ICAR-CPCRI इस वर्ष के विश्व नारियल दिवस पर 'SHITIZ 2.0' कार्यक्रम और जलवायु-लचीली कृषि तकनीकों को लॉन्च करेगा। इसका मुख्य उद्देश्य अनिश्चित जलवायु परिस्थितियों में खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
- ICAR-CPCRI द्वारा 'SHITIZ 2.0' ऑनलाइन उद्यमिता मेंटरशिप कार्यक्रम की शुरुआत।
- जलवायु परिवर्तन और एल नीनो (El Niño) के प्रभावों से निपटने के लिए दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन।
- नारियल क्षेत्र में नवाचार के लिए नए मूल्यवर्धित उत्पादों और तकनीकी प्रकाशनों का विमोचन।
केसरगोड स्थित ICAR-केंद्रीय वृक्षारोपण फसल अनुसंधान संस्थान (ICAR-CPCRI) आगामी बुधवार को विश्व नारियल दिवस मनाएगा। इस वर्ष की थीम 'अनिश्चितता के समय में नारियल: भोजन, ऊर्जा और आजीविका की सुरक्षा' रखी गई है, जो वर्तमान वैश्विक जलवायु संकट के बीच नारियल की खेती के महत्व को रेखांकित करती है।
संस्थान के निदेशक के. बालचंद्र हेब्बार ने घोषणा की है कि इस अवसर पर 'SHITIZ 2.0' लॉन्च किया जाएगा। यह एक ऑनलाइन उद्यमिता मेंटरशिप और प्री-इन्क्यूबेशन कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य उभरते उद्यमियों, स्टार्टअप्स और इनोवेटर्स को उनके विचारों को व्यवहार्य व्यवसायों में बदलने में मदद करना है। यह कदम कृषि-व्यवसाय में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।
जलवायु लचीलापन और एल नीनो का प्रभाव
कार्यक्रम के एक मुख्य हिस्से के रूप में, 'वृक्षारोपण फसलों में चरम जलवायु भेद्यता के प्रबंधन' पर एक दो दिवसीय हितधारक कार्यशाला आयोजित की जाएगी। वर्तमान में भारत एल नीनो (El Niño) के प्रभावों और बढ़ती जलवायु परिवर्तनशीलता का सामना कर रहा है, जिससे वृक्षारोपण फसलों की उत्पादकता पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
इस कार्यशाला में वैज्ञानिकों, सरकारी अधिकारियों, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) और स्टार्टअप्स के बीच गहन चर्चा होगी। सत्रों में इस बात पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा कि कैसे जलवायु-लचीली गुणवत्ता वाली रोपण सामग्री का उत्पादन किया जाए और बदलते मौसम में कीटों और बीमारियों के नए स्वरूपों से कैसे निपटा जाए।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, पारंपरिक खेती अब पर्याप्त नहीं है। जब दुनिया खाद्य सुरक्षा के संकट से जूझ रही है, तब नारियल जैसी बहुमुखी फसल का वैज्ञानिक प्रबंधन न केवल किसानों की आय बढ़ाएगा, बल्कि टिकाऊ ऊर्जा विकल्पों (जैसे कोकोनट बायो-फ्यूल) के द्वार भी खोलेगा। यह पहल प्रयोगशाला के शोध को सीधे खेतों तक पहुँचाने का प्रयास है।
"जलवायु परिवर्तन अब एक भविष्य की चेतावनी नहीं बल्कि वर्तमान वास्तविकता है; वृक्षारोपण फसलों के लिए अनुकूलन रणनीतियाँ अब अनिवार्य हो गई हैं।"
इस आयोजन में दिनाकर अदिगा (निदेशक, ICAR-काजू अनुसंधान निदेशालय) मुख्य अतिथि होंगे, जबकि सेंटिल विनायगम (निदेशक, भारतीय वृक्षारोपण प्रबंधन संस्थान) कार्यशाला का उद्घाटन करेंगे। इस दौरान विभिन्न राज्यों के उत्कृष्ट किसानों और उद्यमियों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया जाएगा।
Frequently Asked Questions
1. SHITIZ 2.0 कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य कृषि-उद्यमियों और स्टार्टअप्स को मेंटरशिप प्रदान करना है ताकि वे नारियल आधारित तकनीकों को व्यावसायिक उत्पादों में बदल सकें।
2. कार्यशाला में किन प्रमुख मुद्दों पर चर्चा होगी?
मुख्य रूप से एल नीनो के प्रभाव, जलवायु-लचीली खेती और कीट प्रबंधन पर चर्चा की जाएगी।