केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने खुलासा किया कि अमेरिकी टैरिफ के बावजूद भारत का मत्स्य निर्यात तेजी से बढ़ा है। अब भारत यूके, जापान और चीन जैसे प्रमुख बाजारों में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है।

  • भारत का मत्स्य उत्पादन 2013-14 के 95.79 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में 197.75 लाख टन हो गया है।
  • अमेरिकी टैरिफ के बावजूद, मछली निर्यात 30,213 करोड़ रुपये से बढ़कर 73,890 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
  • यूके, जापान, चीन, थाईलैंड और यूरोपीय संघ अब भारत के प्रमुख नए मछली बाजार हैं।
  • गुणवत्ता सुधारने के लिए हानिकारक एंटीबायोटिक्स पर प्रतिबंध और क्यूआर कोड आधारित ट्रेसेबिलिटी सिस्टम लागू किया गया है।

केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह ने 'आइडिया एक्सचेंज' में एक महत्वपूर्ण चर्चा के दौरान भारत के मत्स्य क्षेत्र में हो रहे क्रांतिकारी बदलावों का खाका पेश किया। उन्होंने बताया कि कैसे भारत ने वैश्विक व्यापार चुनौतियों, विशेष रूप से अमेरिका द्वारा लगाए गए भारी टैरिफ के बावजूद, अपने निर्यात को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है।

मंत्री सिंह ने रेखांकित किया कि 2014 से पहले मत्स्य पालन कृषि मंत्रालय का हिस्सा था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के तहत इसे एक स्वतंत्र मंत्रालय बनाया गया। 'नीली क्रांति' और 'प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना' (PMMSY) जैसी योजनाओं के माध्यम से, भारत ने पिछले एक दशक में उत्पादन में 115 प्रतिशत की अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत की यह रणनीति केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बाजार विविधीकरण (Market Diversification) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। जब एक प्रमुख बाजार (अमेरिका) बाधाएं उत्पन्न करता है, तो भारत ने सक्रिय रूप से नए व्यापारिक साझेदार खोजे हैं, जो आर्थिक लचीलेपन को दर्शाता है।

अमेरिकी टैरिफ एक चुनौती थी, लेकिन हमने निर्यातकों को नए बाजार खोजने के लिए प्रेरित किया और गुणवत्ता मानकों को वैश्विक स्तर पर सुधारा।

निर्यात के मोर्चे पर, 2013-14 में निर्यात केवल 30,213 करोड़ रुपये था, जो 2024-25 में बढ़कर 62,408 करोड़ रुपये और वर्तमान वर्ष में 73,890 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। भारत ने यूरोपीय संघ और अन्य देशों के कड़े मानकों को पूरा करने के लिए हानिकारक एंटीबायोटिक्स पर प्रतिबंध लगाया है और मछली की उत्पत्ति बताने के लिए QR कोड आधारित ट्रेसेबिलिटी फ्रेमवर्क पेश किया है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में मत्स्य पालन का महत्व केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक भी है। लगभग 6 करोड़ लोगों की आजीविका इस क्षेत्र से जुड़ी है। 2015 में नीली क्रांति की शुरुआत और 2019 में अलग मंत्रालय के गठन ने इस क्षेत्र को संगठित करने में मदद की। बिहार जैसे राज्यों ने भी इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल की है, जहां उत्पादन में 11 गुना वृद्धि देखी गई है।

लक्षद्वीप और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में बुनियादी ढांचे के विकास पर भी जोर दिया जा रहा है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि समुद्री सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, उच्च समुद्रों (High Seas) में केवल भारतीय ध्वज वाले जहाजों को ही मछली पकड़ने की अनुमति दी जाएगी।

Did You Know?: भारत में मत्स्य उत्पादन में वृद्धि के कारण बिहार अब नेपाल और बंगाल जैसे पड़ोसी देशों को भी ताजे पानी की मछली निर्यात करता है।

Frequently Asked Questions

1. अमेरिकी टैरिफ का भारतीय मछली निर्यात पर क्या प्रभाव पड़ा?
अमेरिका में निर्यात में लगभग 19-20% की गिरावट आई, लेकिन भारत ने यूके और यूरोपीय संघ जैसे नए बाजारों में 20% से अधिक की वृद्धि हासिल कर इस कमी को पूरा कर लिया।

2. मछली की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
सरकार ने हानिकारक एंटीबायोटिक्स पर प्रतिबंध लगा दिया है और उत्पाद की उत्पत्ति सुनिश्चित करने के लिए क्यूआर कोड ट्रैकिंग प्रणाली लागू की है।