भारत सरकार ने सेमिकॉन 2.0 फ्रेमवर्क की घोषणा की है, जिसके तहत ₹1.27 लाख करोड़ के निवेश से घरेलू चिप डिजाइन और बौद्धिक संपदा (IP) को प्राथमिकता दी जाएगी।
- सेमिकॉन 2.0 कार्यक्रम के लिए ₹1.27 लाख करोड़ का आवंटन।
- 'फैबलेस' चिप कंपनियों और घरेलू बौद्धिक संपदा (IP) के निर्माण पर विशेष जोर।
- उपकरण निर्माताओं के लिए 50% तक और बड़े सिलिकॉन वेफर फैब्स के लिए 40% तक पूंजीगत व्यय (Capex) सहायता।
- वैश्विक अनुभव का लाभ उठाने के लिए प्रवासी भारतीय (OCI) कंपनियों को भी पात्रता में शामिल किया गया।
केंद्र सरकार ने सोमवार को सेमिकॉन 2.0 कार्यक्रम के परिचालन ढांचे को अधिसूचित किया है। ₹1.27 लाख करोड़ के इस विशाल निवेश के साथ, भारत अब केवल चिप असेंबली तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि चिप डिजाइन और बौद्धिक संपदा (IP) के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व हासिल करने की तैयारी में है।
इस नए मिशन को छह मुख्य स्तंभों में विभाजित किया गया है, जिनमें से तीन पूरी तरह से चिप डिजाइन के लिए समर्पित हैं। सरकार का लक्ष्य ऐसी 'फैबलेस' कंपनियां बनाना है जो चिप का डिजाइन तैयार करें, भले ही उनका निर्माण कहीं और हो। स्टार्टअप्स और MSMEs के लिए ₹15 करोड़ तक की सीड फंडिंग का प्रावधान किया गया है, ताकि नवाचार को बढ़ावा मिल सके।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, डिजाइन चरण को प्राथमिकता देकर भारत सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन के सबसे लाभदायक हिस्से को लक्षित कर रहा है। फैब्रिकेशन प्लांट लगाना अत्यधिक महंगा और जोखिम भरा होता है, लेकिन डिजाइन-आधारित विकास भारत को उसके सॉफ्टवेयर और VLSI इंजीनियरिंग कौशल का लाभ उठाने की अनुमति देता है। यह कदम भारत को विदेशी तकनीक के उपभोक्ता से बदलकर तकनीक के निर्माता के रूप में स्थापित करेगा।
राष्ट्रीय महत्व के बुनियादी ढांचे के लिए, सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (C-DAC) की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। C-DAC कंप्यूट, मेमोरी और सेंसर जैसे क्षेत्रों के लिए आवश्यक तकनीकों की पहचान करेगा और उनके विकास के लिए निविदाएं जारी करेगा। इससे रक्षा और अंतरिक्ष जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में विदेशी निर्भरता कम होगी।
"OCI कंपनियों के लिए योजना के दरवाजे खोलना एक दूरदर्शी निर्णय है, क्योंकि वे वैश्विक अनुभव लाएंगे जो भारत में उन्नत डिजाइन कंपनियों के निर्माण में मदद करेगा।"
डिजाइन के अलावा, यह योजना सेमीकंडक्टर कारखानों के लिए आवश्यक 'अपस्ट्रीम' सप्लाई चेन बनाने पर भी केंद्रित है। वेफर, फोटोमास्क, रसायन और गैसें बनाने वाली कंपनियों को 30% तक का पूंजीगत व्यय समर्थन मिलेगा। साथ ही, ₹20,000 करोड़ से अधिक निवेश करने वाले बड़े सिलिकॉन वेफर फैब्स को 40% तक की वित्तीय सहायता दी जाएगी।
| श्रेणी | सहायता/प्रोत्साहन | मुख्य शर्त |
|---|---|---|
| स्टार्टअप्स/MSMEs | ₹15 करोड़ तक सीड फंड | परियोजना लागत का अधिकतम 50% |
| बड़े सिलिकॉन फैब्स | 40% Capex सहायता | न्यूनतम ₹20,000 करोड़ निवेश |
| एडवांस्ड पैकेजिंग | 35% Capex सहायता | 2.5D/3D इंटीग्रेशन |
| उपकरण निर्माता | कुल 50% तक सहायता | घरेलू सोर्सिंग पर PLI शामिल |
मानव संसाधन के मोर्चे पर भी सरकार आक्रामक है। आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि भारत ने मात्र चार वर्षों में 85,000 सेमीकंडक्टर इंजीनियर तैयार कर लिए हैं और अब एक लाख और इंजीनियरों का लक्ष्य रखा है। इस पारिस्थितिकी तंत्र से लगभग 50,000 से 60,000 प्रत्यक्ष उच्च-कुशल नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. सेमिकॉन 2.0 के तहत सीड फंडिंग के लिए कौन पात्र है?
व्यावसायिक चिप डिजाइन करने वाले स्टार्टअप और MSMEs ₹15 करोड़ या परियोजना लागत के 50% (जो भी कम हो) तक की सीड फंडिंग प्राप्त कर सकते हैं।
2. बड़ी कंपनियों के लिए रॉयल्टी फाइनेंसिंग मॉडल क्या है?
बड़ी कंपनियां रॉयल्टी फाइनेंसिंग चुन सकती हैं, जिसके तहत वे उत्पाद के शुद्ध राजस्व का 5% तब तक भुगतान करेंगी जब तक कि सरकारी सहायता का 1.5 गुना वसूल न हो जाए।