भारत सरकार की नई FAST-DS योजना के तहत विदेशी संपत्तियों के प्रकटीकरण के लिए निर्धारित ₹1 लाख की फ्लैट फीस ने छोटे करदाताओं और टेक कर्मचारियों के बीच भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।
- FAST-DS योजना के तहत विदेशी संपत्ति घोषित करने के लिए ₹1 लाख की न्यूनतम फीस अनिवार्य है।
- ESOPs और RSUs प्राप्त करने वाले टेक कर्मचारियों और छोटे निवेशकों के लिए यह राशि अत्यधिक है।
- योजना का उद्देश्य छोटे करदाताओं की मदद करना था, लेकिन पेनल्टी की राशि ने इसे विवादित बना दिया है।
भारत सरकार ने हाल ही में Foreign Assets of Small Taxpayers – Disclosure Scheme (FAST-DS) लॉन्च की है। इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य उन छोटे करदाताओं, छात्रों और युवा पेशेवरों को राहत देना था जिन्होंने अनजाने में अपनी विदेशी संपत्तियों का खुलासा नहीं किया था। हालांकि, अगस्त 16 से लागू इस योजना ने एक नई बहस छेड़ दी है, क्योंकि इसमें प्रकटीकरण शुल्क (Disclosure Fee) को बहुत अधिक माना जा रहा है।
सबसे अधिक प्रभावित वे वेतनभोगी कर्मचारी हैं जिन्हें विदेशी कंपनियों से Employee Stock Ownership Plans (ESOPs) या Restricted Stock Units (RSUs) मिले हैं। कई मामलों में, ये स्टॉक कर्मचारी के वेतन का हिस्सा होते हैं और कंपनी द्वारा रिपोर्ट किए जाते हैं, लेकिन करदाता द्वारा आयकर रिटर्न के 'Schedule FA' में अलग से घोषित नहीं किए जाते। अब, ऐसी छोटी त्रुटियों को सुधारने के लिए भी सरकार ₹1 लाख की फ्लैट फीस मांग रही है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह स्थिति 'सामग्रीता' (Materiality) के सिद्धांत के खिलाफ है। यदि किसी व्यक्ति ने अमेरिकी शेयरों में केवल ₹90,000 का निवेश किया है और वह भी घाटे में है, तो ₹1 लाख का प्रकटीकरण शुल्क उसके पूरे निवेश को शून्य कर देता है। यह न केवल आर्थिक बोझ है, बल्कि उन ईमानदार करदाताओं के लिए निराशाजनक है जिन्होंने जानबूझकर टैक्स चोरी नहीं की, बल्कि केवल तकनीकी त्रुटि की।
"जब निवेश की राशि स्वयं जुर्माने से कम हो, तो ऐसी फ्लैट फीस छोटे करदाताओं के लिए दंडात्मक बन जाती है, न कि सुधारात्मक।"
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि अधिकारियों को उन लोगों के मामले में लचीलापन दिखाना चाहिए जो पहले अनिवासी भारतीय (NRI) थे और बाद में भारत वापस आए। कई कर्मचारियों ने NRI रहते हुए ESOPs प्राप्त किए थे और निवासी बनने के बाद उन्हें घोषित करना भूल गए। ऐसे मामलों में स्रोत की जांच करते समय उनकी रेजिडेंसी स्थिति पर विचार करना आवश्यक है।
डेटा के अनुसार, भारत से वित्तीय डेरिवेटिव और ESOPs के माध्यम से शुद्ध बहिर्वाह (Net Outflow) में भारी वृद्धि हुई है। वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा लगभग $24 बिलियन तक पहुंच गया, जो दर्शाता है कि भारतीय कार्यबल में विदेशी इक्विटी का चलन तेजी से बढ़ा है।
| श्रेणी (Category) | संपत्ति की सीमा | लागू शुल्क/टैक्स |
|---|---|---|
| अघोषित विदेशी आय (पहली बार) | ₹1 करोड़ तक | 30% FMV टैक्स + 30% पेनल्टी |
| पूर्व-करित/NRI संपत्ति (घोषणा त्रुटि) | ₹5 करोड़ तक | ₹1 लाख फ्लैट फीस |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या मैं FAST-DS के बजाय अपडेटेड रिटर्न (Updated Return) फाइल कर सकता हूँ?
उत्तर: टैक्स अधिकारियों के अनुसार, यदि आय पहले कभी टैक्स नहीं की गई थी, तो ब्लैक मनी एक्ट के तहत अपडेटेड रिटर्न मान्य नहीं होगा, इसलिए FAST-DS बेहतर विकल्प है।
उत्तर: यह उन लोगों के लिए है जिनकी विदेशी संपत्ति ₹5 करोड़ तक है और जिन्होंने केवल प्रकटीकरण (Disclosure) में गलती की है, ताकि वे भारी कानूनी कार्रवाई से बच सकें।