एस्सेल ग्रुप के संस्थापक सुभाष चंद्रा के व्यक्तिगत दिवाला मामले में रिकवरी की बेहद कम राशि को लेकर विवाद गहरा गया है। NCLT ने अब इस संवेदनशील मामले की सुनवाई के लिए एक उच्च-स्तरीय 5 सदस्यीय विशेष बेंच का गठन किया है।

  • NCLT ने सुभाष चंद्रा के व्यक्तिगत दिवाला मामले के लिए 5 सदस्यीय विशेष बेंच बनाई।
  • ₹22,000 करोड़ की गारंटी के मुकाबले केवल ₹6.25 करोड़ के भुगतान प्रस्ताव पर विवाद।
  • इण्डियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस द्वारा दायर याचिका के बाद यह कानूनी मोड़ आया है।

नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने सोमवार को एस्सेल ग्रुप के संस्थापक सुभाष चंद्रा से जुड़े व्यक्तिगत दिवाला कार्यवाही की सुनवाई के लिए एक पांच सदस्यीय विशेष बेंच का गठन किया है। यह निर्णय उस समय आया है जब इस मामले में लेनदारों (Creditors) को मिलने वाली राशि और कुल दावे के बीच का अंतर चौंकाने वाला है।

इस विशेष बेंच में ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष के साथ न्यायिक सदस्य बच्चू वेंकट बालराम दास और महेंद्र खंडेलवाल, तथा तकनीकी सदस्य अतुल चतुर्वेदी और रवींद्र चतुर्वेदी शामिल होंगे। यह कदम कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 419(5) के तहत राष्ट्रपति को किए गए संदर्भ के बाद उठाया गया है।

विवाद की जड़: रिकवरी और 'हेयरकट'

मामले में सबसे बड़ा विवाद उस पुनर्भुगतान योजना (Repayment Plan) को लेकर है, जिसे NCLT ने पहले मंजूरी दे दी थी। इस योजना के तहत, सुभाष चंद्रा द्वारा दी गई लगभग ₹22,000 करोड़ की गारंटी के बदले लेनदारों को केवल ₹6.25 करोड़ मिलने का प्रस्ताव था। इस भारी अंतर ने बैंकिंग क्षेत्र और वित्तीय विशेषज्ञों के बीच गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

"व्यक्तिगत गारंटी की प्रभावशीलता पर यह मामला एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है, खासकर जब प्रमोटर की संपत्ति उसकी देनदारियों से काफी कम हो।"

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति के दिवालियेपन का नहीं है, बल्कि यह भारत के दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (IBC) के कार्यान्वयन की परीक्षा है। यदि इतने बड़े 'हेयरकट' (कर्ज माफी) को स्वीकार किया जाता है, तो यह भविष्य के कॉर्पोरेट गवर्नेंस और प्रमोटर जवाबदेही के लिए एक खतरनाक मिसाल बन सकता है।

बैंकों और अन्य लेनदारों ने इस बात पर आपत्ति जताई थी कि क्या चंद्रा की वित्तीय स्थिति और संपत्तियों की पर्याप्त जांच की गई थी। उन्होंने इस मामले में फोरेंसिक जांच की मांग भी की थी। हालांकि, ट्रिब्यूनल ने पहले यह तर्क दिया था कि दिवालियापन की स्थिति में जाने के बजाय यह योजना लेनदारों के लिए बेहतर परिणाम दे सकती है।

विवरणदावा की गई राशि (लगभग)प्रस्तावित भुगतान
कुल गारंटी राशि₹22,000 करोड़₹6.25 करोड़
वोटिंग शेयर (समर्थन)80.814%-
वोटिंग शेयर (विरोध)19.186%-

सुभाष चंद्रा ने हाल ही में कहा था कि उनकी व्यक्तिगत गारंटी से जुड़े उधारकर्ताओं ने उनके साथ खातों का मिलान करने और शेष ₹4,262 करोड़ के निपटान का आश्वासन दिया है। अब सबकी नजरें इस नई विशेष बेंच के फैसले पर हैं।

क्या आप जानते हैं?: 'हेयरकट' वित्तीय शब्दावली में उस राशि को कहा जाता है जिसे लेनदार कर्ज वसूली के दौरान माफ कर देते हैं जब कर्जदार पूरी राशि चुकाने में असमर्थ होता है।

Frequently Asked Questions

1. सुभाष चंद्रा के खिलाफ दिवाला कार्यवाही किसने शुरू की?
यह कार्यवाही इण्डियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस द्वारा दायर एक याचिका के बाद शुरू की गई थी।

2. इस मामले में NCLT की विशेष बेंच क्यों बनाई गई?
रिकवरी की बेहद कम राशि और लेनदारों के बीच भारी असंतोष के कारण मामले की गहन समीक्षा के लिए एक बड़ी बेंच का गठन किया गया है।