अमेरिकी नागरिक अधिकार आयोग (EEOC) ने पाया है कि नेटवर्किंग दिग्गज सिस्को ने अपने मुस्लिम और मध्य पूर्वी कर्मचारियों के खिलाफ भेदभावपूर्ण और शत्रुतापूर्ण वातावरण को बढ़ावा दिया है। यह मामला कंपनी द्वारा इज़राइल को तकनीक बेचने के विरोध में की गई सक्रियता से जुड़ा है।

  • EEOC ने सिस्को के खिलाफ भेदभावपूर्ण कार्य वातावरण की पुष्टि की है।
  • कर्मचारियों ने इज़राइल को तकनीक आपूर्ति का विरोध किया था।
  • कंपनी पर कर्मचारियों के खिलाफ प्रतिशोध और उत्पीड़न के गंभीर आरोप हैं।

नेटवर्किंग दिग्गज सिस्को (Cisco) एक बड़े कानूनी संकट में फंस गई है। अमेरिकी नागरिक अधिकार आयोग (EEOC) ने एक महत्वपूर्ण निर्धारण जारी किया है जिसमें कहा गया है कि कंपनी ने अपने मुस्लिम और मध्य पूर्वी कर्मचारियों के खिलाफ एक शत्रुतापूर्ण कार्य वातावरण को बढ़ावा दिया है। यह मामला तब सामने आया जब कर्मचारियों ने कंपनी की तकनीक को इज़राइली सेना को बेचने का विरोध किया था।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब 'ब्रिज टू ह्यूमैनिटी' (B2H) नामक कर्मचारियों के एक समूह ने एक खुला पत्र लिखकर सिस्को से इज़राइल को अपनी तकनीक की आपूर्ति रोकने का आग्रह किया था। इस पत्र पर कंपनी के 86,000 में से 1,700 से अधिक कर्मचारियों ने हस्ताक्षर किए थे। हालांकि, कर्मचारियों का आरोप है कि कंपनी ने न केवल इस पत्र को हटा दिया, बल्कि हस्ताक्षर करने वालों को लक्षित और प्रताड़ित भी किया।

क्यों यह मामला महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि यह मामला केवल एक कॉर्पोरेट विवाद नहीं है, बल्कि यह 'बिग टेक' कंपनियों के भीतर राजनीतिक और धार्मिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का एक बड़ा परीक्षण है। जब कर्मचारी अपनी कंपनी की नैतिकता पर सवाल उठाते हैं, तो क्या कंपनी को उन्हें चुप कराने का अधिकार है? यह मामला भविष्य के श्रम कानूनों के लिए एक मिसाल बन सकता है।

यह पहली बार हो सकता है जब किसी सरकारी निकाय ने उन टेक कर्मचारियों का साथ दिया हो जो अपने नियोक्ता की सैन्य बिक्री के खिलाफ संगठित हुए थे।

कर्मचारियों ने एक 76 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट भी पेश की थी, जिसमें आंतरिक मैसेजिंग ग्रुप 'कनेक्टेड यहूदी नेटवर्क' में की गई नफरत भरी टिप्पणियों का विवरण था। रिपोर्ट के अनुसार, कर्मचारियों ने हिंसा का महिमामंडन किया, फिलिस्तीनियों की तुलना जानवरों से की और मुस्लिम कर्मचारियों को 'आतंकवादी' कहकर अपमानित किया।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

कॉर्पोरेट जगत में 'एथिकल टेक' (Ethical Tech) का मुद्दा पिछले कुछ वर्षों में तेजी से उभरा है। गूगल और अमेज़न जैसी बड़ी कंपनियों के कर्मचारी भी अक्सर अपनी कंपनियों द्वारा सैन्य अनुबंधों को लेकर विरोध प्रदर्शन करते रहे हैं। सिस्को का यह मामला इस वैश्विक बहस को एक नया मोड़ देता है।

लीगल एड एट वर्क (Legal Aid at Work) नामक गैर-लाभकारी संस्था ने इस मामले में कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व किया है। उन्होंने सिस्को के खिलाफ नेशनल लेबर रिलेशंस बोर्ड (NLRB) में भी शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें आरोप है कि कंपनी ने कर्मचारियों के राजनीतिक और संगठित होने के अधिकारों का उल्लंघन किया है।

क्या आप जानते हैं?: सिस्को दुनिया की सबसे बड़ी नेटवर्किंग कंपनियों में से एक है, जिसका मुख्यालय सैन जोस, कैलिफोर्निया में स्थित है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. EEOC क्या है?
EEOC यानी अमेरिकी समान रोजगार अवसर आयोग, जो अमेरिका में भेदभाव विरोधी कानूनों को लागू करने के लिए जिम्मेदार है।

2. कर्मचारियों की मुख्य मांग क्या थी?
कर्मचारी चाहते थे कि सिस्को अपनी तकनीक इज़राइली सैन्य बलों को देना बंद कर दे।