चेन्नई के ताम्बरम स्थित MEPZ में गारमेंट यूनिट की महिला श्रमिकों ने महीनों से चल रहे छंटनी और बकाया वेतन के विवाद के बाद प्रबंधन के साथ समझौता कर लिया है।

  • चार महीने से अधिक समय से चल रहा था विवाद।
  • प्रबंधन ने बकाया राशि श्रमिकों के बैंक खातों में जमा की।
  • परिवहन सुविधा बंद करने और छंटनी के आरोपों के बाद हुआ समझौता।
  • लेबर डिपार्टमेंट और महिला वर्कर्स यूनियन की मध्यस्थता रही सफल।

चेन्नई: मद्रास एक्सपोर्ट प्रोसेसिंग ज़ोन (MEPZ), ताम्बरम स्थित एक गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की महिला श्रमिकों ने प्रबंधन के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया है। यह समझौता चार महीने से अधिक समय से चल रहे विवाद के समाधान के रूप में देखा जा रहा है, जो परिवहन सुविधाओं को वापस लेने, कथित छंटनी और बकाया वेतन भुगतान जैसे गंभीर मुद्दों पर केंद्रित था।

बातचीत में शामिल कार्यकर्ताओं और श्रमिकों के अनुसार, प्रबंधन ने मंगलवार को श्रमिकों के बैंक खातों में लंबित राशि जमा कर दी है। हालांकि, यह भुगतान इस शर्त के साथ किया गया है कि श्रमिकों के पास कानूनी उपचार मांगने का अधिकार सुरक्षित रहेगा। यह घटनाक्रम श्रमिकों, सेलिब्रिटी फैशन्स प्राइवेट लिमिटेड और श्रम विभाग के अधिकारियों के बीच हुई एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद सामने आया है।

विवाद की जड़: परिवहन सुविधा का अचानक बंद होना

महिला वर्कर्स यूनियन की सुजाता मोदी ने बताया कि यह विवाद मई में शुरू हुआ था जब कंपनी ने लागत में कटौती के नाम पर अपनी परिवहन सेवाएं बंद कर दी थीं। लगभग 65 बसों को वापस ले लिया गया था, जिससे मदुरंतकम और कुंद्राथूर जैसे दूरदराज के इलाकों से आने वाली महिला कर्मचारियों पर गहरा प्रभाव पड़ा।

श्रमिकों और कार्यकर्ताओं का आरोप है कि परिवहन सेवाओं को वापस लेने का उद्देश्य वास्तव में 100 से अधिक श्रमिकों, जिनमें अधिकांश महिलाएं थीं, को काम पर आने से रोकना और प्रभावी रूप से उन्हें नौकरी से बाहर करना था। पूर्व कर्मचारी कामक्षी ने बताया कि अचानक बसें बंद होने से उनके पास कार्यस्थल तक पहुँचने का कोई व्यावहारिक तरीका नहीं बचा था।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस तरह के मामले कॉर्पोरेट जगत में 'अप्रत्यक्ष छंटनी' (Indirect Retrenchment) की बढ़ती प्रवृत्ति को उजागर करते हैं। जब कंपनियां सीधे तौर पर छंटनी करने के बजाय बुनियादी सुविधाएं जैसे परिवहन हटा लेती हैं, तो वे कानूनी पेचीदगियों से बचने की कोशिश करती हैं। यह मामला भविष्य में श्रम कानूनों के प्रवर्तन के लिए एक मिसाल बनेगा।

यह जीत अन्य कंपनियों के लिए एक सकारात्मक मिसाल कायम करेगी जो कर्मचारियों को निकालने के लिए विभिन्न तरीकों का उपयोग करती हैं।

विवाद के दौरान प्रबंधन ने श्रमिकों पर अर्जित अवकाश (earned leave) और 2024-25 के बोनस सहित अपने बकाया पाने के लिए इस्तीफा देने का दबाव भी बनाया था। हालांकि, महिलाओं के एक समूह ने इस कदम का कड़ा विरोध किया और अंततः श्रम विभाग के हस्तक्षेप के बाद अपनी मांगों को मनवाने में सफल रहे।

Did You Know?: भारत में औद्योगिक विवादों के समाधान के लिए श्रम विभाग एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभाता है, जो प्रबंधन और श्रमिकों के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास करता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: विवाद का मुख्य कारण क्या था?
उत्तर: मुख्य कारण कंपनी द्वारा परिवहन सेवाएं बंद करना और श्रमिकों का बकाया वेतन न देना था।

प्रश्न 2: किस कंपनी के खिलाफ यह विरोध प्रदर्शन किया गया था?
उत्तर: यह विरोध सेलिब्रिटी फैशन्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ किया गया था।