो सेमीकॉन 2.0 के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: सेमीकॉन 2.0 के तहत चिप डिजाइन प्रोत्साहन के लिए कौन पात्र है?
उत्तर: केवल स्टार्टअप्स और भारतीय नागरिकों या OCI धारकों के स्वामित्व वाली कंपनियां ही इसके लिए पात्र हैं।
प्रश्न 2: स्टार्टअप्स और स्थापित कंपनियों के लिए सहायता किस प्रकार अलग है?
उत्तर: स्टार्टअप्स को अनुदान और इक्विटी सह-निवेश मिलता है, जबकि स्थापित कंपनियों को रॉयल्टी फाइनेंसिंग या इक्विटी सह-निवेश का विकल्प दिया जाता है।