चीनी के झटके के बाद अब भारत में प्याज की कीमतों ने जनता की नींद उड़ा दी है। उत्पादन में गिरावट न होने के बावजूद, बफर स्टॉक की कमी और खराब भंडारण ने कीमतों को 60% तक बढ़ा दिया है।

  • खुदरा कीमतों में साल-दर-साल 59% की वृद्धि, औसत दाम ₹43.53 प्रति किलो पहुंचे।
  • उत्पादन स्थिर (30.73 मिलियन टन) रहा, लेकिन बफर स्टॉक लक्ष्य में 40% की कमी आई।
  • भंडारण में 30% प्याज सड़ने और अंकुरित होने के कारण आपूर्ति बाधित हुई।
  • केंद्र सरकार ने दिल्ली और अन्य प्रमुख शहरों के लिए 'कांडा एक्सप्रेस' और सब्सिडी वाले प्याज की शुरुआत की है।

भारत में प्याज केवल एक सब्जी नहीं, बल्कि एक अत्यंत 'राजनीतिक' फसल है। हाल के दिनों में, गुजरात जैसे राज्यों में खुदरा कीमतें मात्र 15 दिनों में ₹35-40 से बढ़कर ₹60-70 प्रति किलो तक पहुंच गई हैं। राष्ट्रीय स्तर पर, थोक दरों में 68% की भारी वृद्धि देखी गई है, जिसने मध्यमवर्गीय परिवारों के बजट को पूरी तरह बिगाड़ दिया है।

हैरानी की बात यह है कि यह संकट उत्पादन में किसी बड़ी गिरावट के कारण नहीं आया है। वर्ष 2025-26 के लिए प्याज का अनुमानित उत्पादन 30.73 मिलियन टन है, जो पिछले वर्ष के लगभग बराबर है। असली समस्या सरकार के बफर स्टॉक के प्रबंधन में है। मूल्य स्थिरीकरण कोष (Price Stabilisation Fund) के तहत रबी प्याज की खरीद का लक्ष्य 0.2 मिलियन टन था, लेकिन NAFED और NCCF मिलकर केवल 0.12 मिलियन टन ही जुटा पाए।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह संकट केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन और लॉजिस्टिक्स की कमी का परिणाम है। जब बफर स्टॉक का लक्ष्य पूरा नहीं हुआ और मौजूदा स्टॉक का 30% हिस्सा सड़ गया, तो बाजार में कृत्रिम कमी पैदा हो गई। यह दर्शाता है कि भारत की खाद्य सुरक्षा प्रणाली अभी भी मौसमी उतार-चढ़ाव के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है।

इस स्थिति को और बदतर बनाने में बेमौसम बारिश ने बड़ी भूमिका निभाई। कटाई और बुआई के दौरान हुई बारिश ने न केवल प्याज की गुणवत्ता को प्रभावित किया, बल्कि गोदामों में उनके खराब होने की दर को भी बढ़ा दिया। इसके कारण किसानों ने सितंबर के पारंपरिक समय का इंतजार करने के बजाय जून-जुलाई में ही स्टॉक बेचना शुरू कर दिया, जिससे बफर स्टॉक खाली रह गया।

"बफर स्टॉक में लक्ष्य की कमी और भंडारण के दौरान उच्च क्षय दर ने बाजार की अस्थिरता को जन्म दिया, जिससे कीमतें अनियंत्रित हो गईं।"

सरकार ने अब प्रतिक्रियात्मक कदम उठाए हैं। 'कांडा एक्सप्रेस' मालगाड़ियों के जरिए नासिक से दिल्ली, चेन्नई, मदुरै, एर्नाकुलम और गुवाहाटी जैसे प्राथमिकता वाले केंद्रों तक 800 टन प्याज पहुंचाया जा रहा है। साथ ही, दिल्ली में ₹35 प्रति किलो की दर से सब्सिडी वाले प्याज की बिक्री शुरू की गई है। हालांकि, गुजरात जैसे राज्य, जहां कीमतें चरम पर हैं, अभी भी प्राथमिकता सूची से बाहर हैं।

विवरण पिछले वर्ष/लक्ष्य वर्तमान स्थिति (2026)
उत्पादन (मिलियन टन) 30.76 30.73
बफर स्टॉक खरीद लक्ष्य 0.2 मिलियन टन 0.12 मिलियन टन
औसत खुदरा मूल्य वृद्धि - ~59% वृद्धि
क्या आप जानते हैं?: भारत दुनिया का सबसे बड़ा प्याज उत्पादक देश है, लेकिन भंडारण की आधुनिक सुविधाओं की कमी के कारण हर साल बड़ी मात्रा में फसल बर्बाद हो जाती है।

Frequently Asked Questions

1. उत्पादन स्थिर होने के बावजूद कीमतें क्यों बढ़ीं?
मुख्य कारण बफर स्टॉक की कमी, भंडारण के दौरान प्याज का सड़ना और बेमौसम बारिश के कारण आपूर्ति श्रृंखला का बाधित होना है।

2. सरकार कीमतों को नियंत्रित करने के लिए क्या कर रही है?
सरकार 'कांडा एक्सप्रेस' के माध्यम से आपूर्ति बढ़ा रही है और चुनिंदा शहरों में ₹35/किलो की दर से सब्सिडी वाला प्याज बेच रही है।